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बेहतर सिंचाई का साधन पाकर उन्नति की राह पर अग्रसर हुआ कृषक

बेहतर सिंचाई का साधन पाकर उन्नति की राह पर अग्रसर हुआ कृषक

राजेश राज गुप्ता, बैकुण्ठपुर। राज्य शासन की प्राथमिकताओं के अनुसार वनाधिकार पत्रक धारी वनवासी परिवारों की आजीविका स्तर में सुधार के लिए निरंतर कार्य जारी है। इस कार्य में महात्मा गांधी नरेगा एक अहम भूमिका निभा रहा है। पहले केवल बारिश पर आधारित अपनी खेती करने वाले आदिवासी किसान परिवार के पास अब दोगुनी फसल का लाभ भी है और वह साल भर चलने वाली रोजगार की तलाश से भी दूर हो चुके हैं। 

ऐसे ही मेहनतकष किसान परिवार की सफलता का जीवंत उदाहरण हैं बुंदेली निवासी राय सिंह का परिवार। साल भर पहले तक पर्याप्त कृषि भूमि होने के बाद भी मनरेगा के अकुषल श्रम के लिए प्रयास करने वाले इस परिवार के पास अब अपने ही खेतों में काम करने के लिए समय कम पड़ने लगा है। इस मेहनत का परिणाम यह हुआ है कि इस परिवार की मासिक आय औसतन 10 से 12 हजार रूपए से ज्यादा हो चुकी है। 

सब्जी के उत्पादन से एक सीजन में ही यह परिवार 50 से 60 हजार रूपए कमाने लगा है। सिंचाई के संसाधन बन जाने के बाद इस किसान को कृषि विभाग की सहायता से 30 पाइप और एक पंप मिल गया है। इससे इनके खेतों में भरपूर सिंचाई की सुविधा हो गई है और अब यह परिवार पारंपरिक फसलों के अलावा बड़ी मात्रा में साग-सब्जी का उत्पादन करने लगा है।

परिश्रम और जनहितकारी योजनाओं के संयोजन से मिली सफलता की यह कहानी है मनेन्द्रगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बुंदेली में रहने वाले आदिवासी किसान राय सिंह की। यहां इनका पांच सदस्यीय परिवार कई वर्षों से निवासरत है। राय सिंह बतलाते हैं कि पहले उनके पास वनाधिकार की 6 एकड़ भूमि थी जिसमें वह केवल बारिष आधारित धान की खेती ही किया करते थे। धान की फसल भी अवर्षा या मौके पर बारिश न होने के कारण मात्र 40 क्विंटल तक ही हुआ करती थी। इसे बेचकर ही इनके परिवार का दैनिक खर्च पूरा होता था। 

जीवन यापन के लिए इनका परिवार मनरेगा के अकुशल श्रम पर निर्भर रहता था। पहले यह अपने बाड़ी में दूर से पानी लाकर बहुत कम मात्रा में सब्जी उत्पादन करते थे। एक बार सब्जी बाजार में सब्जी बेचते हुए इन्हे जनपद में पदस्थ कार्यक्रम अधिकारी द्वारा महात्मा गांधी नरेगा के तहत बनने वाले कुंए के बारे में बताया गया। इन्होने ग्राम पंचायत के सरपंच से मिलकर अपने कागजात निकाले और कुंआ बनाने के लिए आवेदन ग्राम पंचायत को दिया। ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर इन्हे वर्ष 2019 में वन अधिकार पत्र की भूमि पर कूप निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हो गई। 

ग्राम पंचायत को राय सिंह का कुंआ बनाने के लिए एक लाख अस्सी हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई। सही जगह का चयन करके इस परिवार ने फरवरी 2019 से अपने अन्य साथियों के साथ मनरेगा के तहत कूप निर्माण कार्य प्रारंभ किया। इस कार्य से इनके परिवार को 100 दिन का रोजगार भी प्राप्त हुआ और मजदूरी के रूप में 19 हजार रुपए का सीधा लाभ भी मिला। कुआं बन जाने के बाद उन्होंने कृषि विभाग से अनुदान में मिलने वाला सिंचाई पंप और पाइप ले लिए। इसके बाद उनकी खेती की सूरत ही बदल गई। पहले जहां इनके खेतों में 40 क्विंटल धान होता था इस बार इन्होने 110 क्विंटल से ज्यादा धान का उत्पादन किया और उसे सहकारी साख समिति के माध्यम से बेचकर अच्छा खासा लाभ कमाया है।

इसके अलावा राय सिंह बतलाते हैं कि कुंए से सिंचाई सुविधा मिलने के बाद उन्होने अपने तीन-चार एकड़ भूमि को साग सब्जी उत्पादन के लिए उपयोग करना प्रारंभ कर दिया है। वह अपने खेतों में आलू, गोभी टमाटर, भाजी का बड़े स्तर पर उत्पादन करके उसे स्थानीय बाजारों में हाथेां हाथ बेच लेते हैं। राय सिंह ने बताया कि खेती के इस काम में उनके परिवार के अलावा भाई के परिवार के सदस्य भी मदद करते हैं और मिलने वाले लाभ को आपस में बांटकर खुष हैं। 

एक सीजन में ही उनका परिवार  50 से 60 हजार रुपए की सब्जी बेच लेता है। राय सिंह कहते हैं कि हर सप्ताह वह लेदरी, बंजी और पाराडोल के साप्ताहिक बाजार में अपनी सब्जियां ले जाकर बेचते हैं आसानी से 12 से 15 सौ रूपए मिल जाते हैं। इस तरह से उनकी मासिक आय भी 12 हजार रूप्ए से ज्यादा हो जाती है। कुल मिलाकर एक संसाधन बन जाने के बाद से ही मनरेगा श्रमिक परिवार अब रोजगार की चिंता से मुक्त होकर अपना अच्छा सामाजिक जीवन जीने लगा है।