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शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है मरवाही विधानसभा का चुनाव

शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है मरवाही विधानसभा का चुनाव

बिलासपुर।  छत्तीसगढ़ के एक मात्र मरवाही विधानसभा क्षेत्र पर उप चुनाव हुआ है।  जिसका  परिणाम 10 नवम्बर को आने वाला है । राजनितिक पार्टियों की  धड़कने तेज होने लगी है। इस चुनाव के जिम्मेदारी नेताओ की धुकधुकी बढ़ गई है जिन्हें  अलग अलग सेक्टरों की जिम्मेदारी दी गई थी। 

जानकारों के मुताबिक  इस चुनाव के नतीजे  से भाजपा को कोई नुकसान नहीं वाला है।  लेकिन कांग्रेस के उन नेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिनको अलग अलग सेक्टर में चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी,  क्योंकि मरवाही चुनाव के बाद निगम मंडल आयोग में नियुक्ति की दूसरी सूची जारी होगी।

मरवाही के चुनाव के परिणाम इन नेताओ का भविष्य जरूर दांव पर लगा है  जिन्हें कांग्रेस ने इस चुनाव की जिम्मेदारी दी थी , उनके ऊपर खतरे के बादल मंडरा रहे है   सरकार पर कोई खतरा नहीं है।  लेकिन इसके कई नेताओं का भविष्य जरूर दांव पर लगा है। चुनाव के बाद निगम, मंडल, आयोगों में नियुक्ति की सूची फिर जारी होगी। 

बिलासपुर व कोरबा जिले के दूसरे क्रम के नेताओं को अलग-अलग सेक्टर पर जिम्मेदारी दे दी गई है जिसमें उन्हें अपनी पार्टी को बढ़त दिलानी होगी। इनमें कई विधायक, पूर्व विधायक व प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी शामिल हैं। जाहिर है उनके सेक्टर में कांग्रेस को बढ़त मिली तो पार्टी उन्हें पुरस्कृत करेगी।

भाजपा के नेता यह मानकर चल रहे हैं कि एक सीट मरवाही के जीतने से सरकार नहीं बन सकती लेकिन वे कांग्रेस को बड़ी जीत से रोकने के लिए के फील्ड में कड़ी मेहनत किए। राजनीतिक पंडितों की माने तो जोगी कांग्रेस के मैदान में नहीं रहने से उसके वोटों का बिखराव होगा।

इसमें सीधे सीधे पार्टी के शीर्ष नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़ गई है। दूसरी तरफ पिछले चुनाव में बुरी तरह पराजित भाजपा का अभियान सामूहिक है। चुनाव जीतने पर वह और आक्रामक होगी और भविष्य में पार्टी का जनाधार वापस हासिल करने में मदद मिलेगी।