Live_Report : पुलिस-प्रशासन का आवेदनों का निराकरण करने में हीलहवाला, बस्तर, बेमेतरा, बलौदाबाजार के 1000 से ज्यादा लोग तेलंगाना-आंध्र में फंसे,

Live_Report : पुलिस-प्रशासन का आवेदनों का निराकरण करने में हीलहवाला, बस्तर, बेमेतरा, बलौदाबाजार के 1000 से ज्यादा लोग तेलंगाना-आंध्र में फंसे,

रायपुर. कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में चल रहे लॉकडाउन की स्थिति में काम बंद होने के कारण छत्तीसगढ़ के रहवासी विभिन्न राज्यों में फंस गए हैं. जिनके पास खाने और आने के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं. स्थानीय प्रशासन मदद नही कर रहा है और छत्तीसगढ़ प्रशासन में उहापोह की स्थिति है. लोग समझ नही पा रहे हैं कि किससे मदद मांगी जाए.

हमारे संवाददाताओं ने पाया कि कलेक्टर से लेकर जिस अधिकारी को फोन लगाया जा रहा है, वह कुछ भी जवाब देने या मदद करने की स्थिति में नही है. फोन लगाने पर उठाया नही जा रहा है और मेसेज करने को कहा जा रहा है और मेसेज करने पर कोई रिप्लाय नही आ रहा. इस संवाददाता का यही अनुभव रहा है. सबूत के तौर पर इसके स्क्रीन शॉट तक हमारे पास हैं.

कांकेर में अपने प्राइवेट व्हीकल से परिवार को लेने जाने की इच्छा रख रहे एक व्यक्ति ने जब एसडीएम को आवेदन दिया तो तीन दिन ​तक उस पर कोई सुनवाई नही हुई. फिर केबिनेट में फैसला होने का हवाला देकर उसे एक दिन और टाल दिया गया. और अंतत: तीसरे दिन जवाब आया है कि कुछ नही कर सकते.

इसी तरह हमारे संवाददाताओं ने जब कलेक्टर आफिस का मुआयना किया तो वहां पर सैकड़ों लोग खड़े मिले जोकि रायपुर से अपने शहर की ओर जाना चाह रहे हैं लेकिन किसी को अनुमति नही दी जा रही. लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था देते हुए उन्हें संबंधित पुलिस थाना में आवेदन देने को कहा गया. इसके बाद जब वे थाना पहुंचे तो पुलिस कर्मियों ने पुन: उन्हें कलेक्ट्रेट जाने को कहा. तीसरी बार जब कलेक्ट्रेट आए तो फिर नई व्यवस्था दे दी गई.

एक अधिकारी ने पीड़ित व्यक्ति से कहा कि नई व्यवस्था के तहत पहले थाना में आवेदन दीजिए, वहां से हमारे पास आएगा, उसके बाद ही कोई फैसला कर सकेंगे. स्पष्ट है कि प्रशासन दिग्भ्रमित है और उसके पास कोई लिखित आदेश नही है. एक सरकारी कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि लिखित में कोई अपनी कलम नही फंसाना चाहता इसलिए मौखिक आदेश ही चल रहे हैं.

इस मामले में जब कलेक्टर को फोन लगाया गया तो उन्होंने पहले उठाया और थोड़ी देर बाद कट हो गया. उसके बाद वे भी फोन नही उठा रहे. इस तरह देखा जाए तो प्रशासन के पास भी समस्या का हल नही हो पा रहा है.