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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने भिलाई निगम का अभिनव पहल, शहरी गौठान में महिला समूह आर्थिक स्तंभ के रूप में ले रहा आकार

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने भिलाई निगम का अभिनव पहल, शहरी गौठान  में महिला समूह आर्थिक स्तंभ के रूप में ले रहा आकार

रमेश गुप्ता 

भिलाई।  भिलाई निगम के शहरी गौठान, कोसा नगर में छग शासन कीे चार महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी सहित गोधन न्याय योजना अपना आकार ले रही है। वहीं यहां आजीविका के साधन को भी बढ़-चढ़कर महत्व दिया जा रहा है।


गौठान में आवारा मवेशियां पल रही हैैं। स्व सहायता समूह की महिलाएं रोजगारोन्मुखी कार्य कर आत्म स्वावलंबन की डगर पर चल पड़ी हैं। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे के निर्देश पर आयुक्त प्रकाश सर्वें गौठान को सर्वसुविधायुक्त बनाने लगातार निरीक्षण का मॉनिटरिंग भी करते रहते हैं। समूह की महिलाओं को नवाचार का प्रयोग कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाने साधन भी उपलब्ध कराते आ रहे हैं।

गौठान परिसर में 120 गौ माता सहित बछिया को रखा गया है। समूहों द्वारा पोषित चरवाहा के जरिए इन मवेशियों का बेहतर देखभाल किया जा रहा है। परिसर में ही हरा चारा उपलब्ध कराने नेपियर घास उगाई गई है।

मवेशियों के गोबर को इकट्ठा कर खाद बनाया जा रहा है। वर्मी कंपोस्ट खाद उत्पादन: नई उड़ान क्षेत्र स्तरीय संगठन जोन एक की समूह की महिलाएं गोबर से खाद बनाने में जुटी हुईं हैं। निगम द्वारा बनाई कई टंकियों में गोबर को सड़ाकर रखा जा रहा है। उसके बाद कई प्रक्रियाओं के बाद छानकर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है।

समूह की महिलाएं प्रति माह 10 टन वर्मी कंपोस्ट खाद का निर्माण कर रही हैं। अब तक इनके द्वारा करीबन 150 टन खाद की बिक्री की जा चुकी है। गोबर खरीदी: समूह की महिलाएं प्रतिदिन आसपास के लोगों से 2 रूपए किलों में गोबर की खरीदी जा रही है।

प्रतिदिन गौ पालक स्वयं शहरी गौठान में आकर गोबर बेच रहे हैं। इस बिक्री से उसे अच्छी खासी आय भी हो रही है। केंचुआ पालन: गौठान में केंचुआ पालन को भी महत्व दिया जा रहा है।

यहां प्रतिमाह 70 किग्रा केंचुआ का उत्पादन किया जा रहा है। इसकी डिमांड मछली पालन व स्थानीय लोगों में मिट्टी को उर्वरा शक्ति बनाने के लिए किया जा रहा है।


गोबर कंडा व लकड़ी निर्माण गोबर से कंडा व लकड़ी का निर्माण भी बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। इसका उपयोग निगम क्षेत्र व आसपास के मुक्तिधामों में शवों को दहन करने में किया जा रहा है। इसके निर्माण से महिलाओं को खासा फायदा हो जा रहा है।

अगरबत्ती निर्माण जीवन ज्योति स्व सहायता समूह कोहका की महिलाएं अगरबत्ती निर्माण कर रही हैं। गोबर व काली मिट्टी को छानकर पावडर बनाया जा रहा है। इसके व बंबु स्टीक से अगरबत्ती बनाई जा रही है। प्रतिदिन 5 से 8 किग्रा अगरबत्ती का निर्माण किया जा रहा है। इसकी आपूर्ति आसपास के मंदिरों व स्थानीय लोगों सहित धनोरा दुर्ग में है।

फूलों से साबुन व गुलाल निर्माण परिसर में मां गायत्री स्व सहायता समूह सुपेला की महिलाएं मंदिरों से निकले फूलों से साबुन व हर्बल गुलाल बना रही हैं। फूलों की पंखुडियों को सूखाकर, फूलो से साबुन बनाना भी शुरू किया गया है। होली के दिनों में 100 किलो गुलाल बनाया गया था, जिसकी मांग निगम व स्थानीय लोगों में रही। वही वर्तमान में नगपुरा के एक स्थानीय व्यापारी ने 20 किलो गुलाल आपूर्ति करने आर्डर दिया है। 

मशरूम उत्पादन गौठान परिसर के शेड में आर्या महिला स्व सहायता समूह कोहका इन दिनों मशरूम उत्पादन कर रहा है। ठंडी के दिनों में इसका उत्पादन व मांग ज्यादा रहती है। प्रतिमाह 8 से 9 किलो मशरूम का उत्पादन कर विक्रय किया जा रहा है। इसकी मांग स्थानीय व होटलों में ज्यादा है।

सब्जी उत्पादन परिसर में सब्जी का भी उत्पादन किया जा रहा है। इसका उत्पादन जय अंबे महिला स्व सहायता समूह कोसानगर द्वारा किया जा रहा है। महिलाएं बाड़ी में भाजियों पालक, लाल, चौवलाई, मैथी, धनिया, मूली, खट्टा पालक के अलावा गाठ गोभी, मिर्ची, टमाटर, केला, पपीता, शिमला मिर्ची, कुम्हड़ा, लौकी व गलका का उत्पादन कर अपनी आय को बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

दीया निर्माण अन्नपूर्णा महिला स्वसहायता समूह व शिव शक्ति समूह सुपेला की महिलाओं ने दीवाली के सीजन में दीये निर्माण किए। समूह ने दीवाली में 44 हजार दीये बनाए। इनके हाथों से बनाए दीये दीवाली में लोगों के घरों को रौशन किया। इसकी बिक्री निगम, मॉल व स्टाल लगाकर किया गया। वहीं इसकी मांग भोपाल में भी रही।

मछली पालन अंबर महिला स्वसहायता समूह राधिका नगर गौठान परिसर में बने डबरी में मछली पालन की तैयारी कर रही है। डबरी को अब निगम ने तालाब का रूप दिया है। इस तालाब में तलबिया सहित कई प्रजाति की मछलियां पाली जायेंगी। 

मुर्गी पालन ओम महिला स्व सहायता समूह कोसा नगर की महिलाएं अब यहां बन रहे शेड में मुर्गी पालन करेंगी। समूह अंडे, चूजे व मुर्गे-मुर्गियां बेचकर अपना लाभार्जन बढ़ाएगा। उल्लेखनीय है कि छ.ग. शासन गांव के साथ शहर की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने लगातार कार्ययोजना बना रही है। लोग रोजी-रोजगार के लिए दूसरे शहर की ओर पलायन न करे और उसे अपने ही शहर में रोजगार मिल जाए। इस तरह भूपेश सरकार स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है। समूहों की महिलाओं को उचित स्थान दिलाने व आत्मस्वावलंबी बनाने भिलाई निगम प्रशासन भी इस दिशा में अग्रसर है।