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'क्या अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी दूर कर पाएंगे भूपेश सरकार या यूं ही चलता रहेगा हड़ताल

'क्या अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी दूर कर पाएंगे भूपेश सरकार या यूं ही चलता रहेगा हड़ताल

 के एस ठाकुर 

  राजनांदगांव।  प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ में विगत 3 माह से विभिन्न संवर्ग के अधिकारी कर्मचारियों का हड़ताल का दौर चल रहा है । एक और जहां पटवारी संघ विगत 10 दिनों से अपनी मांगों को लेकर प्रांत व्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है , वही रोजगार सहायक भी  अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं । और अब पंचायती राज में ग्राम विकास के आधार की धुरी  कहे जाने वाले पंचायत के  सचिव जिनकी विभिन्न विभागों के शासकीय योजनाओं को क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है  प्रांत व्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी में है , जिसके प्रथम चरण में उन्होंने जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन कर शासन को  मांगों का ज्ञापन सौंपा है ।

दूसरे चरण में आस पूरे प्रदेश के विकास खंडों में धरना पर बैठे हैं और सरकार का रुख अगर इसी प्रकार नकारात्मक रहा तो कोई संदेह नहीं कि पंचायत सचिव संघ प्रांतीय आवाहन पर  26  दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे ।पटवारी , रोजगार सहायक ,एवं पंचायत सचिव वैसे तो अलग-अलग संवर्ग से  तालुकात जरूर रखते हैं, लेकिन तीनों के आमजन के कार्यों को करने में बड़ी जिम्मेदारी होती है।  ऐसे में यह तीनों संघ अगर  हड़ताल पर रहते हैं  तो कोई संदेह नहीं कि आमजन को काफी अड़चनों का परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वैसे भी इस वर्ष धान खरीदी को लेकर किसानों के कृषि क्षेत्र के रकबे  को कम करनेको लेकर   सभी किसान को शिकायत है एवं किसान  पूर्व कि वर्षों की तुलना में धान कम बेच  पा रहे हैं किसानों की नाराजगी को देखते हुए शासन ने निराकरण हेतु शासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं किंतु निराकरण करने वाले विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे  तो शासन के आदेश का परिपालन कैसे होगा। वही ग्रामीणों को रोजगार  उपलब्ध कराने में में मनरेगा का बहुत बड़ा योगदान होता है मनरेगा के कार्यों को संपादित करने वाले रोजगार सहायक हड़ताल पर हैं तो ग्रामीणों को रोजगार कैसे मिलेगा ।

पंचायत के द्वारा विभिन्न योजना के माध्यम से आमजन तथा जरूरतमंद को लाभ मिलता है ।पंचायत सचिव के हड़ताल पर रहने से  आमजन ग्रामीण तथा जरूरतमंद इन योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे ।इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शासन प्रशासन की अनेक योजनाओं का लाभ आमजन तथा ग्रामीण को मिलता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है ।

शासकीय अधिकारी कर्मचारी शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय की भूमिका निभाते हैं और यदि वे ही असंतुष्ट रहे  नाराज रहे तो योजनाओं का समुचित  क्रियान्वयन होने में संदेह बना रहता है ऐसी स्थिति में अब यह देखना है कि क्या सरकार अपने प्रदेश के अधिकारी कर्मचारियों को तोहफा देकर उन को खुश करना चाहेगी या फिर सरकार के रवैया को लेकर अधिकारी कर्मचारीयो की हड़ताल का दौर यू ही  जारी रहेगा  सरकार के प्रति अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी है की विगत वर्ष उन्होंने अपनी समस्या और मांगों को लेकर जब प्रदेश के  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष अपनी बातें रखी थी तो प्रदेश के मुखिया ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वर्ष 2019 किसानों का है और वर्ष 2020 कर्मचारियों के रहेगा  किंतु अब तक की स्थिति से परलक्षित होता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री  द्वारा प्रदेश के कर्मचारियों को दिया गया आश्वासन एक वादा बनकर रह गया है।