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एक वर्ष से अधिक समय बीतने के पश्चात भी राजकीय पक्षी के मौत के बारे में चुप्पी साधे बैठी है वन विभाग - अरुण पाण्डेय

एक वर्ष से अधिक समय बीतने के पश्चात भी राजकीय पक्षी के मौत के बारे में चुप्पी साधे बैठी है वन विभाग - अरुण पाण्डेय

जगदलपुर, 22 दिसंबर। छत्तीसगढ़ राज्य के राजपत्र में 8 अप्रैल 2002 के घोषणा अनुसार राजकीय पक्षी के रूप में दर्ज़ा प्राप्त पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण के लिये कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान - जगदलपुर में लाखों रूपये खर्च कर प्रजनन केंद्र बनाया गया है। 

जिसका उदघाटन तात्कालीन पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुभाऊ राम कश्यप के द्वारा दिनांक 26 जनवरी 2005 में किया गया था। लेकिन इन 14 (चौदह) वर्षों में न तो इनकी वंश वृद्धि हुई, और न ही कोई विशेष रख- रखाव में अंतर नजर आया है।

अब राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की संख्या भी यहां घट गई है, शिवसेना के जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् ने बताया कि पिछले राज्योत्सव के पहले ही एक मैना की मौत हो गई है। जिसे दबाने के लिए पूरा वन अमला लगा हुआ है।


शिवसेना के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् ने आरोप लगाते कहा हैकि एक तरफ राज्य सरकार राज्योत्सव मना रही थी, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी मैना की मौत की ख़बर को दबाने की भर्शक कोशिश भी किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि पहाड़ी मैना को मरे 1 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और इन एक वर्ष में वन विभाग ने राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की मौत की ख़बर को दबाने की पूरी कोशिश की हैं। वहीं मृत पहाड़ी मैना की सढ़ी-गली शव अरुण पाण्डेय् और सहयोगियों को नबम्बर माह 2019 में ही जगदलपुर के वन विद्यालय में पाया गया था, जिसकी जानकारी वन विभाग को दी गई थी।

उन्होंने बताया कि जिस जगह का चयन पहाड़ी मैना के प्रजनन के लिए किया गया है, उसके नजदीक ही रेलमार्ग गुजरती है। आने वाले कुछ दिनों में वन विद्यालय का कुछ हिस्सा भी रेलवे लाइन में चले जाने की ख़बर है। जानकार बताते हैं कि पहाड़ी मैना एक बेहद संवेदनशील पक्षी हैं और प्रदूषण इनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। राष्ट्रीय पक्षी पहाड़ी मैना को लेकर स्थानीय वन विभाग शुरू से ही कोताही बरतते रहा  है, इसमें वन विभाग की लापरवाही साफ़ प्रदर्शित हो रही है। पहाड़ी मैना का प्रजनन का विषय भी चिन्ता जनक है।

जब इस विषय पर उन्होंने संबंधित अधिकारी से जानकारी लेने फ़ोन किया गया तब उन्होंने ना ही फ़ोन उठाना ज़रूरी समझा और ना ही मिलना ही। दरअसल इस पूरे मामले को वन विभाग अब तक मीडिया से छिपाने का प्रयास कर रही है, जिसे शिवसेना ने उज़ागर कर दिया है।

सवाल उठना लाज़मी हैकि जब छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मैना की प्रजनन व सुरक्षा पर लाखों रूपये खर्च करने के बाद भी वन विभाग उनके संवर्धन व प्रजनन में नाकाम रहा है, तो अबतक ख़र्च हुए करोड़ों रोये कहां गये ??

शिवसेना के जिलाध्यक्ष ने राजकीय पक्षी के मौत के विषय में सरकार व प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच दल घटित करने व दोषियों को कड़ी सजा देने की अपील की है।