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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-साइबर अपराधियों की गिरफ्त से कोई सुरक्षित नहीं

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से-साइबर अपराधियों की गिरफ्त से कोई सुरक्षित नहीं


देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ट्विटर अकाउंट यदि हैकर्स के कब्जे में जा सकता है तो फिर बाकी लोगों का सोशल मीडिया अकाउंट तो भगवान भरोसे है। दरअसल, हमारे देश में जब से ऑनलाईन कारोबार, रोजमर्रा का व्यवहार और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का विस्तार हुआ है तभी से हमारे यहां साईबर क्राईम में तेजी से वृद्घि हुई है। जिन लोगों को यह लगता है कि इंटरनेट प्लेटफार्म परउपलब्ध उनकी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक अकाउंट डिटेल और उनकी निजता सुरक्षित है, वे जान लें कि यहां चीजें तभी तक सुरक्षित है जब तक कि किसी हैकर्स, फ्रॅाड करने वाले की नजर उस पर नहीं गई है।

पहले यह माना जाता था कि चोरी चकारी का काम गरीब गुरवे, कम पढ़े-लिखे लोग करते हैं किंतु इंटरनेट आने ये यह बात साफ हो गई है कि चोरी चकारी हेराफेरी में पढ़े-लिखे तकनीक के जानकार तबके का भी बढ़ा हाथ है। हमारे देश में बढ़ते साइबर क्राईम, बैंकिंग फ्रॉड का जिक्र होता है तो सबसे पहले झारखंड के जामताड़ा का नाम आता है। जामताड़ा को लेकर एक पूरी वेबसीरिज बन गई है। अब जगह-जगह जामताड़ा बनते जा रहे हैं। किसी को लूटने, छलने के लिए अब उसके पास जाने की जरुरत नहीं है। यह काम अब दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर किया जा सकता है।

भले ही आप पुराना भजन सामने सुनते बैठे हों।
कोई छलिया सामने नहीं आयेगा।
जरा सामने तो आओ छलिये,
छुप छुप छलने में क्या राज है,
यूं छुप न सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज है,
जरा सामने तो आओ छलिये।।

11 दिसंबर और 12 दिसंबर की दरम्यानी रात को हैकर्स ने कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकाउंट को अपने कब्जे में ले लिया। उस अवधि के दौरान क्रिप्टोक्यूरेंसी को बढ़ावा देने वाला एक ट्वीट साझा किया गया था। पीएम अकाउंट खाते से एक यूआरएल के साथ एक ट्वीट साझा किया गया था जिसमें लिखा था, भारत ने आधिकारिक तौर पर बिटकॉइन को कानूनी निविदा के रूप में अपनाया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर 500 बीटीसी खरीद ली है और उन्हें देश के सभी निवासियों को वितरित कर रही है।  इसके पहले भी सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री मोदी का ट्विटर अकाउंट जो उनकी निजी वेबसाइट से जुड़ा था, हैक कर लिया गया था। हैकर ने जनता से कोविड-19 के लिए पीएम राष्ट्रीय राहत कोष में उदारता से दान करने की अपील की थी और दावा किया था कि भारत सरकार ईटीएच के माध्यम से दान स्वीकार कर रही है।
ऐसा नहीं है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री का ही ट्विटर अकाउंट हैक किया गया है। इसके पहले एलोन मस्क, बिल गेट्स, बराक ओबामा, जेफ बेजोस जैसे नामचीन लोगों के अकाउंट भी हैक हो चुके हैं।  आये दिन जामताड़ा में

देश के किसी न किसी कोने की पुलिस बैंक फ्रॉड को लेकर यहां की खाक छानती नजर आती है। जामताड़ा जिले अकेले में करीब सौ गांवों में अदृश्य लूट का धंधा चल रहा है।

झारखंड की राजधानी रांची से 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जामताड़ा।   2004-05 में जैसे ही स्मार्ट फोन आया, पूरा इलाका साइबर क्राइम का गढ़ बन गया।  पहली बार 2013 में करमाटांड़ थाने में साइबर क्राइम का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कार्रवाई की और कुछ अपराधी पकड़े भी गए लेकिन पुलिस आज तक इन शातिरों पर नकेल नहीं कस सकी है। समय के साथ बदलती तकनीक और आनलाईन लेनदेन की प्रक्रिया के साथ ही साइबर क्राइम के तौर तरीके भी बदले। अब लोग बैंक अधिकारी बनकर ये लोगों को फोन करने लगे और उनको झांसे में लेकर उनकी गोपनीय सूचनाएं इकठ्ठा कर सीधे बैंक खाते में सेंध लगाने लगे। ये हाईटेक अपराधी फर्जी फेसबुक आईडी, फर्जी सिम, फर्जी वेबसाइट लिंक की आड़ में अपराध को अंजाम देते हैं।  बैंक अधिकारी बनकर ये शातिराना अंदाज में लोगों को उनके डेबिट-क्रेडिट कार्ड या अकाउंट ब्लॉक होने की सूचना देते हैं और उनकी सहायता के नाम पर उनके हमदर्द बनने का नाटक कर बातों-बातों में जन्मतिथि, पैन नंबर, पिन नंबर या पासवर्ड जान लेते हैं। लोग उन्हें सही व्यक्ति समझकर सब कुछ बताते जाते हैं और जब तक उन्हें असलियत का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, उनके खाते से पैसे गायब हो चुके होते हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी में ही बीते दो महीने में साइबर क्राइम के 100 से अधिक मामले सामने आए हैं।  इसी तरह एक अन्य मामले में कलेक्टर तारनप्रकाश सिन्हा के नाम से फेसबुक पर किसी ने फेक आईडी बना ली है। कलेक्टर सिन्हा ने स्वयं इस बात की जानकारी देते हुए इस संबंध में जरूरी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। अशिक्षित लोगों के साथ-साथ अब सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोग साइबर क्राइम के झांसे में आ रहे हैं।

एक पुरानी कहावत है-तू डार-डार, मैं पात-पात ये कहावत साइबर अपराधियों और साइबर स्पेस की सुरक्षा में लगी एजेंसियों, सुरक्षा उपायों पर पूरी तरह खरी उतर रही है। हाल ही में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का अकाउंट साइबर अपराधियों ने हैक कर लिया जो वाकई एक चिंताजनक खबर है। देश के मुखिया के अकाउंट का ये हाल है तो देश के बाकी लोगों का अकाउंट तो कभी भी हैक किया जा सकता है। किसी अंजान देश की अंजान जगह के किसी कमरे में बैठकर कोई कब आपके बैंक अकाउंट, आपके डिजिटल अकाउंट्स में सेंध लगा दे कह नहीं सकते। कब कौन आपकी निजता भंग कर आपकी निजी और संवेदनशील जानकारियों से खिलवाड़ करने लग जाये कहा नहीं जा सकता।

दुनिया भर की कई कंपनियां आपके कम्प्यूटर, मोबाईल की सुरक्षा के लिए अभेद्य सुरक्षाकवच बनाने का दावा करती है मगर अंतर्राष्ट्रीय साइबर ठग सुरक्षा के तमाम अवरोध भेद डालते हैं। ये सुरक्षा भी कैसी, बस ताले के नाम पर कुछ कूट अक्षरों अंकों या चिन्हों का एक समूह ही तो है जिसे साइबर ठग डिकोड कर लेते हैं और फिर आपके बैंक अकाउंट तक पहुंच जाते हैं यही नहीं उस जानकारी तक जो बेहद उच्च स्तर की क्लासीफाइड जानकारी होती है। जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है। यहीं नहीं साइबर ठग राष्ट्रीय महत्व की अतिमहत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारी के ब्लूप्रिंट, महत्वपूर्ण खोज या फॉर्मूले की जानकारी हथिया सकते हैं।

साइबर ठगों के अलावा डिजिटल प्लेटफार्म से जुड़े बड़े नाम जैसे ट्विटर, फेसबुक, वाट्सअप आरोप लगते रहे हैं कि वो अपने उपभोक्ताओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां बेचते हैं। गूगल अपने आप में साइबर दुनिया का माफिया किंग ही तो है। आप आज जो कुछ भी करते हैं उसकी पल-पल की खबर रखता है गूगल। आप किस तरह की चैट करते हैं, नेट पर क्या देखते हैं, अपने बंद कमरे में कम्प्यूटर कैम के आगे क्या करते हैं सब कुछ दर्ज हो रहा है, संग्रहित हो रहा है। प्रधानमंत्री के अकाउंट हैक होने का मतलब है देश की सर्वोच्च सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना उसका मजाक उड़ाना ही देख लो हम तुम्हारी सुरक्षा व्यवस्था को कैसे भेदते हैं।

दरअसल, हम आज सुरक्षित होने के जितने ज्यादा साधन अपना रहे हैं, निजता के मामले में उतने ही असुरक्षित हो रहे हैं। आसमान से किसी उपग्रह की आंख हमें देख रही है, सड़क पर कोई कैमरा देख रहा है, कहीं कोई चुपके से मोबाईल पर आपका वीडियो बना रहा है। हम कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हमारी आपकी या हमारे किसी अपने की तस्वीर से फोटोशाप पर जाकर कौन कब अपनी किसी विकृति को अभिव्यक्त कर जाये कह नहीं सकते। भविष्य की तकनीकें आपके मस्तिष्क में सेंध लगाकर आपके विचारों को जान लेंगी। आपने अपने दिमाग से जिस जानकारी को छिपा रखा होगा, जो भाव बेहद गोपनीय होगा उसे भी पढ़ लिया जाएगा। टेक्नालॉजी मदद के साथ सार्वजनिक रुप से किसी को निर्वस्त्र करने के काम आ रहा है।