केंसर पिड़ित नर्स ने अंतिम सांस तक ‘‘कोरोना‘‘ महामारी से किया संघर्ष, मुख्यमंत्री ने संवेदना व्यक्त की,परिजनों को मिले मुआवजा -संघ

केंसर पिड़ित नर्स ने अंतिम सांस तक ‘‘कोरोना‘‘ महामारी से किया संघर्ष,  मुख्यमंत्री ने संवेदना व्यक्त की,परिजनों को मिले मुआवजा -संघ


  (मरणोपरांत स्वास्थ विभाग की मदर टेरेसा की उपाधि देने की मांग-झां)

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में मानव सेवा में तल्लीन ए.एन.एम. श्रद्वेय पुष्पा तिग्गा   जिसे छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री  भूपेश बधेल ने उनके कर्तव्यपरायणता के लिए फ्लोरेंस नाइटेंगल आफ छत्तीसगढ़ की उपाधि दी थीं वह स्वयं केंसर से पिड़ित रहते हुए सुकमा जिले के कुन्ना क्षेत्र में कोरोना वायरस के महामारी से संधर्ष करते हुए केंसर से जंग हार गई। उनके निधन पर मुख्यमंत्री  भूपेश बधेल सहित प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध, स्वास्थ संयोजक कर्मचारी संघ  ने अश्रुपूरित श्रद्वांजलि अर्पित की है। संध ने मुख्यमंत्री से पुष्पा बहन को मरणोपरांत  स्वास्थ विभाग के ‘‘मदर टेरेसा‘‘ की उपाधि से सम्मानित करते हुए उनके परिजनों को कोरोना महामारी से दिवंगत् होने पर देय मुआवजा राशि दिए जाने की मांग की है।   

        छत्तीसगढ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध के प्रवक्ता व स्वास्थ संयोजक सध के संरक्षक विजय कुमार झा स्वास्थ संयोजक कर्मचारी संध के प्रांताध्यक्ष टार्जन गुप्ता, प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय तिवारी  ने बताया है कि सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उत्कृष्ठ सेवा करने के लिए कुन्ना ईलाके के स्वास्थ संयोजिका ए.एन.एम. को जो स्वयं केंसर से पिडित्त थी प्रदेश के मुख्यमंत्री  भूपेश बधेल ने उनके बेहतर कार्य, समर्पण व ‘‘पर हित सरिस धरम नहीं भाई‘‘ के विचार को अपने जीवन में आत्मसात् करने वाली महान महिला को फ्लोरेंस नाइटेंगल आफ छत्तीसगढ़ से सम्मानित किया था। विगत् 12 वर्षो से 12 वर्षो से नक्सल प्रभावित क्षेत्र कुन्ना उप स्वास्थ केन्द्र में कार्यरत् थीं। वे स्वयं विगत् 2 वर्षो से स्तन केंसर से पिड़ित थीं। बस्तर के सुकमा जिले का कुन्ना क्षेत्र ऐसा है जहां प्रतिवर्ष कोई न कोई बीमारी एपिडेमिक का रूप लेती है। पुष्पा तिग्गा अपने कर्तव्य के प्रति इतनी समर्पित थीं कि उनके स्वास्थगत् व समुचित इलाज की दृष्टि से स्वास्थ विभाग उनका स्थानांतरण भी उनके इच्छित स्थान पर करने सहमत थीं किंतु उन्होने अपने बीमारी, तकलीफ की चिंता किए बिना कुन्ना क्षेत्र में लंबे समय तक जन सेवा करने के बाद जीवन के अंतिम पड़ाव में संधर्ष से पीछे न हटने व उसी स्थान पर सेवा करने का संकल्प ले लिया था। इस महिला स्वास्थ संयोजक को ग्रामीण जन ईश्वर अल्लाह ईशुमसीह की भाॅति सम्मान की नजर से स्नेह करते थे। उन्होने अपनी अस्वस्थता के बाद भी गतवर्ष 50 प्रसव प्रकरण निपटाए थे। इसी कारण छत्तीसगढ के साथ-साथ देश व विश्व में उनका नाम ‘‘छत्तीसगढ़ की फ्लोरेंस आफ नाइटेंगल के नाम से जाना गया। ऐसी महान विभूति के महाप्रयाण से स्वास्थ विभाग ने अपना एक अच्छा कार्यकर्ता खो दिया है। उनके निधन पर उनके निधन कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन संयोजक कमल वर्मा, प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध प्रांताध्यक्ष पी.आर.यादव, महामंत्री विजय कुमार झा, जिला अध्यक्ष इदरीश खाॅन, बस्तर अध्यक्ष अतुल श्रीवास्तव, स्वास्थ संयोजक प्रांताध्यक्ष टार्जन गुप्ता, प्रदेश महासचिव प्रवीण ढीडवंशी, प्रांतीय उपाध्यक्ष अजय तिवारी, स्वास्थ विभागीय संयोजक संजय शर्मा, स्वास्थ संयोजक संध के मिडिया प्रभारी हरीश सन्नाट, महामंत्री आर.के.अवस्थी, उपप्रातांध्यक्ष मिर्जा कासिम बेग, हरिश जायसवाल, रेजीना तिर्की,  प्रांतीय सहसचिव मो.जहांगीर, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष सरोज  बाधमार, सेवती साहू, रमशीला साहू, के. रिजवी, प्रचार प्रसार मंत्री प्रकाश सिन्हा, प्रवक्ता देवराज विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष आर.के.शर्मा,108 संजीवनी, 102 महतारी एक्प्रेस प्रांताध्यक्ष राठौर आदि ने अश्रुपूरित नम आंखों से श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से मांग की है कि उन्हें कोरोना वायरस महामारी बचाव अभियान के तहत उनके परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करते हुए, परिवार को विशेष अनुकंपा नियुक्ति दिया जाकर, उन्हें मरणोपरांत स्वास्थ विभाग का मदर टेरेसा की उपाधि दिया जावे।

chandra shekhar