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बंद होने जा रही खदान में किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए संसदीय सचिव का धरना प्रदर्शन

बंद होने जा रही खदान में किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए संसदीय सचिव का धरना प्रदर्शन

 अपनी ही सरकार में धरने पर उठे सवाल, शिक्षामंत्री के क्षेत्र में...!!!


 सूरजपुर ! एसईसीएल की बलरामपुर अंतर्गत पुरानी व बंद होने जा रही खदान महान-2 में अधिग्रहित भूमि का किसानों को मुआवजा नहीं देने की बात को लेकर आज छत्तीसगढ़ शासन में संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज स्वयं खदान के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान करीब 3 घंटे तक कोल परिवहन पूरी तरह से बंद रहा। धरने के दौरान इस बात पर भी सवाल उठते रहे कि खुद सत्ता पर काबिज होने के बाद भी आखिर किस कारण से संसदीय सचिव को धरने पर बैठना पड़ा, जिसकी जानकारी क्षेत्र के विधायक व प्रदेश के स्कूल शिक्षामंत्री के प्रतिनिधियों को भी नहीं दी गई। समाचार लिखे जाने तक यह भी जानकारी सामने आ रही है कि इस बीच भटगांव महाप्रबंधक के साथ उनकी बैठक चल रही है, जिसमें खदान से जुड़े कई मामलों पर भी चर्चा जारी है। 

एसईसीएल भटगांव के अंतर्गत महान-2 खदान में अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर आज प्रदेश सरकार में संसदीय सचिव व सामरी विधायक चिंतामणि महाराज महान-3 के गेट पर धरने पर बैठे। मिली जानकारी के अनुसार संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज आज सुबह 10 बजे ग्राम पम्पापुर पहुंच गए थे और वहीं से वे ग्रामीणों के संग पैदल महान-3 खदान के गेट तक पहुंचे। इसके बाद उनके समर्थकों ने उस दौरान हो रहे कोल परिवहन को पूरी तरह से बन्द करा दिया। मामले की जानकारी होने पर इस दौरान महान-3 खदान प्रबंधक सहित भटगांव महाप्रबंधक एसएन झा भी मौके पर पहुंच गए। ससंदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने ग्राम चौरा के कुछ किसानों की जमीन अधिग्रहण की मांग के साथ सीएसआर मद को विकास कार्य में लगाने की बात को भी रखा। इस दौरान मौजूद एसईसीएल के अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे जल्द ही मामले का निराकरण कर लेंगे। इधर करीब 3 घंटे के धरना प्रदर्शन के बाद अंततः प्रबंधन ने उन्हें महान-2 खदान के कार्यालय में बैठ कर चर्चा करने का निवेदन किया। मिली जानकारी के अनुसार समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी थी, लेकिन इसमें क्या निर्णय हुए ? यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। 

आखिर अपनी ही सरकार में धरना प्रदर्शन क्यों ?

आज संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज के यूं अचानक खदान पहुंचकर गेट पर धरना प्रदर्शन करने को लेकर कई तरह की चर्चा व्याप्त थी। इसको लेकर खुद एसईसीएल प्रबंधन पेशोपेश में था कि अगर अधिग्रहण का कोई मामला विचाराधीन है तो सीधे प्रबंधन से भी बात की जा सकती थी, जिसका निराकरण तत्काल किये जाने का प्रयास किया जाता, साथ ही इसबात पर भी सवाल खड़े हो रहे थे कि खुद सत्ता में रहने के साथ यदि बलरामपुर कलेक्टर को भी निर्देश दे दिया जाता तो शायद मामले पर कार्रवाई शुरू हो सकती थी। फिलहाल इस धरना प्रदर्शन से क्या समाधान सामने निकल आया है यह स्पष्ट नहीं है।

आखिर क्यूं उठ रहा है बंद होने जा रही खदान का मामला ?

दरअसल यह पूरा मामला महान-2 खदान से संबंधित मुआवजे का है। जिसमें कुछ ग्रामीणों की अधिग्रहित भूमि का मुआवजा आज लंबित है, लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आज बलरामपुर जिला के अंतर्गत आने वाली यह महान-2 खदान अब पूरी तरह से बंद होने के कगार पर है तो फिर अचानक बंद होने के दौरान इससे जुड़े मामले क्यों सामने आ रहे है ? आखिर इससे पहले इसके लिए प्रयास क्यों नहीं किया गया। इस धरने को लेकर यह भी चर्चा व्याप्त है कि बलरामपुर अंतर्गत आने वाली खदान के लिए सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाली खदान महान-3 में धरना प्रदर्शन किया गया तो फिर इस क्षेत्र के विधायक व प्रदेश के शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय के प्रतिनिधि अथवा अन्य किसी व्यक्ति को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई ?

हमलोगों को कोई जानकारी नहीं- कुमार सिंहदेव

स्कूल शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह के जिला प्रतिनीधि कुमार सिंहदेव से जब इस धरना प्रदर्शन के संबंध में जानकारी को लेकर चर्चा की गई तो उन्होनें स्वयं आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें खुद भी इसकी जानकारी नहीं थी, उन्होनें कहा कि खदान इस क्षेत्र के विधायक व प्रदेश के शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आती है, ऐसे में अगर इसकी जानकारी उन्हें या उनके प्रतिनिधि तक दी गई होती तो वे स्वयं भटगांव महाप्रबंधक से चर्चा करते और मामले का समाधान करने का प्रयास भी करते।

इधर समाचार लिखे जाने तक महान-2 खदान में एसईसीएल प्रबंधन से चर्चा के दौरान क्या निराकरण हुआ है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है