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‘प्रियोन होल्डिंग्स में कैटरमैन की हिस्सेदारी हासिल करने की अमेज़न की योजना एफडीआई नीति का सीधा एवं घोर उल्लंघन है- कैट’‘

‘प्रियोन होल्डिंग्स में कैटरमैन की हिस्सेदारी हासिल करने की अमेज़न की योजना एफडीआई नीति का सीधा एवं घोर उल्लंघन है- कैट’‘


जनधारा समाचार |

रायपुर | कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानीचेयरमेन मगेलाल मालू,  अमर गिदवानी,  प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशीकार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेवपरमानन्द जैनवाशु माखीजामहामंत्री सुरिन्द्रर सिंहकार्यकारी महामंत्री भरत जैन,  कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं मीड़िया प्रभारी संजय चौंबे ने बताया कि हाल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये सामने आया है कि अमेज़ॅन सेलर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (अमेज़ॅन“) ने प्रिओन बिजनेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (प्रियोन“) में कैटामारन वेंचर्स की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में आवेदन किया है। इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज कहा कि अगर अमेज़न को सीसीआई से मंजूरी मिल जाती हैतो यह एफडीआई नीति का घोर उल्लंघन होगा क्योंकि ऐसा होने से अमेज़न का अपने मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर विक्रेता पर पूरा नियंत्रण होगा। यह अमेज़ॅन को मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म से इन्वेंट्री आधारित प्लेटफॉर्म में बदल देगाजो कि एफडीआई नीति के तहत सख्त वर्जित है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी एवं प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र दोशी ने विस्तार से बताते हुए कहा कि - प्रियोन अमेज़ॅन एशिया पैसिफिक होल्डिंग्स (अमेजन एशिया“), सिंगापुर (24 प्रतिशत) और कैटामारन वेंचर्स (76 प्रतिशत) की सहायक कंपनी है और ये पूरी तरह से  क्लाउडटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड(क्लाउडटेल“) के मालिक हैजो अमेज़न इंडिया मार्केटप्लेस पर दो सबसे बड़े विक्रेताओं में से एक है। अमेज़न एशियाअमेज़ॅन की एक सहयोगी कंपनी है जिसकी मूल कम्पनी अमेज़ॅन इंक  है जिसका संचनाल यूएसए से हो रहा  है। 2019 से पहलेअमेज़न एशिया  की प्रियोन में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी थीलेकिन संशोधित एफडीआई नीति का पालन करने के लिएप्रियोन में अमेज़न एशिया  की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से घटाकर 24 प्रतिशत कर दी गई। वर्ष 2020 की एफडीआई नीति ने ग्रुप कंपनी“ की परिभाषा को संशोधित कियाजिसका अर्थ है कि कोई भी कंपनी जिसके पास 26 प्रतिशत से अधिक वोटिंग अधिकार हैं वह 50 प्रतिशत से अधिक निदेशक मंडल की नियुक्ति कर सकती है। इस नीतिगत हस्तक्षेप को रोकने के लिएअमेज़न एशिया ने अपनी हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से घटाकर 24 प्रतिशत कर दी। इसके अतिरिक्तएफडीआई नीति बहु ब्रांड खुदरा व्यापार (एमबीआरटी“) में एफडीआई को 51 प्रतिशत तक सीमित करती है और केवल एकल ब्रांड खुदरा व्यापार (एसबीआरटी) और थोक व्यापार में इसकी अनुमति देती है। ई-कॉमर्स में एफडीआई की अनुमति ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस संस्थाओं (100 प्रतिशत ) के लिए हैजबकि यह इन्वेंट्री ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है। इसलिए मूल रूप से अगर अमेज़ॅन प्रियोन में कैटरमैन की हिस्सेदारी खरीदता हैतो इसका मतलब यह होगा कि अमेज़न क्लाउडटेल को नियंत्रित करेगा जो इसके बाज़ार में सबसे बड़ा विक्रेता हैजो कि हर प्रकार से एफडीआई नीति का सीधा स्पष्ट उल्लंघन है।

पारवानी और दोशी ने कहा कि अमेजन का दुस्साहस बेहद आश्चर्यजनक है। प्रवर्तन निदेशालय और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग जैसी विभिन्न भारतीय एजेंसियों द्वारा कई जांचों का सामना करने के बावजूदअमेज़न भारतीय अधिकारियों की नाक के नीचे भारत के संप्रभु कानूनों को दरकिनार करने के  लगातार विभिन्न तरीके अपना रहा है। उन्होंने आगे कहा कि अमेज़ॅन ने अब खुद को भारत से बड़ा मानना शुरू कर दिया है क्योंकि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय को भी चुनौती दी है और मुकदमा दायर किया है।

दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि कैट इस मामले में सीसीआई को जल्द ही पत्र लिख कर ये सुनिश्चित करे कि  अमेज़न भारत के ई-कॉमर्स बाजार को बर्बाद करने और नियंत्रित करने के अपने भयावह मंसूबो में सफल न हो। इससे भारत का विशाल खुदरा बाजार  नष्ट हो जायेगा। कैट जल्द ही वाणिज्य और वित्त मंत्रालय को लिख कर इस मामले में संज्ञान लेने को कहा है।