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15 नहीं, 5 दिन पर सिमटा खाता-बही का बाजार, परिवहन चार्ज बढ़ने से आई 25 प्रतिशत की तेजी

 15 नहीं, 5 दिन पर सिमटा खाता-बही का बाजार, परिवहन चार्ज बढ़ने से आई  25  प्रतिशत की तेजी


राजकुमार मल

भाटापारा- 15 नहीं, अब खाता- बही का बाजार मात्र 5  दिन का रह गया है। इस बरस  स्थितियां और भी ज्यादा नाजुक होती दिखाई दे रही है क्योंकि परिवहन शुल्क में लगने वाली रकम, इस बाजार में भी 25 फ़ीसदी की तेजी का संदेश लेकर आ पहुंची है।इसलिए होलसेल और रिटेल काउंटरों ने सीमित मात्रा में ही खरीदी की हुई है।

कोरोना। लॉकडाउन के लंबे दिन। डेढ़ वर्ष बाद रियायतों के दौर के बीच खुली स्टेशनरी दुकानें अब राहत की सांस ले रहीं हैं। स्कूलों के  फिर से संचालन ने, अटकी सांस लौटाई है, तो  दीप पर्व पर पूजा- पाठ के लिए खाता-बही की बेहतर खरीदी की उम्मीद में है यह बाजार।  फिर भी पूरी तरह आश्वस्त  नहीं है, क्योंकि परिवहन व्यय में इजाफा ने खाता-बही की कीमत बढ़ाने के लिए विवश कर दिया है।


रुझान पर तेजी का ब्रेक

कंप्यूटर के दौर में खाता-बही को लेकर नई पीढ़ी जैसा उत्साह दिखा रही है, उसे देख कर यह बाजार खुश है। यह बदलाव, आने वाले अच्छे दिन की उम्मीद बंधा रहा है। हालांकि कीमत में 25 फ़ीसदी की तेजी, खरीदी पर ब्रेक लगा रही है, फिर भी मांग और अच्छी खरीदी की संभावना है।

पहली खरीदी शांत

दीपावली पर खाता-बही के साथ लक्ष्मी-गणेश का पाना अनिवार्य माना जाता है ।पहली खरीदी इससे ही की जाती है। राहत ही कही जा सकती है कि पूजा में रखा जाने वाला लक्ष्मी-गणेश का पाना 2 से 5 रुपए में खरीदा जा सकेगा। इसकी कीमत स्थिर है और बीते बरस के ही दाम में मिल रहे हैं।

15 नहीं, 5 दिन



कंप्यूटर के पहले तक खाता-बही का बाजार पूरे एक पखवाड़े तक गुलजार रहता था । 90 के दशक में इस क्षेत्र में कंप्यूटर के प्रवेश से बदलाव की हवा पहुंची और यह हवा तेज होते- होते 10 दिन, अपने साथ आगे ले गई। अब यह मात्र 5 दिन का कारोबार रह गया है । नई पीढ़ी के रुझान को देखते हुए उम्मीद बंधती दिखाई देती है कि अब कारोबार के दिन और कम नहीं होंगे |

परिवहन शुल्क में बढ़ोतरी की वजह से खाता-बही की कीमत में 20 से 25 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है। नई पीढ़ी के रुझान को देखते हुए उम्मीद है कि कारोबार के दिन अब और कम नहीं होंगे।