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बिहार : पहले चरण की चुनाव में 8 मंत्रियों की साख दांव पर

बिहार : पहले चरण की चुनाव में  8 मंत्रियों की साख दांव पर

पटना।  बिहार  में  पहले चरण की 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को मतदान होंगे।  शाम पांच बजे से चुनाव प्रचार थम गया है. पहले चरण में  नीतीश सरकार के 8 मंत्रियों की साख भी दांव पर लगी है. इनमें चार बीजेपी और चार जेडीयू कोटे के मंत्री है, जिनके विपक्ष विपक्ष ने जबरदस्त घेराबंदी की है तो कई सीटों पर बागी चुनौती बने हुए हैं. 

बिहार के नीतीश सरकार के जिन आठ मंत्रियों की साख दांव पर है, उनमें गया से कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार, जहानाबाद से शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा, जमालपुर से ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, दिनारा से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, राजापुर से परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला, बांका से राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, लखीसराय से श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा और चैनपुर से अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री बृजकिशोर बिंद हैं. 

बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और संघ प्रचारक रहे राजेंद्र सिंह ने एलजेपी से टिकट लेकर यहां के चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. 2015 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू-आरजेडी साथ थे, लेकिन जय सिंह को यहां से जीतने में पसीने छूट गए थे. जेडीयू के जय कुमार सिंह महज 2691 मतों से जीते थे. अब राजेंद्र सिंह एलजेपी से मैदान में हैं, जिसके चलते जेडीयू का राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाता दिख रहा और मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. ऐसे में इस सीट पर अगर बीजेपी के कैडर वोट को थोड़ा बहुत भी साधने में कामयाब रहे तो जेडीयू के लिए हैट्रिक लगाना आसान नहीं होगा. 

गया टाउन विधानसभा सीट पर काफी रोचक मुकाबला होता नजर आ रहा है. बीजेपी के कद्दावर नेता और बिहार सरकार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार मैदान में हैं, जिनके खिलाफ कांग्रेस के अखौरी ओंकार नाथ मैदान में है. इसके अलावा आरएलएसपी से रणधीर कुमार और पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी से निखिल कुमार हैं. सात बार के विधायक प्रेम कुमार का गया टाउन मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार उनके सामने महागठबंधन के अखौरी ओंकार नाथ एक बड़ी चुनौती बन गए. हालांकि, 2015 के चुनाव में प्रेम सिंह ने कांग्रेस-आरजेडी-जेडीयू के साथ होने बावजूद करीब 22 हजार मतों से जीत दर्ज की थी. 

बांका विधानसभा सीट पर नीतीश सरकार में भूमि सुधार राजस्व मंत्री और बीजेपी नेता रामनारायण मंडल मैदान में हैं. वहीं, आरजेडी से पूर्व विधायक जावेद इकबाल अंसारी और आरएलएसपी के कौशल सिंह उतरने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. हालांकि, बांका सीट की सियासी जंग पिछले तीन दशक से जावेद अंसारी और रामनायरण मंडल के बीच होती आ रही है और एक बार फिर दोनों आमने-सामने हैं. जावेद अंसारी यादव और मुस्लिम समीकरण के जरिए बीजेपी से छीनना चाहते हैं तो रामनारायण मोदी और नीतीश के सहारे एक बार फिर जीत दर्ज करने में जुटे हैं. 

बिहार के पहले चरण की लखीसराय सीट पर बीजेपी विधायक और नीतीश सरकार के श्रम संसाधन मंत्री विजय कुमार सिन्हा एक बार फिर मैदान में है, जिनके खिलाफ महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के अमरीश कुमार अनीश किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं, बसपा की तरफ से राजीव कुमार धानुक मैदान में उतरकर मुकाबले को चुनौती पूर्ण बना दिया है. 

चैनपुर विधानसभा सीट से बिहार के खनन मंत्री और बीजेपी विधायक बृज किशोर बिंद की साख दांव पर लगी है. बृज किशोर बिंद के खिलाफ कांग्रेस के प्रत्याशी प्रकाश कुमार सिंह को मैदान में है. बसपा ने अपने पुराने उम्मीदवार मोहम्मद जमा खान जबकि जाप ने दिवान अरशद हुसैन पर दांव लगाया है. 2015 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने बृज किशोर के कड़ी चुनौती पेश की थी और महज 671 वोटों से जीत दर्ज कर सके थे. ऐसे में इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर बसपा एक अहम फैक्टर माना जा रहा है. 

जहानाबाद विधानसभा सीट हाई प्रोफाइल मानी जाती है. यहां से नीतीश सरकार शिक्षा मंत्री और जेडीयू नेता कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा चुनावी मैदान में उतरे हैं. वर्मा 2015 में महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में घोसी से चुनाव मैदान थे और जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे थे. हालांकि, इस बार उन्होंने सीट बदल दी है और जहानाबाद से मैदान में है, जिनके खिलाफ आरजेडी से कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव किस्मत आजमा रहे हैं. 2015 में जहानाबाद से सुदय यादव के पिता मुद्रिका सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी, लेकिन डेंगू के चलते उनका निधन हो गया है. इसके बाद सुदय यादव यहां से उपचुनाव में विधायक चुने गए हैं. कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा की राह में सबसे बड़ी बाधा एलजेपी प्रत्याशी इंदु देवी कश्यप बनी हुई है. ऐसे में यहां की सियासी लड़ाई काफी कांटे की मानी जा रही है.