breaking news New

चांपा : मिट्टी तेल डिपो मौतों का सौदागर बनके असहाय परिवारों पर कहर बनकर टूटा, मां-बाप भीख मांगने को मजबूर

चांपा : मिट्टी तेल डिपो मौतों का सौदागर बनके असहाय परिवारों पर कहर बनकर टूटा, मां-बाप भीख मांगने को मजबूर

चांपा।  चांपा के बाहर कोरबा रोड में संचालित मिट्टी तेल डिपो अब मौतों का सौदागर बनके गरीब और असहाय परिवारों पर कहर बनकर टूटा है कुछ रोज पहले इस मिट्टी तेल डिपो में ग्राम सिवनी के दो मजदूर कार्य कर रहे थे जो कार्य के दौरान हाई वोल्टेज तार के चपेट में आने से एक अपना जान गवा बैठा है तो एक सौ फ़ीसदी विकलांग होकर आज किसी काम का नहीं रह गया है

गौरतलब है कि मजदूरी का कुछ कार्य ऐसा होता है जहां मजदूर अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने परिवार के लिए दो वक्त का रोजी रोटी जुटाता है तो वहीं दूसरी ओर काम देने वाले नियोक्ता का भी यह जिम्मेदारी बनता है कि मजदूर के जीवन रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी साधन भी उसे उपलब्ध करा दें ताकि उसके अंडर में काम करने वाला मजदूर  सही सलामत घर पहुंचे इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा संबंधी कुछ मांगों को पूरा करना चाहिए लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं हुआ बताया जाता है कि 13 सितंबर 2020 को शीतला केडिया के कोरबा रोड में संचालित मिट्टी तेल डिपो में ग्राम सिवनी के दो मजदूर हाथ चलित मशीन से बोरिंग खुदाई का कार्य कर रहे थे जिसमें सिवनी के धनेश्वर बरेट तथा देव बरेट चिलहापारा सिवनी  काम पर लगे हुए थे इस दौरान दोनों मजदूर 32 केवी हाई वोल्टेज तरंगित तार के चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए इसके बाद इन घायल मजदूरों को सिवाय हॉस्पिटल पहुंचाने के ज्यादा कुछ नहीं किया गया और  धायल मजदूर तथा उसके परिवार को उसके हाल पर छोड़ कर उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लिया कुछ दिनों के इलाज के बाद देव बरेट का करुणाअंत हो गया तो वही धनेश्वर बरेट का लंबे इलाज के बाद भारी-भरकम खर्च होने के बाद भी आज वह हाथ और पैर दोनों से इतना असहाय हो गया है कि अब वह भीख मांगने के तो क्या हाथ उठा कर दुआ मांगने के काबिल  नहीं रहा तो वही देव बरेट गंभीर रूप से घायल होने के बाद इस नश्वर दुनिया को जल्द ही अलविदा कह कर अंतिम यात्रा में ऐसा निकला कि आज उसके गरीब व असहाय मां-बाप अपने चिराग के बुझ जाने पर आज इतनी परेशानियों का दिन गुजार रहे हैं कि किसी भी देखने सुनने वाले का जी मुंह को जाएगा इसके बाद भी मिट्टी तेल डिपो वालों ने कभी मुड़कर इन परिवारों को नहीं देखा और ना आज तक शासन प्रशासन से कोई मदद मिल सका जिसके चलते आज इन परिवारों का हाल इतना दयनीय है कि दो वक्त की खाने पीने के लाले पड़ रहे हैं ऐसे में यहां गंभीर चिंतन मनन का विषय है कि अब इनके परिजनों के पालन पोषण का क्या होगा जो अब एक अनत हीन प्रश्न बनकर इनके जीवन में समा गया है