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जयंती पर विशेष: माता कर्मादेवी ने अपने हाथों से खिलाई थी बालकृष्ण को खिचड़ी

जयंती पर विशेष: माता कर्मादेवी ने अपने हाथों से खिलाई थी बालकृष्ण को खिचड़ी

आज 7 अप्रैल को मां कर्मादेवी जयंती मनाई जा रही है। मां कर्मादेवी भगवान की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे। तब माता ने अपने सामने बैठकर भगवान श्रीकृष्ण को खिचड़ी खिलाई थी। अत: इस दिन मां कर्मादेवी का पूजन-अर्चन अनिवार्य रूप से करने तथा खिचड़ी का भोग लगाकर प्रसाद बांटने की मान्यता है। इस दिन साहू तेली समाज द्वारा भक्त शिरोमणि मां कर्मादेवी की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है।

साहू समाज की आराध्य देवी कर्मादेवी सेवा, त्याग और भक्ति समर्पण की देवी हैं। कर्माबाई की गौरव गाथा जनमानस में श्रद्धा तथा भक्तिभाव से वर्षों से चली आ रही है। मां कर्मादेवी का जन्म पापमोचनी एकादशी के दिन उत्तरप्रदेश के झांसी नगर में चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ था।

मां कर्मादेवी बाथरी वंश की थीं। उनमें बाल्यावस्था से ही धार्मिक कहानियां सुनने की रुचि हो गई थी। कर्माबाई को जितना भी समय मिलता था, वह समय वे भगवान श्रीकृष्ण के भजन-पूजन व ध्यान आदि में लगाती थीं। उन्होंने अपनी भक्ति से साक्षात श्रीकृष्ण के दर्शन किए और जगन्नाथपुरी में बहुत समय तक समुद्र के किनारे रहकर अपनी गोद में लेकर बालकृष्ण को अपने हाथों खिचड़ी खिलाई थी, ऐसी मान्यता है।

अपने तन, मन और धन से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में लगी रहने वालीं कर्मादेवी दीन-दु:खियों के प्रति दया भावना रखती थीं। इस बार पूरे विश्व में कोरोना वायरस की बीमारी के प्रकोप के चलते यह उत्सव भव्य रूप से न मनाते हुए लघु रूप में मनाया जाएगा।

माँ कर्मा देवी जयंती के दिन सुबह स्नान करने के बाद, श्वेत वस्त्र धारण करें। माता कर्मा का विधिवत पूजन करने के लिए लिए अपने घर में ही या फिर माता कर्मा के मंदिर में ताजे पुष्प, चावल, हल्दी-कुमकुम, धुप-दीप, नैवेद्य आदि पदार्थों से श्रद्धापूर्वक पूजन करें। पूजने के बाद माँ कर्मा के इस सिद्ध मंत्र का जप 108 बार करें। इस मंत्र के जप से अनेक कामनाएं पूरी हो जाती है।

माँ कर्मा सिद्ध मंत्र- "ऊँ नमो कर्मा महादैव्ये नमः।।

पूजन के बाद श्रद्धापूर्वक माता कर्मा की आरती करना चाहिए।

करमा माता की आरती


जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।

निजजन को भवसागर से माँ पार करो नइया॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।


जब जब पीर पड़ी स्वजनों पर तुम दौड़ी आई।

विपदा हरी तैलकारों की तुमने ही माई ॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।


साहू वंश उजागर किन्हीं तुमने कल्याणी।

स्वर वंचित तैलिक अधरों को तुमने दी वाणी॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।


चैत्र मास में नीम की इतनी पत्तियां खाने से दूर हो जाती है गंभीर बीमारियां


मीरा सी महान दुर्गा सी दक्ष दुष्ट दलनी।

हे करूणामयी हमें शरण दो माता दुखहरणी ॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।


तेरी खिचड़ी खाने आये जगन्नाथ स्वामी।

धन्य धन्य माँ करमा जिनके भगवान अनुगामी॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।


करमा मइया की आरती जो कोई जन गावे।

बेदराम लहे चारि पदारथ सुख समपत्ति पावे॥

कि जय करमा मइया कि माई जय करमा मइया।।