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प्रभाकर चंदेल को अग्रिम जमानत, लॉयर्स यूनियन ने किया स्वागत

प्रभाकर चंदेल को अग्रिम जमानत, लॉयर्स यूनियन ने किया स्वागत


 बिलासपुर | छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन प्रभाकर सिंह चंदेल को बिलासपुर जिला न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत दिए जाने का ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ने स्वागत किया है। न्यायालय ने चंदेल के ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार माना है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री संजीव कुमार टामक ने केस डायरी में संलग्न ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया चंदेल को किसी भी प्रकार के रकम की लेन-देन में शामिल होना नहीं पाया है।

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट के निलंबित अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन चंदेल पर अपनी बहाली के लिए रकम मांगने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। बतौर साक्ष्य उन्होंने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड भी पेश किया है, जबकि चंदेल ने भी संतोष पांडेय के विरूद्ध षडयंत्र कर उन्हें बदनाम करने, कूटरचना व धोखाधड़ी करने के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है।

प्रभाकर चंदेल ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। अपने खिलाफ दर्ज प्रकरण पर अग्रिम जमानत की मांग करते हुए चंदेल ने जिला न्यायालय में जमानत अर्जी प्रस्तुत की थी। न्यायालय ने राज्य के एजीपी तथा एसीबी के अधिवक्ता के तर्कों को खारिज करते हुए चंदेल की जमानत अर्जी मंजूर की।


आज यहां जारी एक प्रेस बयान में लॉयर्स यूनियन के राज्य सचिव शौकत अली ने चंदेल को अग्रिम जमानत दिए जाने का स्वागत किया है तथा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि संतोष पांडेय ने निलंबित पटवारी रहते हुए भी कौंसिल को अपनी सेवा निवृत्ति की गलत जानकारी देकर वर्ष 2018 में अपना पंजीयन कराया था, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य शासन से दिसम्बर 2020 तक निलंबन भत्ता प्राप्त कर रहे थे। यह प्रकरण उजागर होने के बाद कौंसिल ने नियम-कायदों के साथ प्रक्रिया के तहत उनका पंजीयन निलंबित किया है। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी देकर फर्जी तरीके से पंजीयन हासिल करने वाले पांडेय के कृत्यों से समूचा वकील समुदाय शर्मिंदा है और न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों को इसका संज्ञान लेना चाहिए तथा कौंसिल की विशेष परिषद को उनके खिलाफ कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए एफआईआर दर्ज कराना चाहिए।