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15 सालों से सीएम के पद पर काबिज नीतीश को रोकने महागठबंधन के तेजस्वी ने संभाला मोर्चा

15 सालों से सीएम के पद पर काबिज नीतीश को रोकने महागठबंधन के तेजस्वी ने संभाला मोर्चा

पटना। अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार भी घोषित हो चुके हैं. मुख्य मुकाबला भाजपा-जेडीयू के गठबंधन एनडीए और राजद-कांग्रेस-वाम दलों वाले महागठबंधन के बीच है. 15 सालों से मुख्यमंत्री पद पर काबिज नीतीश कुमार चौथी बार उन्हें रोकने के लिए महागठबंधन के तेजस्वी यादव खड़े हैं.

तेजस्वी महज 31 साल के हैं. कुछ साल पहले उन्हें क्रिकेट के आईपीएल टूर्नामेंट में मैदान पर डग आउट में बैठे देखा जा सकता था. क्रिकेट के मैदान पर कोई भविष्य न देखकर बाद में उन्होंने अपने पिता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत संभाल ली.

2015 में जब जदयू के साथ मिलकर राजद ने सरकार बनाई तो तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री बने. उस समय उनकी उम्र महज 26 साल थी और इतने बड़े पद पर उनकी नियुक्ति को लालू का बेटा होने का ईनाम माना गया.

‘एक राजनेता के तौर पर तेजस्वी का साबित होना और उनकी असल परीक्षा अभी बाकी है. जब वे बिहार के उप-मुख्यमंत्री बने तो पूरा शासन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही चला रहे थे. वे कप्तान थे और तेजस्वी को अंगुली पकड़कर सिखा रहे थे. सरकार में ऐसा कभी नहीं देखा गया था कि तेजस्वी किसी बात पर अड़े हों या उनके किसी फैसले का विरोध किया हो कि फलां योजना पास नहीं होगी.’

चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव इस बार भले ही चुनावी मोर्चे पर तैनात न हों और राजद के चुनावी पोस्टरों में उनका चेहरा नजर न आ रहा हो लेकिन तेजस्वी, राजद और चुनावी चर्चाओं पर अब भी उनकी छाप है.

लालू से डर का कारण वह दौर है जब लालू सत्ता में थे और बिहार में ‘जंगलराज’ होने की बात कही जाती थी.