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जनमंच रायपुर में 10 और 11 अक्टूबर को अंतर्द्वंद नाटक का मंचन

जनमंच रायपुर में 10 और 11 अक्टूबर को अंतर्द्वंद नाटक का मंचन


0 रंग श्रृंखला नाट्य मंच और इम्पल्स एक्टिंग अकादमी रायपुर की प्रस्तुति नाटक अंतर्द्वंद  

रायपुर। जनमंच रायपुर में लेखक व निर्देशक हीरा मानिकपुरी द्वारा रचित नाटक अंतर्द्वंद का मंचन 10 और 11 अक्टूबर को किया जा रहा है। 

नाटक मुख्य रूप से पिता और पुत्री के बीच का अंतर्द्वंद है,  बेटे के साथ जब पिता पुत्री को नकारता है और उसे उसकी माता की मृत्यु का कारण मानता है , उसे एक पुत्री के अधिकारों से पूर्णत: वंचित रखता है। जहाँ बेटे को पुरे सम्मान के साथ उसका अधिकार मिलता है वहीँ उस बेटी के साथ इस तरह का व्यवहार, जिसमे उसका कोई अपराध नहीं होता। एक संतान होने के नाते उसे अपने पिता से हर वो अधिकार चाहिए जो बेटे को दिया जाता है , चाहे वो पिता प्रेम हो , सम्मान हो , संरक्षण हो , शिक्षा हो , या संम्पत्ति। ये कहानी कोई पिछड़े वर्ग या अशिक्षित परिवार या आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग की नहीं है बल्कि शिक्षित और आर्थिक सम्पन्न परिवार की है। व्यक्ति अपने कुंठित विचारो से जब घिर जाता है तब इस तरह के अपराध करता है। नाटक में एक बेटी की लड़ाई है अपने ही परिवार से , अपने सम्मान और अधिकारों की लड़ाई। एक शिक्षित युवती जो बचपन से अपने को अपने ही परिवार से अलग-थलग पाती उसके पास सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं होता , तब वो विद्रोह करती है परिवार से और समाज से , वो लडती है उस विचारधारा से जो कुंठा की जननी है , जो बड़े बड़े विद्वानों को भी कुंठित कर देती है। और अंतत: उसकी जीत होती है। और आखिर में अपने इस जीत का श्रेय वो अपने पिता को देती है , अजीब लगता है पर एक बेटी अपने पिता को कभी हारा हुआ नहीं देख सकती , शायद यही इस रिश्ते की महानता है। पिता अपने अंतर्द्वंद से जीत जाता है और सच्चाई को स्वीकार करता है, यही इस नाटक का अंत होता है। नाटक पूर्णत: काल्पनिक है पर इसके सन्दर्भ अगर दर्शको से जुड़े तो इसे केवल संयोग ही माना जायेगा।

निर्देशक हीरा मानिकपुरीके बारे में
रायपुर छत्तीसगढ़ में जन्मे हीरा मानिकपुरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायपुर में पूरी की , पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यलय से बीए में स्नातक और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से शस्त्रीय गायन में विशारद की उपाधि प्राप्त की, इसके पश्चात नाटय विधा की शिक्षा के लिए 2004 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में चयनित हुए। रा.ना.वि. से 2007 में अभिनय  कला में विशेषज्ञता प्राप्त किया।  25 वर्षो से निरंतर रंग कर्म , जिसमे देश और विदेश के विख्यात रंग कर्मीयो के साथ रंग अनुभव प्राप्त किया है- अनुराधा कपूर , रोबिन दास , देवेन्द्रराज अंकुर, त्रिपुरारी शर्मा, रंजीत कपूर, रॉब क्लेर , जमील अहमद , मार्टिन लूथर , एम् के रैना , दिनेश खन्ना , आदि प्रमुख है। भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के द्वारा आयोजित भारत चीन संस्कृति आदान प्रदान कर्यक्रम के अंतर्गत चीन की यात्रा। इसके बाद 6 वर्षो तक मुंबई में व्यवसायिक रंग मंच और फिल्म टेलिविजऩ के क्षेत्र में कार्यरत रहे। इसके साथ ही साथ आप  ने अभिनय में शोध कार्य भी किया जिसके अंतर्गत आपने छत्तीसगढ़ की लोक कथा गायन शैली पंडवानी पर कार्य किया। इसके अलावा आप देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में नाट्य प्रशिक्षण प्रदान करते रहे। आपके द्वारा निर्देशित नाटको में  बी थ्री, जाति ही पूछो साधू की, व्याकरण, प्रजातंत्र का खेल, मोगरा जियत हवे, आगरा जंक्शन, टैक्स फ्री, टुम्पा, तुगलक, सदाचार का तावीज़ और सुर की बारादरी, गगन दमामा बाज्यो, ताज महल का टेंडर आदि प्रमुख है।

मंच पर : अशोक मेहता-प्रतीक बर्मन, वर्धमान मेहता-लार्सन पंजवानी, अंजलि मेहता-गीतांजली साहू, पारख जी वकील 1 -आर्यन सारस्वत, गौतम जी वकील 2  -परमेश्वर जंघेल, जज-शिवा कुंभार।
मंच परे : साउंड टैक -साईंअंश मानिकपुरी, प्रियांशु शर्मा, मंच संचालन- प्रकाश भारती, मंच व्यवस्था-त्रिलोचन सोना, सहयोगी -रंग श्रृंखला नाट्य मंच के सभी कलाकार, मार्ग दर्शक- मिजऱ्ा मसूद, विशेष आभार-सुभाष मिश्र ( जनमंच ) रायपुर।