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उच्च शिक्षा व्यवस्था का छत्तीसगढ़ में हाल बेहाल

उच्च शिक्षा व्यवस्था का छत्तीसगढ़ में हाल बेहाल

कोरोना संकट काल में उच्च शिक्षा व्यवस्था का छत्तीसगढ़ में हाल बेहाल है। चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर महाविद्यालय के हम  विद्यार्थियों  कि  उच्च शिक्षा  के  क्या परिणाम होने वाले हैं? क्योंकि वर्ष भर से महाविद्यालय बंद हैं। एक पूर्व  प्राध्यापक का कहना है कि उच्च शिक्षा विपरीत रास्ते पर चल  रही है,  एक बरस से पढ़ाई ठप है। ऑनलाइन अध्ययन अध्यापन का कार्य सभी विद्यार्थियों तक पहुंच ना होने के कारण असफल है। ऑफलाइन पढ़ाई बंद होने और महाविद्यालय खुलने के पश्चात विद्यार्थियों की नगण्य संख्या और नियमित अध्यापकों की रुचि ना होने के कारण ठप है। कुल मिलाकर महाविद्यालय में कागजी कार्यवाही और खानापूर्ति की जा रही है। दूसरी बात यह है कि रिक्त पदों पर अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्तियां नहीं की गई है, जिससे रिक्त पदों पर पढ़ाई बंद है। छत्तीसगढ़ के पालक और विद्यार्थी बहुत सीधे हैं पढ़ाई के नाम पर उनको बेवकूफ बनाया जा रहा है। फीस की वसूली की जा रही है। अन्य राज्य होता तो लोग कोर्ट का रास्ता अपना लेते। सत्ताधारी दल कांग्रेस विपरीत रास्ते पर है यहां तक कि अपने  पूर्व मुख्यमंत्रियों  के आदर्शों का अनुसरण करना भी उचित नहीं समझते। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने कभी भी आम जनता की भावनाओं को आहत नहीं किया। 

उच्च शिक्षा विभाग के  तदर्थ मान सेवी  आपाती साहायक अध्यापक यहां तक कि लोक सेवा आयोग से फेल सुपरन्यूमैरेरी सहायक अध्यापकों को उन्होंने नियमित नियुक्तियां दी। उन्होंने उनकी सेवाओं का मूल्य समझा  और प्रदेश को अनुभव का लाभ दिलाने के लिए दूरदर्शी निर्णय लिए।  वर्तमान में सत्ताधारी दल  अतिथि  व्याख्याताओं  की सेवा तो महाविद्यालय में ले रहा है, लेकिन  उनकी सुध नहीं ले रहा है।शासन चाहे तो उनकी सेवाओं का लाभ  ले कम वेतन में ले सकता है, और महाविद्यालय प्रारंभ हो गए तो शीघ्र ही उनको नियुक्ति देकर के विद्यार्थियों को  अध्ययन अध्यापन का लाभ पहुंचाया जा सकता है।  किंतु  उनसे वादे चुनाव के वक्त किए जाते हैं कि उन्हें शासकीय सेवा से नहीं निकाला जाएगा। सत्ता में आने के बाद ठीक विपरीत कार्य किया जाता है। ना जाने कौन उल्टी बात पढ़ाता है कि  आकस्मिक रूप से नियमित सेवा देने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, और नई भर्ती कर ली जाती है। छत्तीसगढ़ के लोगों से सेवा तो ली जाती है लेकिन जब  फल देने का वक्त आता है तो उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। कांग्रेस के पूर्व महान मुख्यमंत्री माननीय श्यामाचरण शुक्ल माननीय अर्जुन सिंह जी माननीय मोतीलाल बोरा जी उच्च शिक्षा मंत्री रविंद्र चौबे जी ने भी अस्थाई सहस्त्र अध्यापकों को महाविद्यालय में नियमित किया है लेकिन वर्तमान कांग्रेस की सरकार नियमित तो दूर अतिथि व्याख्याताओं को नियुक्ति देना भी उचित नहीं समझती। उच्च शिक्षा विभाग सो रहा है। कागजी कार्रवाई में खानापूर्ति हो रही है, पढ़ाई ठप है ,लेकिन रिजल्ट मस्त है। सब प्रथम श्रेणी द्वितीय श्रेणी पास असाइनमेंट में भरपूर नंबर प्राप्त विद्यार्थियों के भी मजे हैं। अच्छा होताहै कि इसी तरह की डिग्रियां दी जाती है छत्तीसगढ़ बहुत आगे निकल जाता दूसरे स्टेट से ज्यादा अंक उनको प्राप्त होते एक रिकार्ड बन जाता। विश्व रिकार्ड बन जाता। उच्च शिक्षा विभाग ना जाने कब अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति करेगा,और विद्यार्थियों की कब महाविद्यालय में पढ़ाई प्रारंभ होगी भगवान जाने। 

 महाविद्यालय चर्चा के विषय हैं  उच्च शिक्षा विभाग के समस्त प्रयोग असफल हो चुके हैं। और केवल कागजी कार्यवाही पूरा करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं।खानापूर्ति करने के लिए कार्य हो रहा है। प्राध्यापक घरों में बैठे बैठे वेतन पा रहे हैं पता नहीं जब से छत्तीसगढ़ राज्य बना है शासन के विभागों में विशेषकर शिक्षा विभागों में काम करने वाले नियमित अधिकारी कर्मचारी राज्य सुख भोग रहे हैं उनके सहयोग के लिए स्थानीय उच्च शिक्षा प्राप्त युवक-युवतियों से अन्य पद नामों से नियुक्ति देकर जैसे शिक्षाकर्मी अतिथि व्याख्याता मान सेवी आदि नाम दे करके उनकी सेवा के लिए नियुक्ति दी जाती है।बिचारे इस आस में क्यों नहीं आज नहीं तो कल नियुक्त किया जाएगा। नियमित किया जाएगा। सेवा करते रहते हैं क्योंकि पूर्व में उन्होंने देखा है कि जो कांग्रेस के महान पूर्व मुख्यमंत्री हुए उन्होंने जिन रास्तों का अनुसरण किया उसमें नियमितीकरण प्रमुख रहा है। महान पूर्व मुख्य मंत्रियों के रास्ते का अनुसरण करना छोड़ उल्टी सोच के रास्ते पर छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री चल रहे हैं। छत्तीसगढ़िया मूल का व्यक्ति छत्तीसगढ़ की शासकीय विभागों में अपनी सेवाएं देता है उसे किसी न किसी बहाने निकालने का यह रास्ता ढूंढ़ लेते हैं।लंबे समय से सेवा लेने के पश्चात उनको कहते हैं कि तुम योग्यता नहीं रखते, इसलिए तुम्हारी सेवा की आवश्यकता नहीं है।जबकि कहीं भी सेवा देने वाले के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता।उनको सम्मान दिया जाता है। उनके मूल्य का आकलन किया जाता है और उनके अनुभव का लाभ लिया जाता है। किंतु यहां बड़ा विपरीत है कांग्रेस पार्टी अपने ही पूर्व महान मुख्यमंत्रियों माननीय श्यामाचरण शुक्ला श्री अर्जुन सिंह माननीय मोतीलाल बोरा ऐसे मुख्यमंत्रियों का दर्शनों का अनुसरण नहीं करती है।