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फॉरेस्ट गार्ड ने हाथियों से होने वाले नुकसान की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी, ग्रामीणों ने कहा-हाथियों की आमद की जानकारी तक नहीं

फॉरेस्ट गार्ड ने हाथियों से होने वाले नुकसान की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी, ग्रामीणों ने कहा-हाथियों की आमद की जानकारी तक नहीं

धरमजयगढ़। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के नए-नए कारनामों की खबरें मीडिया में सुर्खियां बटोरती रहती हैं। अन्य कई मामलों की तरह भ्रष्टाचार का भी एक प्रकार से सामान्यीकरण हो गया है। जब तक कोई भी मामला दबा हुआ है तब तक तो कोई बात ही नहीं। लेकिन यदि किसी तरह कोई गड़बड़ी या अनियमितता की बात सामने आ भी जाती है तो उसे मानवीय भूल या लिपिकीय त्रुटि बताकर मामला रफादफा कर दिया जाता है। गिनती के ही ऐसे मामले होंगे जिसमें निष्पक्ष जांच होती है और दोषियों पर उचित कार्रवाई होती है। 

धरमजयगढ़ वन विभाग में भी हाथियों से होने वाले नुकसान की रिपोर्ट से जुड़ा एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जिसमें वन मंडल स्तर की रिपोर्ट में धरमजयगढ़ रेंज के सेमीपाली क्षेत्र में हाथियों से फसल और मकान की हानि दर्शायी गई है लेकिन जब इस संबंध में खबर कवरेज के लिये रिपोर्टर मौके पर पहुंचे तो वहाँ एक नई कहानी सामने आयी। मौके पर ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके में हाथी का नामोनिशान नही है। इसके बाद जब विभाग के अधिकारी से इस बात की पुष्टि की गई तो उन्होंने इसकी जवावबदरी अपने कर्मचारी पर डाल दी। 

लेकिन कर्मचारी यानी कि उस बीट के नाका गौतम किशोर से जब इस सबंध में बात की गई तो उसने कहा कि यह कोई बड़ी बात नही है।ऐसा तो यहां होते रहता है। ऐसे में जंगल विभाग का जंगल राज किस कदर भ्र्ष्टाचार के कंठ में डूबा है आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। आपको बता दे कि हाथियों से नुकसान का पूरा वाक्या 358 RF भँवरखोल दमास की है। जिसमे फारेस्ट गार्ड द्वारा फसल और मकान नुकसान की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी गई है।