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महादेव घाट पर छठ व्रतियों ने डूबते भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया

 महादेव घाट पर छठ व्रतियों ने डूबते भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया

रायपुर। छठ व्रतियों ने कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुवे रायपुर शहर के महादेव घाट एवं तालाबों के किनारे आज डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया । छठ श्रद्धालु महादेव घाट पहुंचे और खारुन नदी में भगवान  सूर्य को अर्घ्य दिया।  

छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट के अध्यक्ष  राजेश कुमार सिंह ने बताया कि छठ व्रती कोरोना गुइडेलिने का पालन करते हुवे भगवान सूर्य और छठी मैया कि पूजा अर्चना किये। साथ ही छठ व्रतियों ने छत्तीसगढ़, भारत एवं पूरे विश्व को कोरोना मुक्ति के लिए प्रार्थना किये।  कोरोना महामारी को देखते हुवे समिति के अपील पर इस बार छठ व्रती बड़ी संख्या में रायपुर शहर में अपने घर के आस-पास बने जलकुण्डों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिए।  सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करते हुवे महादेव घाट पर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया ।

राजेश कुमार सिंह,  रायपुर नगर निगम के जोन-9 अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा, रविंद्र सिंह, विपिन सिंह, सुनील सिंह,   परमानन्द सिंह, रविंद्र शर्मा, संजय तिवारी, अजय शर्मा, जयंत सिंह, रामकुमार सिंह, संजय सिंह, मनोज सिंह, पंकज अग्रवाल, पंकज चौधरी,  अजित उपाध्याय, वेदनारायण सिंह, सत्येंद्र सिंह गौतम, अमलेश कुमार, गोरखजी, रविकांत,  रंजीत मिश्र, सरोज सिंह एवं अन्य सदस्य महादेव घाट पर आज उपस्थित थे। रायपुर नगर निगम के मेयर ऐजाज़ ढेबर ने खारुन नदी के महादेव घाट पर छठ पूजा में शामिल हुवे।  छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट के सदस्यों ने गुरुवार को सफाई किया एवं लाइट डेकोरेशन महादेव घाट पर किया।  समिति की तरफ से महादेव घाट पर मास्क एवं सेनिटाइजर की व्यस्था किये।

राजेश कुमार सिंह ने आगे बताया किये छठ व्रती शनिवार सुबह को उगते सूर्ये को अर्घ्य देंगे। उषा अर्घ्य देने के बाद छठ व्रती पूजा अर्चना के बाद शनिवार को 36 घंटे का निर्जला व्रत उपवास को तोड़ेंगे।

उषा अर्ध्य 21 नवंबर को होगा। छठ पर्व ही दुनिया का मात्र एक पर्व है जिसमें डूबते सूर्य एवं उगते की पूजा की जाती है। छठ पर्व को षष्ठी पूजा एवं सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है। त्यौहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना और प्रसाद, प्रार्थना, प्रसाद और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है। छठ पर्व मूलतः बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों का महापर्व है। बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश एवं राज्यों में जाकर बसे वहां भी अपनी संस्कृति को आज भी बचाये हुऐ हैं। छठ महापर्व नेपाल, फिजी, मॉरिशस, सूरीनाम, गुयाना एवं अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट रायपुर के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने कोरोना महामारी को देखते हुवे लोगों से अपील की है कि इस वर्ष कोरोना महामारी को रोकने में केंद्र एवं राज्य शासन और जिला प्रशासन का सहयोग करें। राजेश सिंह ने आगे बताया कि कोरोना के कारण इस बार छठ व्रती घर पर ही छठ पूजा मनाये और छत्तीसगढ़, भारत और विश्व को कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान् सूर्य और छठी मैया से प्रार्थना  कर रहें हैं।  छठ व्रती सूर्य भगवन और छठी मैया को पकवान, फल एवं विभिन्न प्रकार के व्यंजन को भोग लगाते हैं।    

साथ ही समिति इस वर्ष छठ पूजा पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भंडारे आयोजन नहीं किया है।    महादेव घाट एवं रायपुर जिले के तालाबों के किनारे अपनी स्वंय की जबाबदारी पर पूजा कर रहे हैं।   छठ पूजा चूँकि व्रती के द्वारा तालाबों, नदियों एवं जलाशयों के किनारे होती है।