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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- मौत ने धर दबोचा एक चीते की तरह

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- मौत ने धर दबोचा एक चीते की तरह

सुभाष मिश्र
जब हरिद्वार के कुंभ में अपनी आस्था के चलते लाखों लोग एक साथ गंगा में डुबकी लगा रहे हैं, ठीक उसी समय देश के अस्पतालों में, होम आईसोलेशन में बहुत से लोग आक्सीजन की कमी, लंग्स इन्फेक्शन की वजह से दम तोड़ रहे हैं। बड़ा ही विचित्र और विविधता से भरा देश है हमारा और उससे भी ज़्यादा विविध रूप धरने वाले हमारे नेतागण। दिन भर लाखों की भीड़ वाली रैलियाँ करो और शाम को मन की बात के ज़रिए में ज्ञान गज की दूरी की समझाईश के साथ बाक़ी बचा कुछ ज्ञान पेलो। चुनाव आयोग को छोटी-मोटी आचार संहिता का उल्लंघन तो दिखाई दे जाता है, पर कोरोना का बढ़ता संक्रमण नहीं दिखता, यही वजह है की वो जगह-जगह होडिंग लगवाकर कह रहा है -कोरोना से हम नहीं डरेंगे, मतदान हम ज़रूर करेंगे। इसी तरह की बात देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कह रहे हैं। कुंभ में गंगा स्नान से कोरोना भाग जायेगा। हमारी आस्था का आलम ये है की हम हर हर गंगे बोलकर गंगा में डुबकी लगाकर, गंगाजल छिड़क कर अपने सारे पापों से मुक्ति पा लेंते हैं। गीतकार को लिखना पड़ जाता है की राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते। सरकार को गंगा की सफ़ाई के लिए एक मंत्रालय बनाने की ज़रूरतपड़ जाती है। गंगोत्री से निकलने वाली गंगा, गंगासागर या कहे बंगाल की खाड़ी तक पहुँचते-पहुँचते ना जाने कितनी दूषित हो जाती है। हम जिसे पवित्र मानते हैं, पूजते हैं उसकी दुर्गति करने में उसे अपमानित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते, चाहे वे हमारी पवित्र नदियाँ हो या देवी स्वरूप पूजी जाने वाली स्त्रियाँ।
दुष्यंत कुमार का एक शेर है -

मौत ने धर दबोचा एक चीते की तरह
जि़ंदगी ने जब छुआ फ़ासला रखकर छुआ।

इस समय कोरोना से ज़्यादा उसका डर व्याप्त है। ये सही है की कोरोना की दूसरी लहर में हमारे देश के दस राज्य बुरी तरह प्रभावित हैं, जहां से चल आने वाली ख़बरें बहुत डरावनी हैं। सुबह सेसोशल मीडिया ग्रूप पर किसी न किसी के मरने की, श्रद्धांजलि की खबरें डर में इज़ाफ़ा करती हैं। जो घर में भले चंगे हैं, वे भी डरे बैठे हैं। सबको लगता है कोरोना रूपी मौत ने घर देख लिया है, कल कहीं हमारी बारी ना आ जायें। ये सब जानते हैं की एक दिन तो सबका मरना तय है, पर कोरोना संक्रमित होकर मरना बहुत बुरा है। लाश अपनों का इंतज़ार करते पड़ी रहती है, और अपने हैं की मारे डर के आना नहीं चाहते। भला हो कुछ कर्मचारियों का और कुछ समाजसेवी लोगों का जो अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करते हैं। अभी कोरोना से होने वाली मौतों की वजह से श्मशान में लंबी वेटिंग है और क़ब्रिस्तान में जगह का टोटा पड़ रहा है। कचरा वाहनों में मृतकों के शव ढोये जा रहे हैं। मरने वाली की अस्थियां लेने तक कोई नहीं आ रहा है। मृतक परिवार को अपना दुख प्रकट करने कंधे तक नहीं मिल रहे हैं। सारे रुदाली ग़ायब हैं, और जो दिख भी रहे हैं तो वे सोशल मीडिया पर देखा-देखी के घडिय़ाली आँसु बहा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में दो लाख से ज़्यादा लोग कोरोना पॉजि़टिव पाये गये हैं और इस दौरान 1036 मौते हुई है। कोरोना संक्रमण के आँकड़े पिछले एक सप्ताह से बढ़ रहे हैं। मीडिया में आने वाली खबरें जिनमें श्मशान कर्मचारियों का बुरा हाल, 24 घंटे काम जैसी खबरें या फिर आक्सीजन सिलेंडर नहीं मिलने से मौत की खबरें डराती हैं। जनसंख्या की दृष्टि से सबसे सघन और बड़ी आबादी के राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार से अब ज़्यादा संक्रमण की खबरें आनी शुरू ही हुई है। यदि ख़ुदा ना ख़ास्ता यहाँ संक्रमण बढ़ता है, तो इसे सँभाला बहुत मुश्किल होगा। अभी तो महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य ज़्यादा प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल जहां विधान सभा चुनाव हो रहा है, असम, केरल, तमिलनाडु, पडुचेरी जहां अभी मतदान पूरा हुआ है और जहां सोशल डिस्टेनसिंग की पूरी तरह धज्जियाँ उड़ी हैं, वहाँ के आँकड़े आना बाक़ी है। इस बीच यह भी मालूम हुआ है की इस बार का कोरोना वायरस डबल म्यूटेंट वाला है। अकेले महाराष्ट्र में 61 प्रतिशत मरीज़ों में डबल म्यूटेंट वायरस मिला है। मुम्बई, गुजरात में कोरोना संक्रमण से उपजी लॉकडाउन की स्थिति से प्रवासी मज़दूरों का पलायन जारी है। कोरोना संक्रमण की दृष्टि से क्रमश: सबसे उपर महाराष्ट्र फिर छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और हरियाणा घटते क्रम में हैं।
जहां तक हमारे मान्यता है की काशी का मणिकर्णिका घाट का श्मशान की आग कभी नहीं बुझती। यहाँ हमेशा ही चिंताएँ जलती हैं, यही हाल अब देश के बहुत से शहरों का होता जा रहा है। हरिद्वार में कोरोना संक्रमण फैल रहा है। अब महाकुंभ को 30 अप्रेल को समाप्त करने की बात हो रही है। हरिद्वार में कुंभ मेला में पांच दिनों के भीतर 2167 श्रद्धालुओं को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। यह स्थिति तब है जब यहां बगैर कोरोना निगेटिव रिपोर्ट के लोगों को एंट्री नहीं मिल रही है। सोमवार को सोमवती अमावस्या तथा बुधवार को मेष संक्रांति और बैसाखी के पर्व पर हुए दोनों शाही स्नानों में गंगा में डुबकी लगाने वाले 48.51 लाख श्रद्धालुओं में से ज्यादातर लोग बिना मास्क पहने और सामाजिक दूरी रखने जैसे कोविड से बचाव के नियमों का उल्लंघन करते नजर आए।
निर्माण अखाड़े के महामंडलेश्व की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई है। कोरोना के हाहाकार के बीच दस राज्यों से डबल म्यूटेंट और यू के वेरिएंट के प्रभाव की खबरें आ रही हैं। यूपी एक ओर रात का कर्र्फ्यू बढाय़ा जा रहा है वहीं पंचायत चुनाव में कोरोना नियमों की अनदेखी कर लंबी-लंबी लाईन में बिना दूरी और मास्क के लोग खड़े दिख रहे हैं। बिहार, गुजरात जैसे राज्यो में लोग पॉजिटिव रिपोर्ट के साथ अस्पतालों में भर्ती होने लाईन में लगकर यहां वहां भटक रहे हैं। हेल्पलाई ने हेल्पलैस सी जान पड़ रही है। पिछले 11 दिनो में संक्रमीतों का आंकड़ा बढ़कर एक लाख से दो लाख हो गया है।
मध्य प्रदेश में भी कोरोना का कहर जारी है। इस बीच शिवराज सिंह सरकार में मंत्री प्रेम सिंह पटेल का एक अजीबोगरीब बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मौतें हुई हैं, इन्हें कोई नहीं रोक सकता। डॉक्टर्स की व्यवस्था की गई है। लोगों को डॉक्टरों के पास जाना चाहिए। जहां तक मौतों का संबंध है, लोगों को अपनी उम्र पूरी होने पर मरना पड़ता है। मंत्री जी को मालूम है की अब तक केवल 173123 ही लोग ही तो मरे हैं, इन्हे तो वैसे भी मरना था। लगता है अभी कोरोना के वायरस ने मंत्रीजी का घर नहीं देखा। कोरोना को लेकर यदि हमारा यही लापरवाह और गैरजिम्मेदाराना रवैय्या रहा तो वह दिन दूर नहीं जब विश्व गुरू की चाहत वाला हमारा देश कोरोना संक्रमण में पूरी दुनिया में अव्वल हो ही जायेगा।
किसी शायर ने लिखा है-

ऐ श्मशान तेरी वीरानगी क्यों नहीं जाती ,
हम तो मर-मर कर तुझे आबाद किये जाते हैं ।

कहीं से कोविड वैक्सीन के चोरी होने की खबरें आ रही हैं, तो कहीं से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाज़ारी और जमाख़ोरी की। बहुत से लोगों ने बिना संक्रमित हुए ही रेमडेसिविर इंजेक्शन को संजीवनी बूटी समझकर रख लिया है। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है, जैसे लॉकडाउन से पहले लोगों ने जिनकी जेब में पैसा था, खाने-पीने की चीजों का बड़ी मात्रा में संग्रहण कर लिया। बहुत से अस्पताल लोगों के इस डर को भुनाकर अपने अस्पतालों में बेड की, आक्सीजन सिलेंडर की एडवांस बुकिंग कर रहे हैं। ये सब लोगों ने हैरत इलाहाबादी का ये शेर नहीं सुना है।
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं ।।