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भारत माता स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर बनी आत्मनिर्भर

भारत माता स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर बनी आत्मनिर्भर

प्रतिमा चार से ₹5000 से हुई आर्थिक स्थिति मजबूत

दंतेवाड़ा, 27 दिसंबर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाई जा रही नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाएं गांव वालों से गोबर खरीद कर वर्मी कंपोज खाद खाद बनाकर अच्छा मुनाफा कमा रही है जिसमें शासन-प्रशासन महिलाओं का भरपूर सहयोग कर रहा है महिलाओं के लिए गोटन में सेट बना कर दिए गए हैं जिससे महिलाएं गोबर खरीद कर कंपोस्ट खाद तैयार कर सके। 

स्व सहायता समूह की अध्यक्ष ने मदीना मौर्य ने बताया कि भारत माता स्व सहायता समूह द्वारा वर्मी कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है जिसमें 10 महीना काम कर रही हैं। स्व सहायता समूह की अध्यक्ष ने मदीना मौर्य ने बताया कि पहले हम लोग गांव वालों से गोबर को 2रूपये किलो में खरीदते हैं और उन्हें ऑनलाइन खाते में पेमेंट करते हैं के बाद गोबर को एक गड्ढे में 15 दिनों के लिए डाला जाता है 15 दिनों बाद उस गोबर को टंकी में वर्मी कंपोस्ट खाद के लिए रख देते हैं जिसके बाद खाद तैयार होने के बाद उसे निकालकर सुखाया जाता है खाद तैयार होने के बाद उसे हम ₹10 मैं शासन प्रशासन व अन्य लोगों को भेजते हैं जिससे हम महिलाओं को अच्छा मुनाफा हो रहा है और महीने में 4 से ₹5000 इनकम हो रही है जिससे हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है । 

वहीं स्व सहायता समूह की सहायिका हेमलता बघेल ने बताया कि हम लोगों के द्वारा  गौठानो में गायों को  लाया जाता है और गांयो के लिए चारा तैयार कर उन्हें दिया जाता है और गाय गोबर से जैविक  व वर्मी को खाद्य तैयार किया जाता है इसमें शासन प्रशासन हमारा भरपूर सहयोग कर रहा है हमें गठान उपलब्ध कराया गया है सेट बना कर दिया गया है वह खाद बनाने के लिए टंकी उपलब्ध कराई गई है जिससे हमें रोजगार मिल रहा है और हम आज आत्मनिर्भर बन और चार से ₹5000 महीने कमा रहे हैं। 

किताब जनपद पंचायत सीईओ ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश अनुसार महिलाओं के माध्यम से गोबर खरीदी की जा रही है और जिससे महिलाओं को रोजगार मिला है महिलाएं गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर रही है महिलाओं के द्वारा  अब तक ₹38000 का गोबर खरीदी की जा चुकी है जिससे 20 क्विंटल वर्मी खाद कंपोस्ट बना चुके हैं जिसे दस रुपए प्रति किलो के हिसाब से सहकारी समिति को बेच रहे जिससे यह सभी महिलाएं आत्मनिर्भर हो गई है और अच्छा मुनाफा कमा रही।