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राजहरा क्षेत्र में चल रहा सट्टा, सटोरियों के धंधे आबाद पुलिस मौन, बेख़ौफ़ होकर लोग कर रहे काले धंधे का संचालन

राजहरा क्षेत्र में चल रहा सट्टा, सटोरियों के धंधे आबाद पुलिस मौन, बेख़ौफ़ होकर लोग कर रहे काले धंधे का संचालन

दल्लीराजहरा : नगर में वार्ड नं 20 मै, खिलावन  व वार्ड नंबर 25 में मनोज नामक  व्यक्ति कर रहे हैं सट्टा का अवैध कारोबार  लिखवाने वाले  सटोरियो को  खाईवालों के चक्रव्यूह में लोग इस कदर फंस चुके हैं की इससे उबर नहींं पा रहे हैं। नगर में एक दो बड़े  खाईवाल लंबे समय से सट्टा संचालित कर रहे हैं। पुलिस और खाईवालों की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार नगर सहित आस पास के अंचल में पुरी तरह से चरम पर है। खाईवालों ने भी हर वार्ड व नगर में अपना-अपना जोन बंटा हुआ है। एक दूसरे के जोन में कोई दखल नहीं देता है।

लोग बेख़ौफ़ होकर अपने काले धंधे का संचालन कर रहे हैं। शहर के कई वार्ड में सट्टे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। पूरे शहर को सट्टे ने अपनी चपेट में ले लिया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब खुलेआम सट्टा खेल रहे हैं और उनमें पुलिस का भी कोई डर नहीं नजर आता। वहीं पुलिस भी इस पूरे मामले पर अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। शहर की तंग गलियों में काफी लोग सट्टे के धंधे में लगे हुए हैं। वहीं हालात देखकर लगता है कि इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं पुलिस की कार्रवाई नहीं हो रही है, क्योंकि जिस तरह लोग खुलेआम सट्टा चलने लगा है, इसकी जानकारी पुलिस को होते हुए भी कोई कार्यवाई नहीं कि जाती हैं। 

ऐसे ही एक मामला दल्ली राजहरा के वार्ड नं 20  में देखने को मिला जहाँ एक पान ठेला  पर खिलावन उफ खोडू  नाम का यह व्यक्ति बेख़ौफ़ होकर सट्टा पट्टी लिख रहा है. जानकारी मिली है कि खिलावन व मनोज का सट्टा का कारोबार पुरे दल्ली के कई क्षेत्र में फैला है और लगभग 20  ठिकानों में यह इसी प्रकार बेख़ौफ़ होकर और पुलिस की नाक के नीचे अपना सट्टा का कारोबार चला रहा है और सप्ताह में लगभग 10  से 8 लाख रुपये का सट्टा पट्टी लिखता है. इतनी बड़ी रकम यदि सप्ताह में सट्टा के रूप में लिखी जा रही है और वो भी बेख़ौफ़ तो कहीं न कहीं इसमें पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की भी संभावना साफ़ तौर पर लग रही है. उसके चहरे पर पुलिस के डर को लेकर थोड़ी भी सिकंज दिखाई नहीं दे रही है. वह खुलेआम पैसों को अपने पान ठेले के  गल्ले में रखकर आराम से पालती जमाकर अवैध रूप से सट्टा लिख रहा है. उसे जरा भी शासन  व प्रशासन का डर नहीं है. पुलिस से सांठगांठ के चलते ये अवैध कारोबार को बाकायदा लाइसेंसी कारोबार के रूप में खुले आम शहर में संचालित हो रहा है।

पुलिस और खाईवालों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि ऊपर अधिकारियों को दिखाने ये खाईवाल अपने गुर्गों के नाम 2  दिन पहले एक-एक प्रकरण बनवा देते हैं। ऊपर बैठे अफसरों को लगता है पुलिस कार्रवाई कर रही है। जबकि वास्तव में ये सांठगांठ का एक पहलू होता है। सवाल ये है कि जब पुलिस हर महीने सटोरियों के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो फिर उनसे पूछताछ कर खाईवालों  मानोज व खिलावन तक क्यों नहीं पहुंच पाती।

अब इस पुरे मामले में यह देखना होगा की पुलिस कितनी मुस्तैदी से इस व्यक्ति पर कार्रवाई करती है. साक्षात् इस अवैध कारोबार को संचालित करते हुए व्यक्ति पर यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो कहीं न कहीं पुलिस की मिलीभगत और उसकी भूमिका संदिग्ध नजर आयेगी. खुलेआम सट्टा लिख रहे इन व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए और उसके साथ ही इसके पीछे जो बड़े  आका हैं क्या पुलिस उनपर भी कार्रवाई करेगी यह भी देखने वाली बात होगी.