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आकाश के खाते में पांच लाख कहां से आए, पता नहीं कर पाई पुलिस

 आकाश के खाते में पांच लाख कहां से आए, पता नहीं कर पाई पुलिस

 भोपाल । कोलार पुलिस की तीन दिन से रिमांड पर चल रहे आकाश दुबे से पुलिस कुछ खास जानकारी नहीं उगलवा पाई है। पुलिस उन लोगों की भी पहचान नहीं कर पाई जिनको आकाश ने रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए थे। उसको अस्पताल से 40 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन एक माह में उसके खाते में पांच लाख रुपये पहुंचे। ये पैसे कहां से आए पुलिस अभी तक यह भी पता नहीं कर पाई है। अब जिनके खाते से पैसे आए, उनकी पहचान करने की बात पुलिस कह रही है। इधर, जेके अस्पताल ने पुलिस के उस पत्र का जवाब भेज दिया है।
इसमें कहा है कि स्टाफ ज्यादा था इसलिए रेमडेसिविर के इंजेक्शन के गायब होने और आकाश पर ध्यान नहीं दे पाए। अब पुलिस दोबारा से एक और पत्र अस्पताल प्रबंधन को लिखेगी। आकाश दुबे रिमांड में हैं। पुलिस तीन दिन तक उससे कोई खास जानकारी नहीं निकाल पा रही है। उसके मोबाइल का रिकार्ड पुलिस के पास पहुंच गया, लेकिन कोई जानकारी हाथ नहीं लगी है। उधर, आकाश की पुलिस रिमांड खत्म हो गई और पुलिस उसे कोर्ट में पेश करेगी। कैमिस्टों से चली पांच घंटे पूछताछ बोले नहीं दिए इंजेक्शन - शाहपुरा में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में सीहोर और हमीदिया रोड के मेडिकल स्टोर के संचालक मुफद्दल राजा और भारत फार्म के संचालक आशीष जैन से पुलिस ने लंबी पूछताछ की। दोनों ने आलोक रंजन को इंजेक्शन न देने की बात कही। आलोक रंजन से आमना-सामना भी कराया। वह पुलिस के सामने कहता रहा कि उसे इन दोनों ने पांच इंजेक्शन मिले थे। बता दें कि विशाल हाइट्स अयोध्या नगर में रहने वाला आलोक रंजन एक दवा कंपनी में प्रतिनिधि है।
 उसे पुलिस ने बत दिवस शाहपुरा में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते गिरफ्तार किया था। दो दिन पुलिस रिमांड लेने के बाद उसने सीहोर और हमीदिया के दो दवा विक्रेताओं के नाम लिए थे। इनसे पुलिस ने गत दिवस लंबी पूछताछ की, जिसमें वे इंजेक्शन देने की बात से मुकर गए। जेल गई शालिनी वर्मा - पुलिस ने जेके अस्पताल की नर्स शालिनी वर्मा को कोर्ट में पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया। वह प्रेमी के साथ इंजेक्शन की कालाबाजारी करती थी। मरीजों को पानी के इंजेक्शन लगा दिया करती थी।