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रेडी टू ईट मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना

रेडी टू ईट मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना

जगदलपुर । 01 अप्रैल 2022 से छत्तीसगढ़ में बंद पड़ी रेडी टू ईट मामले में पूर्व मंत्री और भाजपा प्रदेश प्रवक्ता केदार कश्यप ने कहा कि पूरे प्रदेश सहित आदिवासी क्षेत्र बस्तर और सरगुजा संभाग के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और 06 वर्ष से कम आयु वर्ष तक के बच्चों के लिए रेडी टू ईट अतिरिक्त पोषण आहार की शुरुआत पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने किया था।

कांग्रेस की भूपेश सरकार कमीशन खोरी की लालच में छत्तीसगढ़ के 23 लाख कुपोषित बच्चे और ढाई लाख गर्भवती महिलाओं के पोषण आहार पर डाका डालकर निजी कंपनी के ठेकेदारों को मालामाल करने और 16 हजार स्व सहायता समूह कार्यकर्ताओं के हाथों से काम छीनने का कांग्रेस ने किया है।

उन्होनेे कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर प्रदेश की कांग्रेस सरकार 25 लाख रेडी टू ईट अतिरिक्त पोषण आहार हितग्राहियों का हक मारने का काम कर रही है, ज्ञात हो कि प्रदेश में लगभग 33 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 43 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से ग्रसित है।

कोरोना काल में पोषण आहार का समय पर वितरण नहीं होने से संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, रेडी टू ईट पोषण आहार का सुचारू वितरण 50 हजार 311 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से सोलह हजार समूह कार्यकर्ताओं के द्वारा किया जा रहा था, जो कि गर्भवती बच्चों और कुपोषित बच्चों के लिए अति आवश्यक है।

प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार ने कमीशन की लालच में स्व सहायता समूह से वितरण बंद करा कर निजी कंपनी के ठेकेदारों को सौंपना दुर्भाग्यपूर्ण है।

श्री कश्यप ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार मंत्री मौन है और अधिकारी मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं, यह 23 लाख कुपोषित बच्चे और ढाई लाख गर्भवती महिलाओं के साथ अन्याय हैं।

01अप्रैल से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट अतिरिक्त पोषण आहार का मिलना बंद है। प्रदेश सरकार को तत्काल प्रभाव से स्व सहायता समूह के माध्यम से रेडी टू ईट पोषण आहार का वितरण करवा कर व्यवस्था सुचारू करना चाहिए।   

उन्होने कहा कि रेडी टू ईट पोषण आहार का वितरण राज्य सरकार ने बीज विकास निगम के माध्यम से निजी कंपनी को काम देने का फैला लिया है, हाई कोर्ट में 258 महिलाओं द्वारा दायर याचिका में कोर्ट ने सरकार से कहा कि अंतरिम आदेश तक स्व सहायता समूह के माध्यम से वितरण कराने को आदेशित किया है, लेकिन सरकार निजी कंपनी के ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है।