breaking news New

विधानसभा झलकियां : विधायक बृजमोहन अग्रवाल के डिवीजन' से सरकार मुश्किल में..राजस्व मंत्री अपने ही विधायक से घिरे..खादय मंत्री अमरजीत भगत की किरकिरी..

विधानसभा झलकियां : विधायक बृजमोहन अग्रवाल के डिवीजन' से सरकार मुश्किल में..राजस्व मंत्री अपने ही विधायक से घिरे..खादय मंत्री अमरजीत भगत की किरकिरी..

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र का चौथा दिन महत्वपूर्ण रहा. इस दिन पेंशन, राजस्व, कृषि, कोल खनन, उच्च शिक्षा सहित कई मुददों पर प्रश्नकाल चला और विभागीय मंत्रियों ने जवाब दिए. इस दौरान विधानसभा सदस्यों के बीच वाद विवाद, हंसी ठिठौली और कटाक्ष का दौर भी चला. कुछ महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित हुए. विशेषकर चंदूलाल चंद्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय का सरकारी अधिगृहण का प्रस्ताव पास हुआ. आइए जानिए विधानसभा की खास झलकियां :

राजस्व मंत्री अपने ही विधायक से घिरे

बिलासपुर के विधायक शैलेष पाण्डेय ने आज राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को घेर लिया. पाणडे ने बताया कि एक शख्स की जमीन सरकार ने ले ली है. वहां पर स्कूल बन गया है, फिर उससे दान में मांग ली, फिर मैदान बना दिया गया लेकिन उसे 15 साल से मुआवजा नही मिल रहा. इस पर मंत्रीजी ने बच निकलने की कोशिश की तो पाण्डे अड़ गए. अंतत: मंत्री ने घोषणा कि तीन महीने के अंदर मामले को निपटा लेंगे.

खादय मंत्री अमरजीत भगत को विपक्ष ने घेरा

सदन में विपक्ष के हमलों का सामना करने तथा जवाब देने वाले मंत्री अमरजीत भगत आज खाद्य विभाग के प्रश्नकाल में घिर गए. विधायक अजय चंद्राकर ने मुस्कुराते हुए कहा कि दूसरों के मामले में बहुत टांग अड़ाते हो, अब दो जवाब! नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक, विधायक बृजमोहन अग्रवाल, विधायक शिवरतन शर्मा, विधायक पुन्नूलाल मोहिले इत्यादि ने धान खरीदी और बरबादी के मुददे पर भगत को जमकर घेरा. तीनों विधायक इस बात से नाराज हुए कि प्रश्नों का सही जवाब नही आ रहा. यहां तक कि मंत्री अपने सरगुजा जिले के हालात का सही जवाब नही दे सके. इस पर विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी ने कहा कि आप सवाल पूछिए..वे जवाब दे रहे हैं. विधायक अजय चंद्राकर की टिप्पणी थी कि छत्तीसगढ़ को बरबाद करके रख दिया है! इस पर मंत्री शिव डहरिया ने टिप्पणी की कि घड़ियाली आंसू बहाना बंद करिए!

स्पष्ट था कि खादय विभाग के अफसर जवाब सही नही दे पा रहे थे. ना उनके पास तथ्य थे और ना ही आंकड़े. कुल मिलाकर खादय मंत्री भगत की खासी किरकिरी हुई. जानते चलें कि गुजरे विधानसभा में मंत्रीजी ने अफसरों की सार्वजनिक क्लास लेते हुए कहा था कि पूरी तैयारी से आया करिए.

विपक्ष ने डिवीजन' लिया तो सरकार मुश्किल में आ गई!

संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के मामले में विपक्ष, सरकार पर किस कदर भारी है, यह कल की कार्रवाई से पता चला. चंदूलाल चंद्राकर स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय विधेयक पर विपक्ष से विधायक बृृजमोहन अग्रवाल ने मोर्चा संभाला और सरकार को खासा परेशान किया. बृजमोहन ने दो वाजिब संशोधन पेश किए. पहला यह कि यदि अस्पताल का सरकारीकरण हो रहा है तो वहां के सभी कर्मचारियों का शासकीयकरण भी होना चाहिए. इस पर सरकार ने इंकार कर दिया. स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने कहा कि नये सिरे से नियमानुसार नियुक्तियां करेंगे. बृजमोहन का दूसरा संशोधन था कि जिन लोगों ने अस्पताल को ऋण दिया है, उनकी राशि का भुगतान सरकार करे लेकिन सरकार ने इसे भी अमान्य कर दिया.

इसके बाद विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो विपक्ष ने डिवीजन ले लिया जिसे सुनकर सत्तापक्ष सकते में पड़ गया क्योंकि उसके आधे से ज्यादा विधायक सदन से बाहर थे. इसके बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने इस पर मत विभाजन की व्यवस्था देते हुए कहा कि जो लोग संशोधन के पक्ष में है मेरे दाईं ओर आ जाएं और जो संशोधन के विपक्ष में हैं वे मेरे बाएं ओर आ जाएं।

इसके बाद सरकार के मंत्री थोड़ा असहज हो गए। मत विभाजन हुआ तो हुआ तो जल्द ही रिजल्ट भी सामने आ गया प्रस्ताव के पक्ष में यानी विपक्ष के 16 मत पड़े जबकि प्रस्ताव के विपक्ष में यानी सत्ता पक्ष के 56 वोट पड़े यानी कि विपक्ष द्वारा पेश किया गया संशोधन बहुमत से खारिज कर दिया गया।

हालांकि इसके बाद भी सत्ता पक्ष की मुश्किलें कम नहीं हुई। विपक्ष के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह जो मत विभाजन हुआ है, यह एक संशोधन के लिए हुआ है दूसरे संशोधन के लिए  नहीं। यहां पर आसंदी की चूक दिखाई दी. हालांकि तब तक महंतजी ने आकर मोर्चा संभाल लिया था. महंत जी ने विपक्ष को समझाया कि इसे हम ठीक कर लेंगे लेकिन अग्रवाल ने कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन यदि सब कुछ विधि सम्मत होगा तो भविष्य में कोई समस्या नहीं होगी. इसके बाद लगा कि मत विभाजन होगा लेकिन अध्यक्ष के समझाने के बाद विपक्ष ने इस पर सहमति दे दी और ध्वनि मत से संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गया।

इस पूरे मामले में एक स्थिति साफ हो गई कि कांग्रेस के बहुत से विधायक नए हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं का ज्ञान नहीं है जब सदन में कोई विधेयक पेश हुआ हो तब ऐसे में सभी विधायकों को सदन में रहना चाहिए ताकि मत विभाजन की स्थिति आने पर सरकार को परेशानी ना हो लेकिन कई विधायक अपना भाषण रखने के बाद गायब हो गए थे. दूसरी ओर विपक्षी भाजपा के सभी विधायक सीट पर मौजूद थे. यहां तक दो वोट जोगी कांग्रेस के भी मिले. विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने इस पूरे मामले में साबित कर दिया कि संसदीय परंपराओं के ज्ञान के मामले में वे किस कदर विशेषज्ञ हैं।

पेंशनर्स को डीए..

सरकारी पेंशन को लेकर जब चर्चा चल रही थी तो भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम भूपेश बघेल से पूछा कि क्या पेंशनर्स को भी बढ़ा हुआ डीए देंगे, तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि ऐसी कोई योजना नही है.

इसी विषय पर विधायक डॉ.रेणु जोगी ने भी कहा कि शिक्षकों को पेंशन नही दी जा रही है जबकि वे सालों से मांग कर रहे हैं. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नये नियमों के मुताबिक अब शिक्षकों को पेंशन की पात्रता नही है. इस पर रेणु जोगी ने कहा कि जब कई विभागों में पेंशन जारी है तो शिक्षकों को भी मिलना चाहिए. सुश्री जोगी ने कहा कि मेरी खुद की पेंशन 50 हजार है.

किसी विषय पर स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव और मुख्यमंत्री के बीच कानाफूसी चल रही थी तो विपक्ष ने टिप्पणी की कि जो कमरे में बात नही कर सकते, वे यहां दिखावा कर रहे हैं.