breaking news New

बीस सालों से ढाई सौ अधिकारी कर्मचारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे , कार्यवाही के नाम पर हो रहा है खानापूर्ति, अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त

बीस सालों से ढाई सौ अधिकारी कर्मचारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे , कार्यवाही के नाम पर हो रहा है खानापूर्ति, अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त


चमन प्रकाश केयर

रायपुर, 27 मार्च। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा झूठे एवं फर्जी पाए गये जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे ढाई सौ अधिकारी कर्मचारी को विभाग ने चिन्हित किये गये हैं | विभाग से मिली दस्तावेजों की आकंड़ों पर नज़र डाले तो सबसे पहला केस वर्ष 2001 में (1), 2002  (4), 2004 (2), 2005 (10), 2006 (5), 2007 (21), 2008 (8), 2009 (6), 2010 (6), वहीं 2011 से लेकर 2020 तक में 186 यह प्रकरण फर्जी हैं | इनमे डिप्टी कलेक्टर आनंद मसीह, अनुराग लाल, संयुक्त कलेक्टर शंकर लाल डगला और उनके बेटे सुरेश कुमार डगला, संयुक्त आयुक्त भुवाल सिंह, एसडीएम सुनील मैत्री, उपायुक्त सी.एस.कोट्रीवार, ऑडिटर रामाश्रय सिंह , असिस्टेंट सर्जन डॉ. आर.के.सिंह, संयुक्त संचालक क्रिस्टीना सी.एस.लाल, सीईओ राधेश्याम मेहरा, सहित ढाई सौ अधिकारीयों कर्मचारियों की जाति प्रमाण पत्र फर्जी सिद्ध हो चुकी हैं |

वहीं इसके ठीक विपरीत सामान्य प्रशासन के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह के द्वारा 5 दिसम्बर 2020 को जारी परिपत्र कहता हैं कि इन फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासन के उच्च पदों में नौकरी पाने वाले  अधिकारीयों कर्मचारीयों की सेवाएं को तत्काल समाप्त करने के लिए शासन के समस्त विभाग, अध्यक्ष राजस्व मंडल बिलासपुर, समस्त संभागीय आयुक्त, विभागाध्यक्ष, जिलों के कलेक्टर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के नाम समय – समय पर पत्र जारी करते रहे हैं| बावजूद इसके इन दोषी अधिकारीयों कर्मचारीयों को बर्खास्त करने के बजाय संरक्षण देने में लगे हुए हैं |

सामान्य प्रशासन के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व में भी विभाग द्वारा परिपत्र क्रमांक एफ 13–16/2015 आ.प्र./1 –3, 26 अक्टूबर 2019 समसंख्यक परिपत्र 30 नवम्बर 2019 का हवाला देकर निर्देशित किया है कि ऐसे शासकीय सेवकों की सेवाएं तत्काल समाप्त किये जानी हैं | जिनकी जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति द्वारा फर्जी तथा गलत पायें गये हैं | साथ ही जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा झूठे फर्जी पायें जाने पर निरस्त कर दिया गया हैं | उक्त प्रकरण की विभाग के निर्देशों पर क्या कार्यवाही की गई हैं इसकी जानकारी तत्काल आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को कराने के लिए कहा था इस पर भी अधिकारयों द्वारा  उदासीनता बरती जा रही हैं |


वहीं प्रदेश कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वालों को तत्काल बर्खास्त करने की निर्देश दिए हैं | वहीं दूसरी तरफ अब तक शासन स्तर पर बीस साल बीत जाने के बाद भी अब तक दोषी अधिकारीयों कर्मचारीयों पर सिर्फ कार्यवाही और दिखावें के नाम पत्रों का आदान – प्रदान किया जा रहा हैं | इससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि या तो सरकार के आदेश दिखावटी है या सरकार कार्यवाही नहीं करना चाहती |


वहीं जीएडी ने यह भी कहा है कि सेवा समाप्ति करने के पूर्व प्रशासकीय विभाग द्वारा माननीय हाई कोर्ट में कैविएट दायर किया जाए | जिन प्रकरणों में हाई कोर्ट का स्थान प्राप्त हो उनमे जीएडी के निर्देशानुसार विधि विभाग द्वारा समीक्षा की जाएँ और प्रशासकीय विभाग द्वारा स्थगन समाप्त करने की कार्यवाही तत्परता से की जा सके | साथ सभी फर्जी जाति प्रमाण पत्र से सम्बंधित की कार्यवाही को एक साथ सात दिवस के भीतर जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग को उपलब्ध कराने कहा था इस पर क्या कार्यवाही हुई किसी को नही पता |


 गौरतलब हैं कि जाति तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति संगठन फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वालों के खिलाफ़ कार्यवाही करने के लिए कई बार मांग भी किये हैं | इसके  साथ ही विधानसभा में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मुद्दा कई गरमाया लेकिन अब तक किसी भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शासकीय सेवकों पर अब तक कोई कार्यवाही नही हुई हैं | सामान्य प्रशासन विभाग ने विभिन्न विभागों में फर्जी जाति प्रमाण पत्र में नौकरी कर रहे लोगों की  सेवाएं और महत्वपूर्ण पदों से पृथक किये जाने संबधी पत्र जारी किया गया हैं ।