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पेंशनर दिवस पर छत्तीसगढ़ व मप्र राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को 6 राज्यों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सँयुक्त हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन

पेंशनर दिवस पर छत्तीसगढ़ व मप्र राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को 6 राज्यों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सँयुक्त हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन


20 वर्ष से लंबित प्रकरण का निपटारा करने की मांग की 

रायपुर, 17 दिसंबर। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण तिथी 1 नवम्बर 2000 से 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी दोनों राज्य सरकारों के द्वारा आपसी सहमति से पेंशनरी दायित्व का निपटारा नहीं करने और स्टेट बैंक गोविंदपुरा स्थित सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल की स्थापना छत्तीसगढ़ में करने सम्बन्धी प्रकरण पर भी ध्यान नही देने से दोनों राज्य के पेंशनरों को हो रही परेशानी को लेकर अलग अलग 6 राज्यों से भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी एच् सुरेश कासरगोड केरल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा पालमपुर हिमाचल, राष्ट्रीय महामंत्री क्रमशः  बी एस हाडा, कोटा राजस्थान, वीरेन्द्र नामदेव रायपुर छत्तीसगढ़,ए.श्रीनिवासन बंगलुरू कर्नाटक और राष्ट्रीय सचिव डी बी नायर जबलपुर मध्यप्रदेश ने सँयुक्त हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन आज 17 दिसम्बर को पेंशनर दिवस के अवसर पर दोनो राज्य के राज्यपाल श्री मति आनन्दी बेन पटेल,सुश्री अनुसुइया उइके,मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, भुपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा,चरणदास महंत नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ और धरमलाल कौशिक को ई मेल और ट्यूटर दोनो सोशल मिडिया के माध्यम से ज्ञापन भेजकर इसपर ध्यान देकर दोनों राज्यों में मध्यप्रदेश के लगभग 5 लाख और छत्तीसगढ़ के लगभग 1 लाख पेन्सनरो के हित में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के धारा49 को विलोपित कर पेंशनरी(आर्थिक) दायित्वों बंटवारा पर दोनों राज्य विधानसभा में  प्रस्ताव पारित कर दोनो राज्य के पेंशनरों को आपसी सहमति के आर्थिक मजबूरी से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया है।


 भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने अपने ज्ञापन में दोनों राज्य के सभी महानुभावों का ध्यान आकर्षित कर किया है कि विगत 20 वर्षो से लंबित मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 को विलोपित कर पेंशनरी (आर्थिक) दायित्वों का दोनो राज्यों के बीच तत्काल विभाजन किये जाने की तत्काल जरूरत प्रतिपादित करते हुए बताया है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के प्रावधान अनुसार दोनो राज्यों में परिसम्पत्तियों का बंटवारा 74:26 फार्मूला के तहत हुआ है परन्तु अधिनियम के धारा49 के छठवीं अनुसूची के प्रावधानों को विलोपित करने में हुई त्रुटि का खामियाजा दोनो राज्य के पेंशनर और परिवार पेंशनर भुगत रहे हैं। क्योंकि इस नियम के विलोपित नही होने से 74:26 के अनुपात के हिसाब से दोनों राज्यों के सहमति के बिना लगभग 6 लाख से अधिक पेंशनर और परिवार पेंशनरों को(जिसमे मध्यप्रदेश में 5 लाख और छत्तीसगढ़ में 1 लाख से अधिक पेंशनर शामिल है)आर्थिक स्वत्वों का भुगतान नही हो सकता। जैसे यदि 100 रुपये महंगाई राहत का भुगतान होने पर सभी 6 लाख पेंशनर्स को मध्यप्रदेश सरकार 74 रुपए का और छत्तीसगढ़ सरकार 26 रूपये भुगतान करने के लिये बाध्य हैं और इसके लिये दोनों सरकारें अपनी आर्थिक स्थिति का आँकलन कर सहमति देते हैं इसलिये पेंशनर के आर्थिक क्लेम का भुगतान में विलम्ब होता है।


इसी तरह 20 वर्षो से लंबित भारतीय स्टेट बैंक गोविंदपुरा शाखा भोपाल स्थित सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल(CPPC) को पृथक रूप से छत्तीसगढ़ रायपुर में स्थापित कर पेंशन प्रकरणों का निराकरण किया जाने की आवश्यकता है क्योंकि कोष लेखा एवं पेंशन से पेंशन पेमेंट आर्डर जारी होने के बाद सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल नोडल बैंक भोपाल में है, जहाँ दोनो राज्यों के पेंशन प्रकरणों के जांच की व्यवस्था है उनके सहमति पर ही सम्बंधित बैंक पेंशनर को पेंशन राशि का भुगतान प्रबन्ध करता है,इस प्रक्रिया में 6 महीने से भी अधिक समय लगने जानकारी हमारे संज्ञान में है। इसलिए उक्त नोडल बैंक की स्थापना तत्काल रायपुर छत्तीसगढ़ में किया जावे ताकि दोनो ही राज्यों में समय पर  पेंशन मिलने में शीघ्रता के साथ कार्य सम्पादित हो सके। बीते 20 वर्षो के बाद भी आपसी सहमति सम्बन्धी आर्थिक निर्भरता को समाप्त करने के लिये विधानसभा में चर्चा हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की मांग ज्ञापन में की गई हैं।