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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से -मैं गया वक्त नहीं हूं कि फिर आ भी न सकूं

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से  -मैं गया वक्त नहीं हूं कि फिर आ भी न सकूं

-सुभाष मिश्र

एक बार धोखा खाने के बाद कहीं हम अपने अदृश्य शत्रु से दूसरी बार तो धोखा नहीं खाने वाले हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर कहा जा रहा है कि दूसरी लहर जून 2021 तक चली जायेगी। जिस कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान से हुई या नहीं, इसकी जांच अभी तक अमेरिका जैसा देश नहीं कर पाया है, क्या वो वायरस इतनी जल्दी हमारे बीच से चला जायेगा?

मिर्जा गालिब का एक मशहूर शेर है-

मेहरबां हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक्त
मैं गया वक्त नहीं हूं कि फिर आ भी न सकूं।

अब्दुल हमीद अदम का एक मौजूं शेर है-

शायद मुझे निकाल के पछता रहे हों आप
महफिल में इस खयाल से फिर आ गया हूं मैं।

दरअसल कोरोना संक्रमण के प्रति बरती जा रही लापरवाही का ही ये नतीजा है कि हमने अब तक चार लाख लोगों को खो दिया और कई करोड़ लोग इससे संक्रमित होकर अब बहुत सी बीमारियों, तकलीफों से जूझ रहे हंै। कोरोना वायरस को लेकर हमारा रवैया हमारी सरकार की ही तरह बहुत गैर जिम्मेदाराना है। हम पहले लापरवाह होते हंै फिर हाय तौबा मचाते हैं। चीन की ही तरह कुछ लोगों के लिए कोरोना फायदे का सौदा है। जब पूरी दुनिया की इकानॉमी नीचे जा रही है, चीन की जीडीपी बढ़ रही है। जिस तरह अकाल सूखा बहुत सारे अफसरों, इंजीनियरों, पंचायत प्रतिनिधियों, व्यापारियों और नेताओं के लिए फायदेमंद होता है, वैसे ही कुछ लोगों ने कोरोना महामारी को आपदा में अवसर की तरह मानकर अनाप-शनाप मुनाफा कमाया।

यदि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली जैसे जगहों पर अप्रैल, मई की तुलना से कोरोना के केस कम मिल रहे हैं, अस्पतालों से बिस्तर की, आक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की उतनी मारामार नहीं है तो इसका कतई मतलब यह नहीं है कि कोरोना की दूसरी लहर विदा हो गई है। अपनी उपलब्धियां गिनाने के चक्कर में हम बहुत बार वो नाकामियों को नहीं देख पाते जिससेसबक लेकर हमें आगे की रणनीति बनानी चाहिए। महाराष्ट्र, कर्नाटक में आज ही बीस हजार से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं। महाराष्ट्र में 443 लोगों की मौत हुई है तो कर्नाटक में 492 लोग मरे हैं। असम में दो विधायक कोरोना संक्रमण से मरे हैं। असम के 370 चाय बागान कोरोना की चपेट में हैं। अभी यहां 3500 ऐक्टिव केस मिले हैं। कोरोना संक्रमण की जांच प्रक्रिया अभी भी गांव तक नहीं पहुंची। दूसरी लहर में सर्वाधिक गांव प्रभावित है, जहां से वास्तविक आंकड़े और तस्वीरें आना बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक 60 से 70 प्रतिशत आबादी में इम्युनिटी नहीं आ जाती तब तक हम इसे हर्ड इम्युनिटी नहीं कह सकते। हमारे देश की 140 करोड़ आबादी में से अभी केवल 21.20 करोड़ आबादी को ही टीके लगे हंै उसमें भी दूसरी डोज पाकर इम्युनिटी डेव्हलप करने वालों की संख्या 4 करोड़ से कुछ अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर अपने कार्यक्रम मन की बात के जरिए बताया है कि सौ सालों में कोरोना सबसे बड़ी महामारी है। हमें इस सबसे बड़ी महामारी से निपटने जून महीने में मात्र 12 करोड़ टीके और मिलेंगे। हमारी टीकाकरण की रफ्तार बता रही है कि इधर कुंआ है उधर खाई है हमें बहुत सतर्क रहना है वरना कोरोना जो हमारा शत्रु है कभी भी हमलावर होकर हमें नुकसान पहुंचा सकता है।

छत्तीसगढ़ जहां कोरोना की पहली लहर कोई खास असर नहीं दिखा पाई थी, दूसरी लहर में सर्वाधिक प्रभावित होकर 12 हजार से अधिक लोगों की जान गंवा चुका है। कभी जरूर यहां 4500 से कम केस आ रहे हो, अस्पतालों, कोविड सेंटर के बेड खाली पड़े हों किन्तु खतरा टला नहीं है। अभी भी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस बहुतों को जकड़े हुए है। जिस तरह सड़कों पर जगह-जगह लिखा होता है कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। वैसा ही कुछ कोरोनासंक्रमण का मामला है। आज की तारीख में देश में 21 लाख 14 हजार कोरोना के एक्टिव केस हैं। एक दिन में अभी भई एक लाख 65 हजार नये एक्टिव केस पाये जा रहे हैं। ये लापरवाह होने का नहीं सतर्कता से रहने का समय है।

वैक्सीनेशन का कार्यक्रम जिस गति से चल रहा है उससे फिलहाल तो हम सुरक्षित नही हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि वैक्सीन तभी असर करती है जब उसके दोनों डोज़ लग जाते हैं। अभी 4.44 करोड़ को ही वैक्सीन की दूसरी डोज लगी है।
भारत में कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीनेशन की शुरुआत 16 जनवरी से हुई थी। पहले स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन दी गई उसके बाद वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर बीमारियों वाले 45 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए इसे खोला गया। अब 45 साल से ज़्यादा उम्र का कोई भी व्यक्ति वैक्सीन लगवा सकता है लेकिन पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन नहीं होने के कारण एक बड़ी आबादी इससे वंचित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे देश को महामारी की विकट स्थिति में लाने वाली कोरोना की दूसरी लहर के जाने के लिए अभी जुलाई तक का इंतजार करना पड़ सकता है। विज्ञान एवं तकनीकी विभाग की ओर से बनाए 3 सदस्यीय पैनल ने केंद्र सरकार को बताया है कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का असर इस साल जुलाई में कम होना शुरू होगा, तो वहीं तीसरी लहर भी अगले छह से आठ महीने के अंदर देश में दस्तक दे सकती है। ब्लैक फंगस भी महामारी का रूप ले रही है। तीसरी लहर की प्रतिक्षा बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के करते हुए हम खुले बाजारों की भीड़ में कितने दिनों तक बिना टीका लगाये इम्युनिटी बनाये रखेंगे।