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केवल महामाया, वह भी अधूरा..., बारीक धान, दलहन और तिलहन की नहीं हुई नीलामी

केवल महामाया, वह भी अधूरा..., बारीक धान, दलहन और तिलहन की नहीं हुई नीलामी

भाटापारा, 24 मई।  कोरोना। संक्रमण का खतरा। लॉकडाउन। 42 दिन की तालाबंदी के बाद 43 वें दिन, सुबह 6 बजे कृषि उपज मंडी का ताला खुला। रिकॉर्ड 15000 कट्टा कृषि उपज की आवक के बीच उम्मीदें ,उस वक्त एक झटके में जमीन पर आ गई ,जब मात्र 5000 कट्टे की ही नीलामी की अनुमति मिली। संकट, तब और फैलाव लेता नजर आया, जब केवल महामाया धान की ही नीलामी का फैसला किसानों ने सुना।

अदूरदर्शी फैसला ही माना जा रहा है ,कृषि उपज मंडी  के संचालन में  ताजा निर्णय। 42 दिन बाद खुली कृषि उपज मंडी में पहले दिन ना तो बारीक धान की नीलामी हुई ना दलहन- तिलहन की। ना किसानों के हाथ में पैसे आए क्योंकि इन कृषि उपज की नीलामी को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई । दोपहर तक, सवाल- दर-सवाल उठते रहे लेकिन जवाब देने वालों ने जिस तरह दूरी बनाई, उससे केवल यही बात सामने आ रही है कि प्रबंधन का काम संभाल रहे,  क्या, जिम्मेदारों के पास, व्यवस्था का अनुभव नहीं है?


केवल महामाया ,वह भी अधूरा

रबी फसल की कटाई और मिसाई अंतिम दौर में है। खरीफ सीजन सिर पर है। लिहाजा तैयारी के लिए पैसे चाहिए ,इसलिए बड़ी मात्रा में कृषि उपज पहुंची लेकिन केवल महामाया की ही होगी, नीलामी, वह भी मात्र 5000 कट्टा की। इस फैसले ने निराश कर दिया। बारीक धान की नीलामी कब होगी? जैसे सवाल के जवाब अनुत्तरित रहे।

दलहन-तिलहन नहीं

खरीफ की तैयारियों में लगे दलहन- तिलहन किसानों की उपज की बिक्री को लेकर भी जिस तरह फैसला लिया गया, उससे किसान हतप्रभ है। कारण पूछने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिले। इसलिए यह उपज  खुले प्रांगण में रखवा दी गई। कब होगी नीलामी, का जवाब देने वाला कोई नहीं।

दिखाई लापरवाही

कोविड-19 के नियमों के पालन को लेकर भी गंभीरता दिखाई नहीं दी। कामकाज के पहले ना तो सैनिटाइजेशन किया गया ना मास्क जरूरी समझा गया। रही बात सोशल डिस्टेंस की ,तो यह हर जगह तार-तार होता नजर आया। यानी मंडी प्रशासन लॉकडाउन के बाद कड़ी शर्तों के पालन को लेकर भी गंभीरता  नहीं दिखाई।

एसडीएम इंदिरा देवहारी ने कहा कि महामाया के अलावा अन्य कृषि उपज की नीलामी क्यों नहीं हुई? इसकी जानकारी ली जाएगी। कोविड-19 के गाइडलाइन का पालन अनिवार्य है।