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कोरोना काल में आंदोलन कतई उचित नहीं, आंदोलनकारियों पर कार्रवाई के लिए प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन ने सीएम को लिखा खुला पत्र

कोरोना काल में आंदोलन कतई उचित नहीं, आंदोलनकारियों पर कार्रवाई के लिए प्राथमिक शिक्षक फेडरेशन ने सीएम को लिखा खुला पत्र

रायपुर।  देश प्रदेश और सारे विश्व मे वैश्विक महामारी कोरोना काफी व्यापक रूप में फैला हुआ है। लोग महामारी से अकाल काल के गाल में समा जा रहे है, लोगो की बेवजह मौते हो रही है, घर परिवार बिखर जा रहा है। ऐसी विषम परिस्थिति में अपने प्राणों की रक्षा करना बहुत ही आवश्यक है। महामारी को देखते हुए सरकार ने इस वर्ष स्कूल भी नहीं खोला है।

         सरकार का स्पष्ट गाइड लाइन है कि कंही भी भीड़ नहीं बढ़ाना है, दो गज की दूरी का पालन करना है, मास्क व हैंड सेनेटाइजर का उपयोग करना है। बीमारी से बचाव व लोगो की जान की सुरक्षा के लिए सरकार ने ऐसे प्रत्येक कार्यक्रम में प्रतिबंध लगा दिया है जंहा भीड़ रहती है।

        राज्य सरकार ने कोरोना काल मे स्कूल बंद होने के बाद भी सभी शिक्षकों को प्रत्येक माह बराबर वेतन दिया है, इसके बाद भी प्रदेश में विभिन्न जिलों एवँ ब्लाकों के कुछ तथाकथित शिक्षक नेताओ द्वारा शिक्षकों की वेतन बढ़ाने, क्रमोन्नती एवँ वेतन विसंगति दूर करने आदि मांगों को लेकर आगामी 28 अक्टूबर को राजधानी रायपुर जैसे अतिसंवेदनशील शहर में बूढ़ातालाब से लेकर मुख्यमंत्री निवास तक मौन रैली का आह्वान कर, राज्य के आम, भोलेभाले एवँ सीधे-साधे शिक्षकों को उकसाया व भड़काया जा रहा है।

          इस सम्बंध में खबर लगातार दैनिक अखबारों में प्रकाशित की जा रही है। व्हाट्सएप, फेशबुक एवँ ट्वीटर सहित सोसल मीडिया में उक्त कार्यक्रमों का लगातार प्रचार-प्रासार किया जा रहा है।

         तथाकथित शिक्षक नेताओ के उक्त कृत्यों से प्रदेशभर के सभी जिलों एवँ ब्लाकों के अंतर्गत सभी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों में राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश फैल रहा है जिससे आगामी 28 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में बड़ी भयंकर भीड़ जुटने की संभावना है।

          यदि राजधानी में अभी शिक्षकों की भयंकर भीड़ जुटी तो न सिर्फ कोरोना फैलने की संभावना बढ़ेगी बल्कि धोखे से एक भी कोरोना पीड़ित शिक्षक या व्यक्ति यंहा आया तो पूरे राज्य में फिर से कोरोना का भयावह रूप दिखेगा।

  वर्तमान में कोरोना काल के दौरान राजधानी में किसी भी प्रकार के हड़ताल की परमिशन सरकार न दे।

  राज्य के सभी जिलों एवँ ब्लाकों में ऐसे हड़तालियों की पहचान कर इन पर महामारी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्यवाई किया जाय। ऐसे लोगो को गैरजमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार कर तत्काल जेल भेजा जाए।

  ऐसे लोगो को चिन्हांकित कर इनकी सेवा विभाग से समाप्ति की जाय एवँ इनके पदों को रिक्त घोषित कर इनके जगह खाली पदों पर नई नियुक्तियां की जाए।

  राज्य के सभी 29 डीईओ एवँ 146 बीईओ से ऐसे लोगो की लिस्ट मंगाई जाए जो 28 अक्टूबर को हड़ताल व अवकाश में रहते है, इन पर सख्त कार्यवाई की जाए।

   राज्य सरकार के खिलाफ माहौल बनाने वाले ऐसे शिक्षकों को बर्खास्त कर इसे विधानसभा में पारित कर दी जाए, ऐसे लोगो को दोबारा सेवा में बहाल नहीं करने हेतु विधानसभा में विशेष कानून बनाया जाए।

    ऐसे लोगो की सेवा समाप्ति कर इनके विरुद्ध निम्न बिंदुओं पर विभागीय जांच संस्थित की जाए :-


1) ये कब स्कूल आते जाते है...?

2) इनके प्रथम नियुक्ति तिथि से अक्टूबर 2020 तक इनकी शिक्षक डायरी की जांच की जाय।

3)  इनके द्वारा लिए गए अवकाश के आवेदन पत्रों की जांच की जाय, कब कब कौन कौन से अवकाश लिए, कितने अवकाश स्वीकृत हुए, कितने अवकाश विभाग को भेजे गए...? विभाग को भेजे गए अवकाश से पाठकांन में दर्ज अवकाश का मिलान किया जाए।

4) क्या इनके अध्ययन अध्यापन से स्कूल गांव के ग्रामीण संतुष्ट है, ग्रामीणों का पंचनामा लिया जाय।

5) इनके द्वारा विगत 5 वर्षों में पढ़ाए गए बच्चों के पढ़ाई स्तर का पता लगाया जाए।

6) ये शिक्षक कितने समय तक शाला में रहते है, क्या क्या विषय पढ़ाते है...?

7) इनके द्वारा कब कब आंदोलनों में शामिल हुए, किस अवकाश व अनुमति से आंदोलनों में सम्मिलित हुए...?

8) ये कब से कब तक संस्था प्रमुख रहे... इनके संस्था प्रमुख रहने की अवधि का आय व्यय एवँ बिल व्हाउचर का लेखा परीक्षण पुनः किया जाए।

9) इनके द्वारा विभाग से अब तक कितना वेतन, एरियर्स आदि लिया गया।

10) इनके नियुक्ति के समय के समस्त दस्तावेजो का पुनः जांच एवँ परीक्षण किया जाए।

  अतः राज्य में सत्ता सरकार के समस्त 69 माननीय विधायक महोदय गणों एवँ समस्त जनप्रतिनिधियों से निवेदन है कि अभी कोरोना काल जैसे विपरीत परिस्थितियों में भी आंदोलन कर प्रदेश का माहौल खराब करने वाले तथाकथित शिक्षक नेताओ को प्रदेशभर में चिन्हांकित कर इन सभी पर सख्त कानूनी कार्यवाई करने की महान कृपा करेंगे।