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बिजली बकायादारों की संपत्ति कुर्क : बड़े डिफॉल्टरों पर कब होगी कार्रवाई ?

बिजली बकायादारों की संपत्ति कुर्क : बड़े डिफॉल्टरों पर कब होगी कार्रवाई ?


डॉ. चन्दर सोनाने

मध्यप्रदेश के ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव ने पिछले दिनों प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए कि 25 हजार से ज्यादा राशि वाले बकायादारों के नाम सार्वजनिक किए जाएँ , उन्हें नोटिस जारी करें और फिर भी बकाया राशि जमा नहीं करें तो उनकी चल अचल संपत्ति को कुर्क करें । अपने मुखिया के निर्देशानुसार उज्जैन जिले में बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर बकायादारों के नाम सार्वजनिक किए, और उनकी चल अचल संपत्ति के रूप में दो पहिया और चार पहिया वाहन , ट्रैक्टर , वेल्डिंग मशीन , जेसीबी , डंपर , जनरेटर , मकान , फैक्ट्रियाँ आदि जप्त कर कुर्क कर ली गई । यही नहीं , बिजली कंपनी ने उज्जैन जिले की 665 पंचायतों के 890 बड़े बकायादारों के नामों की सूची सार्वजनिक करने के लिए गाँव में सूची  चस्पा भी कर दी । इसी कारण बकायादारों ने लोकलाज से बचने के लिए धड़ाधड़ अपनी बकाया राशि जमा कर दी और बिजली कंपनी ने अपना वित्तीय वर्ष 2020 - 21 का लक्ष्य 83 करोड़ रुपए वसूल अपना लक्ष्य भी कर लिया।

अब यहाँ प्रश्न यह है कि जब बिजली कंपनी अपनी बकाया राशि को प्राप्त करने के लिए उक्त सख्त उपाय कर बकायादारों से अपनी बकाया राशि प्राप्त कर सकती है , तो बैंको ने जो लाखों करोड़ों रुपये बड़े उद्योगपतियों को दिए हैं , उनसे अपनी राशि क्यों नहीं प्राप्त कर सकती है ? हाल ही में 3700 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला प्रकाश में आया है । इस घोटाले में 30 से ज्यादा बैंक शामिल पाए गए हैं । सीबीआई ने 11 राज्यों में 100 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे हैं । इसमें यह पाया गया कि बैंकों के अधिकारियों की मिलीभगत से अनेक बड़ी  कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से 3700 करोड़ रुपये का लोन ले लिया , बकाया राशि जमा नहीं की और फिर उन कंपनियों के खाते एनपीए भी कर दिए गए ।

 यही नहीं , बैंकों के बड़े बकायादार सत्ता के नेताओं की मिलीभगत से लाखों करोड़ों रुपये की लोन राशि को राइटऑफ भी करा लेते हैं । इसका ताजा उदाहरण आपको बताते हैं । पिछले दिनों केंद्र के वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोक सभा में बताया कि गत तीन साल में बैंकों ने 5.85 लाख करोड़ रुपये का बैड लोन राइटआफ किया है । वर्ष 2018-19 में 2.36 लाख करोड़ रुपये , वर्ष 2019-20 में 2.34 लाख करोड़ रुपये और वर्ष 2020-21 में तीन तिमाही में 1.15 लाख करोड़ रुपये की बैंक लोन की राशि राइटआफ की गई है । वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही की राशि की जानकारी मिलाने से यह राशि और भी बढ़ने की संभावना है । मिल बांट कर खाने का इससे अच्छा उदाहरण देखने को नहीं मिलेगा ! यहाँ विचारणीय प्रश्न यह है कि बिजली कंपनी की तरह ही सख्त उपाय कर इन बड़े बकायादारों से वसूली नहीं हो सकती थी क्या ? वसूली तो दूर लगभग सभी बड़े बकायादार देश छोड़कर विदेश भाग गए ! वहाँ भी वे ऐश की ही जिंदगी जी रहे हैं । और अभी तक देश के कर्ता धर्ता उन विलफुल डिफाल्टरों के विरुद्ध ठोस  रूप में कुछ भी नहीं कर पाये हैं । यह कितनी दुखद , आश्चर्य और शर्मनाक बात है ।

बैंकों के बड़े विलफुल डिफॉल्टरों की एक और असली कहानी आपको बताते हैं । पुणे के एक आरटीआई कार्यकर्ता विवेक वलंकर को सूचना के अधिकार कानून के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने जानकारी दी कि देशभर में 1913 विलफुल डिफॉल्टर हैं। इनसे जून 2020 तक 1.46 लाख करोड़ रुपये बैंकों को लेना बकाया है। इनमें से 264 बड़े बकायादार हैं । इनसे 1.08 लाख करोड़ रुपये लेना बकाया है। यानी ये ऐसे बड़े डिफॉल्टर हैं , जिनमें से प्रत्येक पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है। इन्हीं में से  207 ऐसे बकायादार हैं , जिन पर 100 करोड़ से  500 करोड़ रुपये की राशि बकाया है । इनमें से 34 ऐसे बकायादार हैं , जिन पर बैंकों का बकाया 500 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये हैं। इनमें से भी 23 तो ऐसे हैं जिन पर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया है। है ना मजेदार जानकारी । किन्तु इससे भी मजेदार बात यह है कि बैंक न तो इनके नाम सार्वजनिक करती है ! न इनकी चल अचल संपत्ति कुर्क करती है! बस केवल नोटिस देकर अपनी जिम्मरदारी से बरी हो जाती है! इसका भी बड़ा कारण है । किसी भी बड़ी कंपनी को लोन देने के पहले उनके सारे कागजात जांचने की जिम्मेदार भी बैंकों की ही होती है। और जब फर्जी कागजात और दस्तावेज होंगे तथा बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत नहीं होगी तो ऐसी फर्जी कंपनियों को बैंकों से लोन मिल ही नहीं सकता !

तो अब क्या किया जाए ? ऐसा ही कब तक चलेगा? या ऐसा ही चलने दिया जाना चाहिए? सरकारी बैंकों में जमा आम आदमी की कड़ी कमाई से प्राप्त पैसों को बड़े बकायादार क्या ऐसे ही उड़ाते रहेंगे ? लाखों करोड़ों रुपये की राशि हजम करने वालों से क्या कभी वसूली नहीं हो पाएगी ? किसी विद्वान ने कहा है असंभव कुछ भी नहीं है। यदि एक बार यह तय कर लिया जाएगा कि अब बहुत हुआ। अब और नहीं । तो कुछ भी हो सकता है । हम सबके सामने बिजली कंपनी का उत्कृष्ट उदाहरण है । इससे भी सीखा जा सकता है। और भी अनेक उपाय अपनाए जा सकते हैं । बिजली विभाग का केवल एक उदाहरण ही अभी आपको बताया गया है । उपायों की कोई कमी नहीं है, किंतु इन सबसे पहले केंद्र में बैठी सरकार को दृढ़ संकल्प लेने की जरूरत है । एक बार यदि कड़े कदम उठाने का निर्णय कर लिया जाए और यह भी तय कर लिया जाए कि फर्जी दस्तावेजों के नाम से लोन देने वाले बैंकों के अधिकारियों को भी नहीं छोड़ा जाएगा। और इसमें लिप्त किसी भी बड़े से बड़े व्यक्ति , जो किसी भी बड़े पद पर बैठे हों , उनके विरुद्ध भी सख्त कार्यवाही होगी ही , तो असंभव लगने वाला यह काम भी संभव हो सकेगा । किन्तु क्या केंद्र सरकार ऐसा ही कुछ कर पायेगी ? क्या यह हो सकेगा ?