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सीमेंट नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग की बिल्डर्स एसोसिएशन ने

सीमेंट नियामक प्राधिकरण बनाने की मांग की बिल्डर्स एसोसिएशन ने

नई दिल्ली, 9 नवंबर। निर्माण उद्योग संगठन बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (बीएआई) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीमेंट उद्योग में मुनाफ़ाखोरी और गुटबाज़ी रोकने के लिए सीमेंट नियामक प्राधिकरण के गठन की मांग की है।

बीएआई के अध्यक्ष मू. मोहन ने‌ साेमवार को यहां कहा कि इस तरह के नियामक के गठन से सीमेंट उद्योग में अनैतिक ढंग से हो रहे व्यापार के चलन की रोकथाम में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अवैध और अनैतिक तरीक़े से हो रहे इस व्यापारिक चलन से देश के आर्थिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और इससे आम आदमी के हितों के साथ-साथ निर्माण उद्योग के हितों को भी भारी नुकसान हो रहा है।

बीएआई ने यह पत्र पांच नवंबर को प्रधानमंत्री को लिखा और इसकी प्रति आज यहां जारी की गयी। उल्लेखनीय है कि बीएआई ने यह मांग विभिन्न तरह की संवैधानिक संस्थाओं, समितियों की सिफारिशों और संसद तथा संसदीय समितियों को भेजे गये प्रपत्रों के आधार पर की है।

पत्र में बीएआई ने लिखा है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयाेग ने तथ्यात्मक तौर पर पाया है कि सीमेंट उद्यमियों ने आपस में ही गुट बना लिया है, जिसके ज़रिये सीमेंट की बिक्री की दरों को आसानी‌ से प्रभावित और नियंत्रित किया जाता है। इसे देखते हुए आयोग ने 10 सीमेंट उद्यमियों और सीमेंट मैन्युफ़ैक्चरिंग एसोसिएशन पर 6,307.32 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पत्र में कार्मिक मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति के अवलोकन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। फरवरी, 2011 को राज्यसभा में पेश की गयी 'परफॉर्मेंस ऑफ़ सीमेंट इंडस्ट्री' शीर्षक वाली 95 वीं रिपोर्ट में सीमेंट उद्योग के‌ लिए नियामक प्राधिकरण की अनुशंसा की गयी थी। अनुशंसा में कहा गया था कि सीमेंट के दामों को नियमित करने और बाज़ार पर आधिपत्य स्थापित करने, क्षमता से कम इस्तेमाल तथा कृत्रिम रूप से सीमेंट की कमी पैदा करने की प्रवृत्तिओं पर रोक लगाने के लिए सरकार को संवैधानिक तौर पर नियामक प्राधिकरण का गठन करना चाहिए।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि सीमेंट उत्पादक जानबूझकर सीमेंट उत्पादन की मौजूदा क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं जिससे बाज़ार में कृत्रिम तौर पर सीमेंट की कमी पैदा हो रही है और इसके दामों को नियंत्रित किया जा रहा है।