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जिला शिक्षा अधिकारीके खिलाफ कार्यवाही करने हाथ खड़े किए उच्च अधिकारी, गरीब बच्चों का क्या होगा किसी के पास नहीं है जवाब

जिला शिक्षा अधिकारीके खिलाफ कार्यवाही करने हाथ खड़े किए उच्च अधिकारी, गरीब बच्चों का क्या होगा किसी के पास नहीं है जवाब

राजनांदगांव। पीड़ित पालक बुधवार को डिप्टी कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग करने लगे तो डिप्टी कलेक्टर ने पीड़ित पालकों को स्पष्ट कह दिया कि हम राज्य सरकार को पत्र भेज देगें, क्योंकि डीईओ के खिलाफ कार्यवाही राज्य सरकार से होगी। जिले में कार्यवाही संभव नहीं है, लेकिन गरीब बच्चों को किस स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा, इसका जवाब शायद डिप्टी कलेक्टर के पास नहीं था।
गरीब पीड़ित पालक विगत एक साल से अपने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिलाने भटक रहे है, क्योंकि ग्रीन फिल्ड सीआईटी स्कूल को जिला शिक्षा अधिकारी ने बंद करा दिया, लेकिन इन स्कूलों में प्रवेशित गरीब बच्चों को किसी भी अन्य स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाया गया और इस वर्ष जब दबाव बना तो आनन-फानन में ऐसे सुविधाहीन सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाने का झूठा दावा किया गया, जहां ना पर्याप्त कमरे है और ना पर्याप्त शिक्षक है।
शासकीय अंग्रेजी माध्यम बालक प्राथमिक शाला, क्रमांक-6, गंजपारा, राजनांदगांव ने स्वयं विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखकर दे दिया है कि उनके स्कूल में ग्रीन फिल्ड के बच्चों के लिए ना तो पर्याप्त कमरे है और ना ही पर्याप्त शिक्षक है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी टीएल में कलेक्टर को गलत जानकारी दे रहे है कि उनके द्वारा ग्रीन फिल्ड के 61 बच्चों को शासकीय अंग्रेजी माध्यम बालक प्राथमिक शाला, क्रमांक-6, गंजपारा, राजनांदगांव के कक्षा पहली से लेकर कक्षा पांचवी प्रवेश दिला दिया गया।
लखोली निवासी पीड़ित पालक दीपक साहू का कहना है उनकी पुत्री को शासकीय अंग्रेजी माध्यम बालक प्राथमिक शाला, क्रमांक-6, गंजपारा, राजनांदगांव के कक्षा पांचवी में प्रवेश दिलाने की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा कलेक्टर को टीएल में दिया गया, जबकि इस स्कूल में कक्षा पांचवी अंग्रेजी माध्यम में संचालित ही नहीं हो रहा है।
वहीं तिलक साहू लखोली निवासी का कहना है उनके पुत्र को शासकीय अंग्रेजी माध्यम बालक प्राथमिक शाला, क्रमांक-6, गंजपारा, राजनांदगांव के कक्षा पहली प्रवेश दिलाने की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिया गया है, लेकिन स्कूल कह रहा है उनके पास पर्याप्त कमरे और शिक्षक नही है। मुझे स्कूल द्वारा यह जानकारी दिया गया है कि इस स्कूल में कुल 168 दर्ज संख्या है और शिक्षक सिर्फ दो ही है।
अब सवाल यह उठता है गरीब बच्चे जिन्हे शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत ग्रीन फिल्ड सीआईटी स्कूल में प्रवेश दिलाया गया था अब इन बच्चों को जिस सुविधाहीन सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाने का झूठा दावा किया जा रहा है, वहां ना तो कक्षा है, ना कमरा और ना शिक्षक, तो फिर इन गरीब बच्चों का इस साल भी ना तो स्कूल नसीब होगा और ना शिक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों के पास इसका शायद कोई ठोस जवाब भी नहीं है।