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फेदेरिको फेलिनी के सौ वर्ष

फेदेरिको फेलिनी के सौ वर्ष

अजित राय

42 वें काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह की एक उपलब्धि है कि उसने इटली के महान फिल्मकार फेदेरिको फेलिनी ( 20 जनवरी 1920- 31 अगस्त 1993 ) के जन्म के सौ साल पूरे होने पर उन्हें याद किया। फेलिनी को न सिर्फ बारह बार आस्कर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया, वल्कि उन्होंने विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में  चार बार यह अवार्ड जीता भी। इतना ही नहीं , विश्व सिनेमा के उन कुछ लोगों को आस्कर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड ( 1992)  दिया गया, उनमें फेदेरिको फेलिनी सबसे महत्वपूर्ण फिल्मकार माने जाते हैं।

काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में फेदेरिको फेलिनी की चार सबसे महत्वपूर्ण फिल्में दिखाई गई और कान क्लासिक खंड से अनसेल्मा डेल ओलियो की विलक्षण डाक्यूमेंट्री ' फेलिनी आफ द स्पिरिट्स' भी दिखाई गई।  फेलिनी की ' नाइट्स आफ कैबिरिया ' ( 1957), ' ला डोल्चे विता', ( 1960), ' ऐट एंड हाफ  ' ( 1963), और ' जुलिएट आफ द स्पिरिट्स' (1967) विश्व सिनेमा में महान फिल्में मानी जाती है जिसे काहिरा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में दोबारा देखना और उनपर चर्चा करना एक अविस्मरणीय अनुभव है। ' नाइट्स आफ कैबिरिया' वहीं फिल्म है जिसने आस्कर अवार्ड की दौड़ में भारत की फिल्म ' मदर इंडिया ' को पछाड़ दिया था।


मशहूर फिल्म ला डोल्चे विता का पोस्टर

अपने सिनेमाई दर्शन के कारण फेदेरिको फेलिनी दूसरे यूरोपीय फिल्मकारों से अलग भारत और अरब दुनिया के काफी करीब माने जाते हैं। अध्यात्म और मेटा फिजिक्स में उनकी गहरी पैठ उन्हें कैथोलिक चर्च का विरोधी बना देती है। दक्षिणपंथी और वामपंथी दोनों उनका विरोध करते हैं। दक्षिणपंथी इसलिए कि वे कैथोलिक चर्च के पोंगापंथ का मजाक उड़ाते हैं और उनकी धार्मिक कट्टरता का विरोध करते हैं। वामपंथी इसलिए कि वे अपनी फिल्मों में मजदूर वर्ग की वजाय आम आदमी की निजी स्वतंत्रता के हिमायती हैं।  स्मृति, स्वप्न, सेक्स, फंतासी और इच्छाओं की चौहद्दी में उनकी फिल्में  जीवन की सार्थकता ढूंढने की कोशिश करती है। वे अपने समय के महान मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग से अति प्रभावित थे। यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं है कि फेदेरिको फेलिनी अपने समय के अधिसंख्य इतालवी फिल्मकारों की तरह वामपंथी नहीं थे, और न ही दक्षिणपंथी। उन्होंने अपना एक अलग ही रास्ता चुना। आज दुनिया भर में उनसे प्रभावित फिल्मकारों की बड़ी जमात है, जिनमें टिम बर्टन, टेरी गिलियन, डेविड लिंच सहित सैकड़ों नाम गिनाए जा सकते हैं। हाल ही में पाउलो सोरेंतिनो ने आस्कर अवार्ड ( 2014 ) से सम्मानित अपनी फिल्म ' द ग्रेट ब्यूटी ' को अपने गुरु फेदेरिको फेलिनी को ही समर्पित किया है।


ला डोल्चे विता फिल्म का एक दृश्य

इटली की सरकार ने रिमीनी शहर के एयरपोर्ट का नाम फेदेरिको फेलिनी के नाम पर रखा है जहां उनका जन्म हुआ था और जहां उनकी कब्र है। यह भी एक रिकॉर्ड है कि उनकी मृत्यु पर अंतिम यात्रा में करीब सत्तर हजार लोग शामिल हुए थे।

जब फेलिनी की विश्व प्रसिद्ध फिल्म ' ला डोल्चे वित्ता ' प्रदर्शित हुई तो बाक्स आफिस का रिकार्ड टूट गया। ईसाई धर्म के मुख्यालय वेटिकन सिटी ने इस फिल्म का विरोध किया और इसपर प्रतिबंध की मांग की। फिर भी फेलिनी विचलित नहीं हुए। आज उनकी फिल्में विश्व धरोहर है। उन्हें भारतीय और अरब दर्शन में यकीन था कि इस भौतिक दुनिया से परे भी एक दुनिया है।  उनके जन्म के सौ साल पर उनकी फिल्मों को बार बार देखा जाना चाहिए।