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मुस्लिम धर्मगुरुओं ने तोड़ा आजादी के पहले से चली आ रही परंपरा को

 मुस्लिम धर्मगुरुओं ने तोड़ा आजादी के पहले से चली आ रही परंपरा को

लखनऊ।  मुस्लिम धर्मगुरुओं ने योगी सरकार के आदेश पर आजादी के पहले से चली आ रही परंपरा को तोड़ा है।   मुस्लिम धर्मगुरुओं ने जनता से अपने नजदीकी मस्जिदों में नमाज पढ़ने की अपील की है. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने ऐलान कर अपने कौम के लोगों से कहा है कि वे सड़कों पर जुमा और अलविदा की नमाज न पढ़ें। 

अलविदा की नमाज जामा मस्जिद के अंदर ही होगी और ईद की नमाज ईदगाह के अंदर ही होगी. जुमे की नमाज पढ़ने  कई लाख लोग नमाज अदा करते थे. लोग कई किलोमीटर तक शहर में सड़कों पर मकानों की छतों पर और दुकानों में नामा पढ़ते थे.

बता दें कि रामपुर में जुम्मा तुल विदा की नमाज ऐतिहासिक हुआ करती थी. आजादी के  पहले से चल रही परंपरा के अनुसार रामपुर के जिले भर से लोग शहर की जामा मस्जिद आते थे और जुमे की नमाज पढ़ते थे।  जिसमें  इस परंपरा में कभी भी कोई हिंदू मुस्लिम विवाद नहीं हुआ, बल्कि जामा मस्जिद के निकट सराफा बाजार में हिंदू समाज के लोग भी अपनी दुकानों में मुस्लिमों के नमाज पढ़ने की खास व्यवस्था किया करते थे, लेकिन योगी सरकार के आदेश के बाद शासन और मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच हुई वार्ता में तय हुआ के इस बार सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी.

जामा मस्जिद के इमाम मोहम्मद अब्दुल वहाब खान ने बताया, मैं यहां पर इमाम हूं, ऐसा था कि हमारे यहां रामपुर के अंदर अरसेदराज से अलविदा और ईद की नमाज सड़कों के ऊपर होती आई है यह पुरानी रिवायत है. क्योंकि अब मौजूदा हालात आपके इल्म में है तो उसको देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है कि अब अलविदा और ईद की नमाज सड़कों पर नहीं होगी.

 उन्होंने कहा, इस सिलसिले में हमारी जामा मस्जिद इंतजाम या कमेटी की मुलाकात भी हुई है. उन्होंने कहा, हम शहर के और तमाम जिले के जितने भी अपने मुसलमान भाई हैं सब से ये अपील करते हैं कि वह अपनी अपनी मस्जिद के अंदर ही नमाज का एहतमाम करें. 

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है और लगातार यह प्रसारित किया गया है कि सड़क पर बैठकर किसी भी प्रकार की जो धार्मिक गतिविधि है उसको अंजाम ना दिया जाए. 

नमाज को  लेकर विभिन्न धर्मगुरु और सभी संप्रदायों के लोगों से हमारी लगातार चर्चा होती रही है और पिछले दिनों हमने भी और कप्तान साहब ने बैठक भी की थी. पूरे प्रदेश में गृह विभाग से आदेश आए थे कि सभी धर्मगुरु को और सभी को सूचित किया जाए कि सड़कों पर किसी दशा में कोई धार्मिक परफॉर्मेंस ना की जाए.