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व्यंग्य: बिजली का बिल : एक पटकथा

व्यंग्य: बिजली का बिल : एक पटकथा


- अखतर अली

लेखक ने फ़िल्म निर्माता से कहा – अपनी नई फ़िल्म का नाम होगा बिजली का बिल |

निर्माता ने आश्चर्य से कहा – बिजली का बिल ?

उसकी आंखो में बहुत बड़ा प्रश्नवाचक चिन्ह था |

लेखक ने कहा – सुपर डुपर हिट फ़िल्म बनेगी | शीर्षक में ही गज़ब का करंट है , भयंकर झनझनाहट है |

निर्माता बोला – पटकथा कहां है ?

लेखक ने कहा – एक बिजली का बिल लेकर उसे पढ़िए तो सही | आप खुद कहेगे यह तो एक मुकम्मल पटकथा है | क्या नहीं है इसमें , सस्पेंस , कामेडी , एक्शन , करुणा | बिजली के बिल के रूप में आपके घर हर माह एक पटकथा पहुच रही है पर आपने कभी उसे पढ़ा ही नहीं |

निर्माता ने कहा – मेरे को विस्तार से समझाओ |

लेखक ने कहा - बिल अनेक प्रकार के होते है जैसे सामान का बिल , कमीशन का बिल , लेबर का बिल , संसद में पास कराया जाने वाला बिल , सांप का बिल , चूहे का बिल | बिल का दिल से गहरा रिश्ता है , जो पहली मुलाक़ात में दिल देता है फिर वह हर मुलाक़ात में बिल देता है | बिल किसी का सगा नहीं होता इसलिए बिल गेट्स भी पत्नी के नहीं हुए | इन सब बिलों के उपर एक बिल होता है जिसे बिलों का सरदार भी कह सकते है | दर दर बिल घर घर बिल , बिलों का बिल बिजली का बिल |

निर्माता ने कहा – बिजली के बिल में रहस्य क्या है ?

लेखक बताता है – नौकरी की तलाश में निकला बेरोज़गार हीरो जब शाम को घर पहुचता है तो उसकी मां कहती है बेटा बिजली का बिल आ गया है | यह सुने ही हीरो के चेहरे का रंग उड़ जाता है | वह कांपते हाथो से बिल पकड़ता है और डरते डरते बिल देखता है | जैसे ही उसकी नज़र सब से नीचे शुद्ध देयक राशि पर जाती है तो उसके मुंह से दर्द भरी चीख निकलती है “नहीं” | यहीं से फ़िल्म का टाईटल चालू हो जायेगा | यहां पर बैगराउंड गीत भी डाला जा सकता है | हीरो पता करना चाहता है कि कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ ?

कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ , यही वह रहस्य है जिसका हीरो को पर्दाफ़ाश करना है |

निर्माता पूछता है – करुणा कहां है ?

लेखक बताता है – अंधी मां जब पूछती है कि इस माह का बिल कितने का है तो राशि सुनते ही उसे हार्ट अटैक आ जाता है और वह हीरो की बाहों में दम तोड़ देती है | तब हीरो मां की कसम खाकर कहता है कि जब तक वह बिजली विभाग के एक एक अधिकारी का फ्यूज़ नहीं उड़ा देगा तब तक न अपने घर की लाईट जलायेगा न उनके घर की जलने देगा |

अब हीरो के जीवन का एक ही मकसद है यह जानना कि कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ ? वह बिजली विभाग के दफ़्तर जाता है वहां एक पूछ ताछ विभाग मिलता है | वह दिन भर यही पूछताछ करता रहता है कि पूछताछ वाले साहब कहां है , कब आयेगे , आयेगे भी या नहीं ? तब उस विभाग का पुराना वायर बताता है कि अभी इस जगह में किसी की नियुक्ति नहीं हुई है | जब किसी की नियुक्ति हो जायेगी तब आना उस वक्त जो पूछोगे बता दिया जायेगा | यानि विभाग ने उसे स्वीकार भी नहीं और ठुकराया भी नहीं |

हीरो पूछता है जो पहले यहां पदस्थ थे वो साहब कहां है ?

बिजली विभाग का कट आउट एक चपरासी बताता है कि उन साहब ने आत्महत्या कर ली | क्योकि रोज़ उनसे सैकड़ो लोग एक ही सवाल करते थे हमारा बिल हर महीने सात सौ आठ सौ रूपये का आता था इस महीने सात हज़ार कैसे आ गया ? एक सा सवाल और एक सा जवाब देते देते वो उकता गए थे इसलिये परेशान होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली |

निर्माता बीच में टोकते हुए बोला – भाई फ़िल्म शुरू हुए आधा घंटा हो गया हिरोइन को कब लाओगे ?

लेखक बोला – जब अपना हीरो बिजली विभाग के दफ़्तर से बाहर निकल रहा था उसी समय बिजली का बिल हाथ में पकड़े नायिका अंदर आती है दोनों दरवाज़े पर टकरा जाते है | दोनों के तन बदन में ज़बरदस्त स्पार्किंग होती है और दिल में आग लग जाती है | पता चलता है दोनों की एक ही समस्या है बिजली का बिल | दोनों यही जानना चाहते है कि कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ ?

दोनों एक ही मंज़िल के राही है सो साथ साथ चलते है | रोज़ बिजली आफ़िस की केंटिन में नाश्ता करते है , वापसी में अचानक बारिश हो जाती है तो साथ साथ भीगते है और गाना गाते है “बिल पुकारे आरे आरे आरे “ |


अब दोनों बिल की जांच पड़ताल शुरू करते है | बिल में छपा है वर्तमान वाचन लेकिन कितना  है वह स्पष्ट नहीं है | फिर लिखा है पूर्व वाचन लेकिन कितना है वह स्पष्ट नहीं है | उसके नीचे लिखा है खपत लेकिन खपत कितनी है वह स्पष्ट नहीं लिखा है | प्रति यूनिट मूल्य ऐसा लिखा है कि नाक , कान , होठ और पूरे के पूरे बत्तीस दांत को भी आंख कर ले तो भी पढ़ न सके | अब उनके एक हाथ में बिल और एक हाथ में केलकूलेटर है लेकिन संख्या नदारत है | यहां गणित का कोई सूत्र काम नहीं कर सकता | यह वैसे ही है कि शब्द तो है लेकिन विचार नहीं है तो लेखन नहीं किया जा सकता | तभी इनके मन में आया कि किसी मेडिकल स्टोर वाले से पढ़वाते है क्योकि जिस लिखे को कोई नहीं पढ़ सकता उसको मेडिकल स्टोर वाले पढ़ लेते है |

अब यहां मेडिकल स्टोर का दृश्य फिल्माया जाएगा |

दोनों मेडिकल स्टोर जाते है वहां हीरो को उसके कालेज का दोस्त और फ़िल्म का कामेडियन मिलता है जो मेडिकल स्टोर में दवा लेने आया है | उसके दोनों हाथ में पट्टियां बंधी है और वह दर्द से कराह रहा है | वह बताता है कि उसको करेंट मार दिया है क्योकि उसने नंगे हाथो से बिजली का बिल पकड़ लिया था | यह सुनकर मेडिकल स्टोर वाला बिजली का बिल हाथ में लेने से इनकार कर लेता है और उन्हें समझाता है कि बिजली का बिल , किराना का बिल , कुछ व्यंग्य रचनाये और पुस्तक समीक्षा बिना मास्क पहने कभी नहीं पढ़ना चाहिए ये स्वास्थ के लिए हानिकारक होती है |

उर्जा प्रभार , विद्दुत शुल्क , मीटर किराया , पावर फैक्टर अधिभार , सुरक्षा निधि ये सब इस कहानी के चरित्र अभिनेता है | मीटर रीडिंग करने वाला कर्मचारी इस कहानी में खलनायक है | इसने गलत सलत रीडिंग लिख कर कई परिवार को बर्बाद कर दिया है | नायक को पूरी फ़िल्म में इसी की तलाश करनी होगी और उसे ढूंढ कर पूछना होगा कि बता कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ ?

बिजली का बिल अपने आप में एक प्रकार की भूल भुलय्या है | इसमें बिल क्रमांक में उपभोक्ता क्रमांक , उपभोक्ता के नाम में बिल का माह , सुरक्षा निधि में मीटर क्रमांक लिखा होता है | बिजली के बिल में इस प्रकार के बहुत से चौकाने वाले मसाले मौजूद होते है | इस पटकथा पर एक ज़बरदस्त हारर फ़िल्म भी बन सकती है |


इस भाग दौड़ में बहुत से रोचक तत्व सामने आयेगे | एक आदमी रोज़ विद्दुत विभाग के दफ़्तर इसीलिए आता है क्योकि उसे यह रहस्य जानना है कि जिस दिन उसके घर मेहमान आते है उसी दिन लाईट क्यों गुल होती है ? एक छात्र इसी खोज में लगा है कि बिजली की बारिश के साथ ऐसी क्या दुश्मनी है बारिश के आते ही बिजली चली जाती है | बादल जवान की तरह धडधडाते हुए आते है और बिजली बुढ़ापे की तरह धीरे से चली जाती है | एक उपभोक्ता को वहां का अधिकारी समझा रहा था कि इस बार आप जितना भी बिल है पटा दीजिये अगले माह के बिल में राशि एडजस्ट हो जायेगी और वह आदमी कह रहा था मेरे घर बिजली का कनेक्शन ही नहीं है , लालटेन में जीवन गुज़र रहा है और आपके विभाग ने मेरे को बिल दे दिया | वहां जा जा कर ही उनको पता चला कि रौशनी के इस कारोबार में बहुत अंधेर है |

निर्माता ने बोला – भाई कहानी सपाट चल रही है इसमें कोई यूटर्न लाओ |

लेखक ने कहा – ये रहा कहानी का यूटर्न , औसत बिल | लूट का आधुनिक हथियार , बिन आवाज़ की बंदूक | इस औसत बिल का कोई तोड़ नहीं है | औसत बिल से झूठा और कोई बिल नहीं होता |

निर्माता को शंका हुई – इसमें कुछ अतिरेक है पब्लिक स्वीकार करेगी ?

लेखक ने विश्वास दिलाया कि यहां विचारों की कोई कद्र नहीं बस प्रस्तुतिकरण बढ़िया होना चाहिए | जब फ़िल्म का पोस्टर और ट्रेलर रीलिज़ हो जायेगे तब देखना रातो रात यूट्यूब पर सब से ज़्यादा सर्च किये जाने वाला विषय बिजली का बिल ही होगा | प्यार – धोखा , कनेक्शन और फ्यूज़ की कहानी में कामेडी का तड़का जब सिनेमा घरो में पहुचेगा तो धूम मच जायेगी और आपका बैंक बैलेंस उतना हो जायेगा जितना आप का मोबाईल नम्बर है | मिमिक्री आर्टिस्ट इसी फ़िल्म के संवाद सुना सुना कर रोटी रोज़ी चलायेगे , बच्चे बच्चे की ज़ुबान पर यही डायलाग रहेगा - कितने में कितना जोड़े जो इतना हुआ ?

निर्माता को सेंसर बोर्ड का डर सता रहा था कि कही उसने कुछ तथ्यों को अस्वीकार किया तो ?

लेखक ने कहा – वह सारी बात अपन ही अंत में स्वीकार कर फ़िल्म का सुखद अंत कर देगे | लेकिन इस फ़िल्म में नही |

निर्माता – तो भाई मेरे किस फ़िल्म में ?

लेखक – बिजली का बिल 2 में |