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सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में जवान को किया गया रिहा

सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में जवान को किया गया रिहा


 बीजापुर। मुठभेड़ के बाद किडनैप किए सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राकेश्वर मनहास को नक्सलियों ने रिहा कर दिया है। जानकारी के मुताबिक पुऔती के इलाके के आसपास जवानों को सैंकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में सीआरपीएफ के जवान को रिहा किया गया है। रिहा किए गए जवान को सीआरपीएफ के डीआईजी को सौंपा गया। रिहाई की खबर मिलते ही उनके परिवारवालों में जश्न का माहौल हो गया। उन्हें हेलीकॉप्टर से रायपुर लाया जाएगा।
 बता दें कि रूखमणी सेवा संस्थान के प्रमुख पद्मश्री धर्मपाल सैनी की उपस्थिति में निशर्त नक्सलियों ने जवान को रिहा किया। नक्सलियों ने जवान बिना नुकसान पहुंचाए छोड़ा है। मध्यस्थता में पद्मश्री धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया समेत सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में नक्सलियों ने जवान को रिहा किया गया है। रिहाई के बाद मध्यस्थता करने गई टीम जवान को लेकर बासागुड़ा लौटी। जवान की रिहाई के लिए मध्यस्थता कराने गई दो सदस्यीय टीम के साथ बस्तर के 7 पत्रकारों की टीम भी मौजूद थी। नक्सलियों के बुलावे पर जवान को रिहा कराने बस्तर के बीहड़ में वार्ता दल समेत कुल 11 सदस्यीय टीम पहुंची थी।
 बता दें कि 3 अप्रैल को बीजापुर के तर्रेम में हुए नक्सली मुठभेड़ के बाद से ही सीआरपीएफ के जवान राकेश्वर सिंह मनहास का कोई पता नहीं था। राकेश्वर सिंह के कब्जे में होने की बात नक्सलियों ने कबूली थी। नक्सिलियों ने  तस्वीर भी जारी की थी। इस हमले में 22 जवान शहीद हो गए थे।



 मध्यस्थता के लिए गई थी ये टीम
सरकार की तरफ से गठित दो सदस्यीय मध्यस्थता टीम के सदस्य पद्मश्री धर्मपाल सैनी, गोंडवाना समाज के अध्यक्ष तेलम बोरैया समेत सैकड़ो ग्रामीणों की मौजूदगी में नक्सलियों ने जवान को रिहा किया है। जवान की रिहाई के लिए मध्यस्थता कराने गई दो सदस्यीय टीम के साथ बस्तर के 7 पत्रकारों की टीम भी मौजूद थी। नक्सलियों के बुलावे पर जवान को रिहा कराने बस्तर के बीहड़ में वार्ता दल समेत कुल 11 सदस्यीय टीम पहुंची थी।

पत्नी-बेटी ने की थी अपील
जवान राकेश्वर की पत्नी और बेटी ने भी नक्सलियों से उन्हें सुरक्षित छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने अपील की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह पाकिस्तान से अभिनंदन को छुड़ाया था, उसी तरह उनके पति को भी नक्सलियों के कब्जे से छुड़ाकर लाएं।
 
नक्सलियों ने जारी की थी तस्वीर
इससे पहले नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी कर सरकार से पहले निर्दिष्ट रूप से मध्यवर्तियों के नाम की घोषणा करने को कहा था। उसके बाद बंदी पुलिस जवान को छोड़ने की बात कही थी। नक्सलियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक जवान जनताना सरकार की सुरक्षा में सुरक्षित रहेगा। उसे किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। बुधवार को नक्सलियों ने जवान की तस्वीर भी जारी की थी।

14 हथियार, 2 हजार से अधिक कारतूस भी लूटा
नक्सलियों ने शहीद जवानों के प्रति खेद प्रकट किया था. मुठभेड़ के बाद नक्सलियों ने जवानों से 14 हथियार, 2 हजार से अधिक कारतूस, मोबाइल समेत अन्य सामान लूट लिया था।

मुठभेड़ में 22 जवानों की हुई शहादत
बता दें कि बीजापुर जिले के टेकुलगुडम में शनिवार को हुए पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 22 जवानों की शहादत हुई है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच साढ़े चार घंटे तक मुठभेड़ चली। 30 घायल जवानों को अस्पताल पहुंचाया गया है, जिनमें 13 का इलाज रायपुर और 18 का बीजापुर में चल रहा है।