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ब्रेकिंग : वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल खरीद सकेंगे वीडियोकान कंपनी..नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने दी अनुमति..3000 करोड़ लगाई कीमत..बैंकों के डूबेंगे 43 हजार करोड़!

ब्रेकिंग : वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल खरीद सकेंगे वीडियोकान कंपनी..नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने दी अनुमति..3000 करोड़ लगाई कीमत..बैंकों के डूबेंगे 43 हजार करोड़!

मुंबई. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने आज वेदांता कंपनी के मालिक अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाली ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिग्रहण योजना को मंजूरी दे दी.

ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज ने वीडियोकॉन की लगभग ₹62,000 करोड़ की वित्तीय देनदारियों के खिलाफ 2,962 करोड़ का भुगतान करने की पेशकश की है. वीडियोकान कंपनी पर चढ़े कुल कर्ज में से 50% कर्ज के रूप में तथा बाकी वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लिमिटेड (वीओवीएल) के लिए गारंटी के रूप में होगा.

वीडियोकान को खरीदने के एवज में ट्विन स्टार लगभग ₹3,000 करोड़ का भुगतान करेगा, इसके अलावा वीडियोकॉन के पास अन्य ₹500 करोड़ नकद बैंकों के पड़े हैं इसके लिए ट्विन स्टार द्वारा कंपनी के अधिग्रहण के बाद ऋणदाताओं को वीडियोकॉन में 599 करोड़ रुपये की इक्विटी भी मिलेगी.

समाधान योजना में वीडियोकॉन समूह की सभी 13 कंपनियां शामिल हैं. वीडियोकॉन ऑयल, ट्रेंड इलेक्ट्रॉनिक्स और केआईएल के समाधान की प्रक्रिया चल रही है और बैंक तीनों कंपनियों से अलग-अलग बकाया वसूल करेंगे. भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 17 सदस्यीय ऋणदाताओं के संघ में बैंक ऑफ इंडिया, निर्यात-आयात (एक्ज़िम) बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया भी शामिल हैं जिन्हें कंपनी से 43000 करोड़ से ज्यादा की रकम लेनी है.

जानते चलें कि एयर-कंडीशनर और वाशिंग मशीन निर्माता कंपनी वीडियोकॉन 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के बाद दिवालिया होने वाली पहली 12 कंपनियों में से एक थी. उस वर्ष दिसंबर में, भारतीय स्टेट बैंक ने वीडियोकॉन के खिलाफ दिवाला याचिका दायर की थी. वीडियोकॉन ग्रुप की 15 कंपनियों के खिलाफ अलग से दिवालियेपन की कार्यवाही भी शुरू की गई थी. ट्रिब्यूनल ने वीडियोकॉन ग्रुप की दो संस्थाओं-केआईएल लिमिटेड और ट्रेंड इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड-को समेकन के दायरे से बाहर रखा था.

कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने एक टिवट में बताया कि वीडियोकान कंपनी 46000 करोड़ के कर्जे में डूबी है जबकि वह 3000 करोड़ में बिक रही है. इसका मतलब है कि बैंको को 43000 करोड़ रूपये गंवाने पड़ेंगे. बैंक्रप्सी कानून के तहत ऐसे सनसनीख़ेज़ सौदे धड़ल्ले से हो रहे हैं। ये नए भारत में नए अंदाज़ के घोटाले हैं।