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किराये लाइसेंस और अधिकारीयों की सांठगांठ से जमकर हो दवाई दुकानों का कारोबार

किराये लाइसेंस और अधिकारीयों की सांठगांठ से जमकर हो दवाई दुकानों का कारोबार


चमन प्रकाश केयर

रायपुर | राजधानी में दवाई दुकानों के लाइसेंस के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। जिसमें लाइसेंस धारी का नाम और पता मंदिर हसौद का और दवाई दुकान का संचालन कहीं कोई और कर रहा हैं | ऐसा ही ताज़ा मामला अमलीडीह के वार्ड नम्बर 53 का है, जहाँ पर राज मेडिकल नाम से अधिकारियों की सांठगांठ से दुकान फल फुल रहा हैं | दवाई दुकान का लाइसेंस मंदिर हसौद निवासी राज चंद्राकर पिता सूर्य प्रकाश चंद्राकर के नाम पर ड्रग विभाग से जारी हुई हैं, और मेडिकल दुकान अमलीडीह के देवपुरी रोड पर मोहित चंद्राकर द्वारा धडल्ले से संचालित किया जा रह हैं |

इसकी जब पड़ताल करने ग्राहक बनकर उक्त दुकान में गये उस वक्त ताला लटका हुआ था लेकिन उनके बाजू के बुटिक शॉप में कुछ और दवाई लेने आये ग्राहक दुकान खुलने के इतंजार कर रहे थे | इतने में दवाई दुकान संचालक की पत्नि ने अपने पति मोहित चंद्राकर को फोन कर बताई कि दवाई लेने ग्राहक दुकान आये है जल्दी आईये | इसके बाद उनका पति राज मेडिकल का संचालक मोहित चंद्राकर आये और अपनी पत्नी से दवाई दुकान की चावी लेकर खोलने ही वाले थे कि उनको हमारी गाडी में लिखे प्रेस पर नज़र पडते ही सहम गया और झूठ बोलते हुए कहने लगा सर मेडिकल कुछ दिनों से बंद हैं | जबकि वहां पर रह रहे लोगों ने बताया कि प्रतिदिन मेडिकल खुल रहा हैं | इसका प्रमाण भी हमारे द्वारा किये गये स्टिंग ऑपरेशन में भी राज मेडिकल का संचालक मोहित चंद्राकर दवाई देते साफ नज़र आ रहे हैं | इसके बाद जब हमने उक्त स्टिंग का वीडियों और राज चंद्राकर के नाम से जारी लाइसेंस को दिखाने पर उनकी पत्नि के दुकान को आनन- फानन में बंद कर भाग खड़े हो गये |

किराये लाइसेंस कारोबार

दवाई दुकान सञ्चालन के लिए फार्मेसी की डिग्री और फार्मासिस्ट का होना अनिवार्य है पर दुकानों में ऐसा नहीं हो रहा। अधिकतर दुकान संचालको ने किराये पर फार्मेसी होल्डर का लाइसेंस किराये पर ले रखा है जिसके बदले में लाइसेंस होल्डर को प्रति महीना या सालाना भुगतान किया जाता है। वही लाइसेंस नियमों का उल्लंघन कर न तो बिल दी जाती हैना हीं बेचीं गई दवाई का हिसाब रखा जा रहा। वही दुकान संचालक थोक दवाई दुकानों का लाइसेंस लेकर रिटेल में कारोबार कर रहे है। ऐसा इसलिए हो रहा ताकि फार्मासिस्ट का खर्चा बचाया जा सके।

 

लाइसेंस दिलाने एजेंट सक्रीय

दवा लाइसेंस दिलाने संगठित गिरोह काम कर रहा है जो चंद पैसे लेकर किसी भी नाम से लाइसेंस जारी कर रहे है। जिसमे विभागीय अधिकारियो की संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता। गिरोह बड़े पैमाने पर राजधानीमंदिर हसौदआरंगदुर्गभिलाई में लाइसेंस जारी कर दवाई दुकानों का संचालन कर रहे है और जानकारी होने के बाद भी अधिकारी कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे । राजधानी में ही एक व्यक्ति के नाम पर दो दर्जन से अधिक दवाई दुकाने संचालित हो रही है।

 


होगी कार्यवाही 

शहर में संचालित हो रही ऐसी शिकायत मुझे मिली है। ड्रग निरीक्षक से रिपोर्ट मंगाकर आगे की कार्यवही की जाएगी

हिरेन पटेल , जिला खाद्य औषधी नियंत्र