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Breaking : आइएएस हरि कृष्ण द्विवेदी बने बंगाल के मुख्य सचिव..ममता के सलाहकार बने अलापन की लेंगे जगह..मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वसनीय अफसर माने जाते हैं

Breaking : आइएएस हरि कृष्ण द्विवेदी बने बंगाल के मुख्य सचिव..ममता के सलाहकार बने अलापन की लेंगे जगह..मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वसनीय अफसर माने जाते हैं

रायपुर. 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हरिकृष्ण द्विवेदी पश्चिम बंगाल सरकार के नए मुख्य बनाए गए हैं. वे हाल ही में रिटायर हुए मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय की जगह लेंगे. श्री द्विवेदी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विश्वसनीय अफसर माने जाते हैं.

जानते चलें कि सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से टकराव के बीच अपने मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को रिटायरमेंट देते हुए उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बनाया है तथा उनकी जगह पर ममता बनर्जी ने 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हरिकृष्ण द्विवेदी को मुख्य सचिव बना दिया है। अब तक द्विवेदी बंगाल के होम सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे।

बंगाल सरकार के गृह विभाग के सचिव रहे द्विवेदी 1988 बैच के बंगाल काडर के ही आईएएस अधिकारी हैं। उनके पास राज्य के संसदीय विभाग, योजना और सांख्यिकी भी थे। राज्य में अहम पदों पर काम के साथ ही ममता बनर्जी के साथ भी उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव है। इससे पहले वह बंगाल के वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनकी जगह पर बीपी गोपालिका को राज्य का होम सेक्रेटरी बनाया गया है।

2012 के बाद से ही हरिकृष्ण द्विवेदी पश्चिम बंगाल के विद्युत निगम के सदस्य हैं। इस तरह से देखें तो बंगाल की नौकरशाही के लिए हरिकृष्ण द्विवेदी कोई नया नाम नहीं हैं। लंबे अरसे से वह राज्य में होम सेक्रेटरी से लेकर कई अहम पदों पर रहे हैं। नए मुख्य सचिव बने हरिकृष्ण द्विवेदी के पास भी नौकरशाही का लंबा अनुभव है। अलापन बंद्योपाध्याय 1987 बैच के अधिकारी थे, जबकि द्विवेदी 1988 बैच के हैं। यही नहीं दोनों ही पश्चिम बंगाल काडर के अधिकारी रहे हैं।  

दरअसल बंगाल सरकार के अनुरोध पर केंद्र ने अलापन के कार्यकाल को तीन महीने के लिए बढ़ाने की मंजूरी 24 मई को दी थी। इसके बाद 28 मई को उनका दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन अलापन ने रिटायरमेंट का ही फैसला लिया, जिसकी तारीख 31 मई थी। 60 साल की उम्र होने के चलते अलापन सोमवार को ही रिटायर होने वाले थे, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से उनके तीन महीने के कार्यकाल विस्तार को मंजूरी मिल गई थी। विवाद उस वक्त बढ़ा, जब केंद्र सरकार ने 28 मई को उनका ट्रांसफर दिल्ली कर दिया। इस पर ममता बनर्जी ने ऐतराज जताया और उन्हें रिलीव करने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद अलापन ने एक्सटेंशन न लेते हुए सोमवार को ही रिटायरमेंट ले लिया।