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अफसरों की मिलीभगत से शासन को करोड़ों का चूना लगने का अंदेशा

अफसरों की मिलीभगत से शासन को करोड़ों का चूना लगने का अंदेशा
0 नाले के इस पार नाले के उस पार का खेल,
0 हाईकोर्ट में 308 दिन की देरी से की हुई अपील को ख़ारिज किया,
0 कुर्की के आदेश की सुनवाई टली

जनधारा समाचार
रायुपर। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा रीजनल सांई सेंटर के लिए भू-अर्जन के एक मामले में अफसरों की मिलीभगत और लापरवाही के चलते शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगने जा रहा है। इस मामले में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ शासन की ओर से प्रस्तुत याचिका 30 जून 21 को निरस्त कर अवार्ड राशि की वसूली के लिए कुर्की वारंट जारी करने का उल्लेख किया है। इसे लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, प्रमुख सचिव, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, भू-अर्जन एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं प्रकरण प्रभारी अधिकारी के पास की गई है। यह पूरा मामला सड्ढू नाले के इस पार और उस पार की जमीन के रेट को लेकर है।

जनधारा को प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (छ.ग. रीजनल साईंस सेंटर) के परियोजना संचालक डॉ. शिरीष कुमार सिंह ने कलेक्टर रायपुर को अपने पत्र क्रमांक 385 दिनांक 27/9/2021 के माध्यम से सूचित किया है कि भूअर्जन के प्रकरण क्रमांक 11/2011 में पक्षकार इंद्रप्रस्थ इकोपार्क प्रायवेट लिमिटेड के डायरेक्टर नरेंद्र कुमार पारख द्वारा लगाई गई याचिका के निष्पादन में 23 सितंबर 2021 की तिथि न्यायालय द्वारा नियत की गई थी। इस संबंध में उच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका क्रमांक एफएएम ए2/2020 दिनांक 30 जून 2021 को निरस्त कर अवार्ड राशि की वसूली के लिए कुर्की जारी की जा सकती है। प्रकरण में शासकीय अभिभाषक/लोक अभियोजना द्वारा तीन दिनों के भीतर कार्यवाही के संबंध में वस्तुस्थिति से अवगत कराकर अवार्ड राशि के भुगतान की कार्यवाही हेतु लेख किया गया है। प्रकरण की सुनवाई 4 अक्टूबर 2021 को हुई। न्यायालय ने फिलहाल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को अगली पेशी दी है।
इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ रीजनल साईंस सेंटर के परियोजना संचालक डॉ. शिरीष कुमार सिंह ने कलेक्टर रायपुर को 27 सितम्बर 2021 में पत्र लिखकर मामले से अवगत कराते हुए निराकरण कराने आग्रह किया है। उक्त पत्र में भूअर्जन प्रकरण क्रमांक 11/2011 विवेक कुमार वर्मा चतुर्थ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रायपुर द्वारा जारी नोटिस दिनांक 28.5.2018 में इंद्रप्रस्थ इकोपार्क प्रायवेट लिमिटेड के डायरेक्टर नरेंद्र कुमार पारख द्वारा डिक्री के निष्पादन के लिए 18 जनवरी 2019 का अवलोकन करने सहित कई बिन्दुओं को लेकर कलेक्टर को अवगत कराया गया है।

यदि हम इस पूरे मामले को तथ्यों के साथ समझें तो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (साइंस सेंटर) छ.ग. शासन  के लिए अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे के लिए चतुर्थ अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने 29 नवम्बर 2018 को अवार्ड पारित किया गया है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की अनुशंसा की गई है। इस  सम्बन्ध में रायपुर अपर कलेक्टर ने 25 मार्च 2019 को सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र जारी कर कहा था कि अधिग्रहित भूमि के मुआवजा राशि रुपए 6832/- प्रति वर्गमीटर (अवार्ड की कंडिका-21) निर्धारित की गई है। वह पूर्णत: त्रुटिपूर्ण है क्योंकि आवेदक को यह स्पष्ट प्रमाणित करना था कि उसकी भूमि सड्डू नाला और वालंटियर रेलवे लाईन के मध्य स्थित है। वास्तविकता यह है कि जिस विकास हेतु भूमि अधिग्रहित की गई है वह सड्ढू नाला के पूर्व स्थित है। वहीं उक्त भूमि में साइंस सेंटर के लिए पहुँच मार्ग है। उक्त भूमि को अधिग्रहित की गई है, इसके बाद सड्ढू नाला और सड्ढू नाला के बाद वालंटियर लाईन जो लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित है। इस दृष्टिकोण से अवार्ड की कंडिका-21 में दिये गये निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण होने से इसे चुनौती दिया जा सकता है।  वहीं पत्र में यह भी कहा गया है कि माननीय विचारण न्यायालय द्वारा गाईड लाईन के आधार पर जो मुआवजा राशि का निर्धारण किया गया है, वह पूर्णत: त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष है। खरीदी बिक्री हेतु गाईड लाईन के अनुसार किया जाना अनुचित है। प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायपुर को प्रभारी अधिकारी एवं महानिदेशक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को सामंजस्य के लिए निर्देशित करते हुए प्रकरण में उच्च न्यायलय में अपील प्रस्तुत करने के लिए अनुमति मांगी गई थी।