लॉकडाउन से लोगों बढ़ी मुसीबत अर्थी को कन्धा देने भी कोई नहीं, महिलाएं श्मशान जाने को विवश

लॉकडाउन से लोगों बढ़ी  मुसीबत अर्थी को कन्धा देने भी कोई नहीं, महिलाएं श्मशान जाने को विवश


नईदिल्ली।  देश में 21 दिन के लिए लॉकडाउन से लोगों को तरह-तरह की समस्याएं हो रही हैं।  सबसे बड़ी मुसीबत उन परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके घर किसी की मौत हो गई हो  उनके घर में  अर्थी को कंधा देने वाले भी नहीं मिल रहे।  ऐसे में कहीं घर की औरतों को श्मशान जाकर खुद मुखाग्नि देनी पड़ रही है, तो कहीं महिलाएं खुद अपने घर से शव लेकर श्मशान जाने को विवश हैं। 

लखनऊ में भी ऐसी ही एक घटना सामने आई है, जहां मनोज उप्रेती नाम के एक व्यक्ति की मौत के बाद बेटियों के भी नहीं पहुंच पाने के कारण दूर के रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने रस्में निभाईं।  लॉकडाउन के दौरान दो बेटियों की मां दीप्ति उप्रेती को पहले बीमार पति को अस्पताल ले जाने का कोई साधन नहीं मिला।  जब वह पति को वक्त पर अस्पताल नहीं ले जा पाई तो पति की सांसें उखड़ गईं। 

फार्मा कंपनी में बड़े पद पर काम कर चुके मनोज उप्रेती की मौत के बाद परिवार का कोई सदस्य कंधा देने नहीं पहुंच सका तो पड़ोसियों और दूर के रिश्तेदारों ने बड़ी मुश्किल से इन रस्मों को निभाया।  मौत के कई दिन गुजर चुके हैं, लेकिन दोनों बेटियां और दामाद नहीं आ पाए।  एक बेटी फ्रांस, तो दूसरी अमेरिका में है।  घर में अकेली मां. दूर के कुछ रिश्तेदार जैसे-तैसे अंत्येष्टि के बाद पहुंच सके। 

chandra shekhar