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समाज की एकता ही हमारी ताकत-सोहन पोटाई

समाज की एकता ही हमारी ताकत-सोहन पोटाई

मांग को सर्व आदिवासी समाज का आज तीसरे दिन भी आंदोलन जारी
भानुप्रतापपुर। सर्व आदिवासी समाज के द्वारा संवैधानिक मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन भी प्रदेश स्तरीय आंदोलन जारी रहा।
तहसील कार्यालय के सामने स्थित धरना प्रदर्शन स्थल पर आज बुधवार को मुख्य रूप से सोहन पोटाई प्रदेश अध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए श्री पोटाई ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में  सर्व आदिवासी समाज के द्वारा 19 जुलाई से यह 146 ब्लाक में यह आंदोलन अनवरत जारी है। प्रति दिन 10 हजार लोग आंदोलन में शामिल हो रहे है। प्रदेश का यह सबसे बड़ा जन आंदोलन है। अपनी 9 सूत्रीय मांग के साथ ही स्थानीय व जनहित मुदा को जोड़ा गया है। यह
समाज के लिए एक साथ एक मुद्दा व एक लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि हम रहेंग तो समाज रहेगा समाज रहेगा तो हम, समाज की ताकत एकता में है। हमारे यह आंदोलन से प्रदेश सरकार हिल गई है,सरकार समाज के सामने घुटने नही टेकी तब तक आंदोलन स्थगित नही होगी। भूपेश सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि
आदिवासी चाहे तो प्रदेश में तीसरा विकल्प हो सकता है,यदि हमारी मांग पूरी नही किये जायेंगे तो आगामी 2023 के चुनाव में कर दिखाएंगे।
हमारी मांग नई नही पुरानी है भाजपा एव कांगेस सरकार केवल अपने घोषणा पत्र में ही जिक्र किये है,पर जमीनी स्तर पर आज भी लागू नही किया गया।
हमे यह याद रखना है कि हम आदिवासी है। रूढ़िगत परंपरा से हम हट गए है जो हमारे संस्कृति से हट गए है संस्कार भूल गए है।

वही कन्हैया गावड़े मामले पर गंभीरता दिखाते हुए कहा कि समाज इस पर आगे आये जिन लोगो का नाम उजागर हुआ है उनके खिलाफ एफआरआई दर्ज के लिए दबाव डाले।
इस अवसर पर सोहन पोटाई, मानक दरपट्टी, मेहर सिंह वट्टी, कृष्णा टेकाम,सदे सिंह कोमरे, तुषार ठाकुर,ललित नरेटी, विरेन्द्र कोरेटी, विष्णु कचलाम, संजय नेताम,भगवान कुंजाम,ज्ञान सिंह गौर, संदीप ठाकुर, बबला शोरी, शैलेन्द्र मरकाम सहित समाज के लोग उपस्थित रहे।

 आंदोलन की प्रमुख मांगे

ज्ञापन में जिला सुकमा के ग्राम सिलगेर में शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे निर्दोष ग्रामीणों के ऊपर अंधाधुंध गोलीबारी करने वालों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर परिवार को न्याय प्रदाय किया जाए। बस्तर संभाग की नक्सल समस्या पर स्थायी समाधान हेतु सभी पक्षों से समन्वय स्थापित कर स्थाई समाधान की ओर राज्य सरकार द्वारा शीघ्र पहल करें। पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में जब तक माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन समाप्त नहीं हो जाता तब तक किसी भी हालत में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदोन्नत रिक्त पदों को नहीं भरे जाने , उसे सुरक्षित रखे जाने और जितने सामान्य वर्ग के अधिकारी / कर्मचारी अनुसूचित जाति / अनुसूचचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर नियम विरूद्ध पदोन्नत हुए उसे तत्काल पदावनत किया जाकर पदोन्नति नियम 2003 एवं आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 06 नियम 1998 एवं समय - सयम पर जारी निर्देशों को उल्लंघन कर नियम विरूद्ध पदोन्नति देने वाल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं धारा आरक्षण अधिनियम 1994 के तहत दण्डात्मक कार्यवाही करने बाबत् । शासकीय नौकरी में बैकलॉग एवं नई भर्तियों पर आरक्षण रोस्टर लागू किया जावे । पंचवी अनुसूची क्षेत्र में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती में मूलनिवासियों की शत - प्रतिशत आरक्षण लागू किया जावे । संभाग एवं जिलास्तर पर भर्ती कराया जाए । प्रदेश में खनिज उत्खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जगह लीज में लेकर जमीन मालिक को शेयर होल्डर बनाए जाए । गांव की सामुदायिक गौण खनिज का उल्खन्न एवं निकासी का पूरा  अधिकार ग्राम सभा को दिया जावे । ग्राम सभा के द्वारा स्थानीय आदिवासी समिति के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को खनि पट्टा दिया जाए । फर्जी जाति प्रकरण पर दोषियों पर शीघ्र कार्यवाही हो । छत्तीसगढ़ राज्य के 18 जनजातियों की मात्रात्मक त्रुटि में सुधार किया जाकर उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए । अनुसूची में उल्लेखित जनजातियों का जाति प्रमाण - पत्र जारी नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी पर दण्डात्मक कार्यवाही किया जाए । छात्रवृत्ति योजना में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आय की 2.50 लाख की पात्रता सीमा समाप्त किया जावे । आदिवासी समाज की लड़कियों से अन्य गैर आदिवासी व्यक्ति से शादी होने पर उक्त महिला को जनजाति समुदाय के नाम से जारी जाति प्रमार पत्र आधार पर जनप्रतिधिनित्य , शासकीय सेवा तथा जनजाति समुदाय की जमीन खरीदी पर रोक लगाने के लिए संबंधित अधिनियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए । आदिवासियों पर उत्पीड़न जैसे - जमीन का हस्तातरण , महिला एवं बच्चों पर अत्याचार , हत्या , जातिगत अपमान पर अनुसूचित जाति , जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ित की प्राथमिकी दर्ज नहीं किया जा रहा है । वन अधिकार कानून 2006 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए । पेसा कानून की क्रियान्वयन नियम तत्काल बनाकर अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाए । अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों को नियम विरूद्ध नगर पंचायत बनाया गया है, इन नगर पंचायतों को विखण्डित कर पुनः ग्राम पंचायत में परिवर्तित किया जाए । ग्राम पंचायत चौगेल की जमीन जो बिना ग्राम सभा प्रस्ताव लिए बिना नगर पंचायत में स्थानांतरित किया गया उसे जल्द वापस लाया जाय । श्री गैंदसिंह दुग्गा पिता स्व . श्री गणेश राम दुग्गा निवासी ग्राम नारायणपुर ( कोकरीपारा ) के जमीन ख.न. 170 रकबा 5.386 हे , को बिना परिवार के सहमति के बगैर नगर पंचायत द्वारा गौठान बनाया जा रहा है, उसे तत्काल वापस किया जाए । गदिया पहाड़ आदिवासियों का यह मूल निवासियों का आराध्य देवी देवताओं से छेड़छाड़ बंद करें। आदि मांगे प्रमुख रूप से रखी गयीं है जिनमे कुछ प्रदेश स्तर के ब कुछ स्तानीय स्तर के मुद्दे हैं जिनपर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की गई है।