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दर्दनाक : अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल पर मरीज ने लगाया मारपीट करने, गर्भपात कराने और अवैध वसूली करने का आरोप, संतान पाने की चाह में मरीज ने घर—जमीन तक बेच दिया!

दर्दनाक : अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल पर मरीज ने लगाया मारपीट करने, गर्भपात कराने और अवैध वसूली करने का आरोप, संतान पाने की चाह में मरीज ने घर—जमीन तक बेच दिया!

जनधारा समाचार
रायपुर. अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल पर एक मरीज ने अस्पताल प्रबंधन पर मारपीट करने, तीन बच्चों का गर्भपात कराने, स्मॉर्ट कार्ड से धोखाधड़ी करने तथा इलाज के नाम पर लगभग छह लाख रूपये की अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है. पूरे मामले में नागपुर के एक डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध दिखाई दे रही है. आरोप है कि वहां के डॉक्टर ने गर्भस्थ शिशु को गर्भ के अंदर ही मार दिया! लगभग छह लाख रूपये डुबाने, अपने तीन—तीन गर्भस्थ शिशुओं को खोने के बाद जब इस दम्पत्ति ने गुस्सा जताया तो उनके साथ हाथापाई भी की गई.

टेस्ट टयूब पद्धति से संतान होने का दावा

मरीज का आर्थिक और मानसिक शोषण की यह दास्तान ना सिर्फ मार्मिक है बल्कि अस्पतालों और डॉक्टरों के रैकेट का पर्दाफाश करती है. अम्बिकापुर निवासी पीड़ित मरीज रेखा सोनी, 33 वर्ष और उसके पति संजय सोनी, 37 वर्ष ने इस संवाददाता को अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि शादी के पांच साल बाद भी हम नि:संतान थे तभी हमें राजधानी स्थित अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल का पता चला जहां के डॉक्टर ए.सुरेशकुमार टेस्ट टयूब पद्धति से संतान होने का दावा करते हैं. कुछ दिनों में डॉ. सुरेश अग्रवाल से संपर्क किया तो उन्होंने आश्वस्त किया कि इस पद्धति से इलाज कराने के बाद आप बच्चा लेकर घर जाएंगे लेकिन इसके लिए कुछ माह इलाज करना होगा.

एक लाख दिए पर कोई रसीद नही दी गई
जब हम इसके लिए राजी हो गए तो अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल की प्रबंधक स्मिता अग्रवाल ने हमें टेस्ट टयूब और हेचिंग पद्धति के बारे में समझाया और पूरे इलाज का खर्चा लगभग सवा लाख रूपये बताया. इसके अलावा दवाई का खर्चा भी 25 से 30 हजार अलग से होना बताया था. चूंकि हम सामान्य परिवार से थे इसलिए पूरा इलाज एक लाख रूपये में होने की बात तय हुई तथा हमने पैसा जमा कर दिया जिसकी कोई रसीद नही दी गई. हम नि:संतान थे इसलिए इस इलाज के लिए तैयार हो गए. लगभग तीन महीने तक अंबिकापुर से आना—जाना करते रहे और इलाज चलता रहा. साथ ही कई तरह की समस्याएं बताते और उसका इलाज करते रहे जिसमें काफी पैसा हमारा खर्च होता रहा.

गलत इलाज करने का आरोप
लेकिन जैसा कि डॉक्टर ए.सुरेशकुमार ने बताया था— हमें संतोष था कि गर्भ ठहर गया है और एक—डेढ़ महीने तक ठीक भी रहा. आश्चर्य कि हमारे केस को चार डॉक्टर हेंडल कर रहे थे. इनमें मुख्य रूप से डॉक्टर ए.सुरेशकुमार और उनकी डॉ.बेटी, पत्नी स्मिता अग्रवाल तथा नागपुर की डॉक्टर नीलम छाजेड़ शामिल थे. चार—पांच डॉक्टरों की सलाह और अंधाधुंध दवाईयां के इस्तेमाल का नतीजा यह रहा कि इस दंपत्ति का मिसकैरेज हो गया और पहली बार संतान पाने का सपना चकनाचूर हो गया. इसके साथ ही डेढ़ लाख रूपये का नुकसान भी हुआ. पीड़ितों का कहना है कि चूंकि डॉक्टर ने हमें शुरूआत में ही 50—50 के चांसेज दिए थे इसलिए हम मन मसोसकर रह गए.
कि शायद भगवान को मंजूर नही होगा. मरीज का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर ने पूरी लापरवाही बरती. दवाईयों का ओवरडोज भी दिया गया और अंतत: हमारा संतान पाने का सपना चकनाचूर हो गया.

आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की चेतावनी
इस पूरे मामले में हमने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नही बरती गई और ना ही कोई मारपीट की गई. उन्होंने पीड़ित पर ही दुरव्यवहार करने का आरोप लगाया. अस्पताल प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने
की चेतावनी दी है.

अगली किश्त में पढ़िए : दूसरी बार फिर टूटा संतान पाने का सपना लेकिन बिक गया मरीज का घर...!