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गन्ना किसानों को राहत, हाईकोर्ट ने दिये 14 करोड़ वितरित करने के निर्देश

गन्ना किसानों को राहत, हाईकोर्ट ने दिये 14 करोड़ वितरित करने के निर्देश

नैनीताल।  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को धनश्री एग्रो प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड चीनी मिल (इकबालपुर) विवाद मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी (डीएम) को निर्देश दिये हैं कि वह 14 करोड़ रुपये की धनराशि गन्ना किसानों में वितरित करे और मामले की रिपोर्ट 10 नवम्बर से पहले अदालत में पेश करे।

हरिद्वार के जिलाधिकारी की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश कर कहा गया कि चीनी मिल चीनी की नीलामी में सहयोग नहीं कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 19903 किसान पीड़ित हैं और उन्हें 2017-18 और 2018-19 के सीजन का गन्ना का भुगतान नहीं किया गया है। किसानों का कुल 154 करोड़ रूपया बकाया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीनी मिल की बैंकों के प्रति भी 266 करोड़ की देनदारी है। अभी तक चीनी को बेचकर 28 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा हुई है।

चीनी मिल की ओर से अदालत को बताया गया कि चीनी खराब हो गयी है। चीनी का रंग ब्राउन (भूरा) हो गया है जिसे बेचने में दिक्कत आ रही है। इसके बाद अदालत ने मिल से पूछा कि चीनी के स्टाक को लेकर मिल के पास कोई प्रस्ताव है तो उसे शपथपत्र के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश करें। अदालत गुण-दोष के आधार पर उस पर विचार करेगी।

सरकार और किसानों की ओर से मांग की गयी कि इस धनराशि को गन्ना किसानों को वितरित कर दिया जाये लेकिन पंजाब नेशनल एवं कोऑपरेटिव बैंकों की ओर से इसका विरोध किया गया और कहा गया कि चीनी मिल के प्रति बैकों की देनदारी भी है। इसके बाद अदालत ने बीच का रास्ता निकालते हुए हरिद्वार के डीएम को निर्देश दिये कि वह किसानों के खातों का आकलन कर 14 करोड़ (पचास प्रतिशत) की धनराशि को गन्ना किसानों में बांट दें। गन्ना किसानों के खाते में सीधे पैसे का भुगतान किया जाये। साथ ही मामले की प्रगति रिपोर्ट 10 नवम्बर से पहले अदालत में पेश करे। इस मामले में अगली सुनवाई 10 नवम्बर को होगी।

इस मामले को हरिद्वार निवासी नितिन की ओर से जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गयी। वर्ष 2019 में याचिका दायर कर कहा गया कि चीनी मिल की ओर से गन्ना किसानों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 और 2018-19 के सीजन का कुल 217 करोड़ रुपये का बकाया है।