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शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा विचार संगोष्ठी संपन्न

शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़ा विचार संगोष्ठी संपन्न

 राजनांदगांव। शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग में हिन्दी पखवाड़ा मनाया गया। इस अवसर पर हिन्दी दिवस विचार संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संस्था प्राचार्य डॉ. सुमन सिंह बघेल ने कहा कि भाषा के माध्यम से हम अपने भावों और विचारों को दूसरों तक पहुँचाते हैं, हिन्दी हमारी राजकाज की भाषा है, हिन्दी आम आदमी की भाषा के रूप में देश की एकता का सूत्र हिन्दी जन आंदोलन की भाषा रही है। हिन्दी के महत्व को गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर ने बहुत ही सुंदर रूप में प्रस्तुत किया है। भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिन्दी महानदी, आज वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी विश्व स्तर पर प्रभाव शाली भाषा के रूप में उभरी है। 

प्राध्यापक कृष्ण कुमार दिवेद्वी विभागाध्यक्ष भूगोल ने कहा कि वर्तमान समय में हिन्दी विश्व बाजार में विज्ञान की भाषा बनकर विश्व में तीसरे क्रम में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोले जाने वाली लोक प्रिय भाषा है। हमारे देश में भी हिन्दी कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक बोली और आसानी से समझे जाने वाली भाषा का महत्व इसलिए भी अधिक है। विदेश की आजादी की लड़ाई में वंदेमातरम्, भारत माता की जय, स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, जैसे नारों की भाषा भी हिन्दी रही है। वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हमारी युवा किशोर और वृद्ध पीढ़ी अपने दैनिक जीवन चर्चा में हिन्दी की ही शब्दों को अधिक से अधिक प्रयोग करें। हिन्दी में ही शुभकामना, बधाई संदेश के साथ-साथ आवेदन आमंत्रण आदि सभी हिन्दी का ही प्रयोग करेंगे, तो हिन्दी का सहज रूप से विस्तार और समृद्धी होगी। देश धरती में राम चरित मानस कामायनी, साकेत जैसे महाकाव्यों की भाषा हिन्दी में साहित्य एवं ज्ञान प्रदाता ग्रंथों की भाषा बनकर हिन्दी का गौरव बढ़ाया है। हिन्दी दिवस का सार्थक सहज संकल्प भी यही है कि हम सार्वजनिक स्तर पर हिन्दी का ही प्रयोग करें। 

डॉ. बृजबाला उइके विभागाध्यक्ष हिन्दी में कार्यक्रम का संचालन किया और उन्होंने बताया कि हिन्दी की उपयोगिता एवं महत्व को समझते हुए हमारे संविधान निर्माताओं ने 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकर किया था। यह समूचे भारत के लिए राष्ट्रीय गौरव का दिन था इसी कारण समूचे भारत वर्ष में प्रत्येक 14 सितंबर का दिन हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

निज भाषा उन्नति अहे, जब उन्नति को मूल। 

बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को सूल।। 

पढ़ो लिखौ काऊ लाख बिध भाषा बहुत प्रकार।

पै जबहिं कछु सोचिहो ए निज भाषा अनुसार।। 

भारतेन्द्र हरिश्चन्द का व्याख्यान जो उन्होंने हिन्दी वर्द्धनी सभा में मुख्य अतिथि के बतौर दिया था। भारतेन्द्र, हरिशचंद का निज भाषा से तात्पर्य सिर्फ हिन्दी से न था, अपितु बंगालियों के लिए बंगला, मराठियों के लिए मराठा, ठीक इसी तरह अन्यों के लिए अन्य भाषा महाविद्यालय की 100 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया। गीता, सीता, शीला, रमशीला, भारती, कविता, कामिनी, दुर्गा, आरती, भारती, हासमी बीए भाग तीन आदि छात्राओं ने हिन्दी संगोष्ठी में अपना भाषण एवं गीत प्रस्तुत किए। 

महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. हरप्रीत कौर गरचा, सुश्री आबेदा बेगम एवं डॉ. निवेदिता ए. लाल एवं डॉ. जीपी रात्रे विशेष रूप से उस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. बृजबाला उइके विभागाध्यक्ष हिन्दी ने किया।