breaking news New

साइबर दुनिया के उलझे खुलासे - पवन दुग्गल

साइबर दुनिया के उलझे खुलासे - पवन दुग्गल


इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस पर खुलासे को लेकर देश-दुनिया में बवाल मचा हुआ है। यह पहला मौका नहीं है, जब किसी ‘स्पाईवेयर’ से चुनिंदा लोगों के फोन टैप करने के आरोप लगे हैं। इसके लिए अमूमन सरकारों को कठघरे में खड़ा किया जाता है, जबकि वे इससे इनकार करती रही हैं। दिक्कत यह है कि इन आरोप-प्रत्यारोपों में सच कभी सामने नहीं आ पाता। फिर, भारत ही नहीं, दुनिया भर में लोगों की याददाश्त इतनी छोटी होती है कि ऐसे खुलासों पर वे दो-तीन दिनों तक तो हंगामा करते हैं, और फिर सब कुछ भूलकर अपनी-अपनी राह पर बढ़ जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘पॉलिसी वैक्यूम’ की स्थिति है। वैश्विक स्तर पर ऐसा कोई साइबर कानून है ही नहीं, जो देशों को बाध्य कर सके कि वे इस तरह की गतिविधियां न करें या ऐसी हरकत को अंजाम देने वालों को कानून के सामने खड़ा कर सकें। नतीजतन, ऐसे खुलासे बेजा चले जाते हैं।

ऐसी घटनाएं सचेत करती हैं कि तीव्र इंटरनेट के इस युग में कोई भी खुद को ‘पूरी तरह सुरक्षित’ न समझे। अभी जिस पेगासस सॉफ्टवेयर से दुनिया भर के हाारों लोगों की जासूसी की गई है, वह महज एक मिस्ड कॉल से मोबाइल में डाला जा सकता है। यह इतना शक्तिशाली सॉफ्टवेयर है कि मिस्ड कॉल का जवाब न देने पर भी यह आपके मोबाइल को अपने नियंत्रण में ले लेता है और आपकी हरेक गतिविधि को उस व्यक्ति तक पहुंचाता जाता है, जो इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल आपके खिलाफ कर रहा होता है।

समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं कि कब फोन उनका दुश्मन बन गया। इसीलिए हम नींद में बिल्कुल न रहें, बल्कि कुछ बुनियादी कदम उठाएं, ताकि अपना और अपने डाटा को सुरक्षित रख सकें। सबसे पहले, हमें साइबर सुरक्षा का महत्व समझना होगा और इसे जीवन जीने की एक शैली के रूप में अपनाना होगा। यह सोच गलत है कि सरकार साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। यह सरकार की ही नहीं, हरेक व्यक्ति की निजी जिम्मेदारी है। अपनी डिजिटल गतिविधियों को लेकर जितने सतर्क और जागरूक हम खुद होंगे, उतना ही ज्यादा हम सुरक्षित रह सकेंगे।

दूसरी बात, सावधानी और सतर्कता को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं। इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी से यह कतई अपेक्षा न रखें कि वह आपके डाटा का संरक्षण करेगी। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कई लोकप्रिय सोशल मीडिया एप के सर्वर भारत में नहीं हैं। इतना ही नहीं, अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (मोबाइल, कंप्यूटर आदि) की हर दो-तीन दिनों में जांच करें। उसमें अगर ऐसी कोई फाइल या एप दिखे, जो आपने ‘डाउनलोड’ नहीं किए हैं, तो उसे तत्काल हटा दें। जिस एप को इस्तेमाल किए 15-20 दिन हो जाएं, उसे भी ‘डिलीट’ कर दें, क्योंकि ऐसे एप से भी डाटा चुराए जा सकते हैं।

तीसरी बात, हममें से अधिकांश लोग इंटरनेट पर जो कुछ भी देखते-सुनते हैं, उन पर बहुत आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इस विश्वास को ‘अविश्वास’ में बदलने का वक्त आ गया है। हरेक जानकारी को तब तक शक की नजर से देखें, जब तक आप खुद उसकी सच्चाई को लेकर संतुष्ट न हो जाएं। इतना ही नहीं, ‘नीड टु नो’ (जानने की जरूरत) के आधार पर अपनी जानकारी साझा करें। यानी, उसे ही अपने बारे में बताएं, जिन्हें आप जानते हैं। दुनिया भर में यह जाहिर करने की जरूरत नहीं है कि आपके कितने दोस्त हैं और किस पहर, कितने घंटे आप काम कर रहे हैं?

चूंकि साइबर अपराधियों का मुख्य मकसद निजता का उल्लंघन करके नुकसान पहुंचाना होता है, इसलिए अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को सुरक्षित रखने के लिए फायरवॉल और एंटी-वायरस का जरूर इस्तेमाल करें। फायरवॉल का मकसद उपकरण के अंदर सुरक्षा की ऐसी दीवार बनाना है, जिसे यदि कोई भेदने की कोशिश करता है, तो यह न सिर्फ उसको रोकता है, बल्कि इसकी सूचना भी तत्काल दे देता है। फोन टैपिंग में भी किसी न किसी तरह से सॉफ्टवेयर को मोबाइल में ‘इंस्टॉल’ किया जाता है। यदि फायरवॉल मजबूत हो, तो इसकी हमें पहले ही सूचना मिल सकती है। अच्छी बात है कि इंटरनेट पर मुफ्त में फायरवॉल उपलब्ध हैं, जिनका हम इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह, एंटी-वायरस भी हमारे डाटा को सुरक्षित रखता है। यह भी इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध है, लेकिन बेहतर एंटी-वायरस के लिए हमें पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कोशिश करें कि कम से कम एप मोबाइल में रखें, क्योंकि हर एप एक जासूस का काम कर सकता है। वही एप डाउनलोड करें, जिसकी शर्तों से आप वाकिफ तो हों ही, उसकी ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ व ‘कंज्यूमर रिव्यू’ भी आप बखूबी समझ रहे हों। यह समझना बहुत जरूरी है कि कोई भी एप हमें मुफ्त में विश्वस्तरीय सेवा नहीं देता, बल्कि इसके बदले में वह हमें अपना उत्पाद समझता है और हमारे डाटा का इस्तेमाल अपने हित में करता है। इलेक्ट्रॉनिक फुटप्रिंट (पद्चिह्न) भी स्पाईवेयर की खुराक होते हैं। यह वह ‘धूल’ है, जिसका इस्तेमाल करते हुए न सिर्फ सरकार और एजेंसियां हमें निशाना बना सकती हैं, बल्कि अपराधी भी हमें दबोच सकते हैं। इससे बचने के लिए हमें ‘क्लीन टूल’ का नियमित इस्तेमाल करना चाहिए। भारत अभी एक नई क्रांति से गुजर रहा है, जिसे मैं ‘द ग्रेट इंडियन वोमेटिंग रिवॉल्यूशन’, यानी ‘भारत की महान उल्टी क्रांति’ कहता हूं। आज हर व्यक्ति इंटरनेट और सोशल मीडिया के मंचों पर अपना डाटा उल्टी कर रह है। यही वजह है कि आजकल साइबर दुनिया से जुडे़ वित्तीय अपराध बढ़ गए हैं। असल में, ज्यादातर लोग यह समझते ही नहीं कि ‘एचटीटीपीएस’ के साथ शुरू होने वाली वेबसाइटों से ही आर्थिक लेन-देन करना चाहिए, ‘एचटीटीपी’ के साथ नहीं। फर्जी वेबसाइटों से लेन-देन करते वक्त आपके के्रडिट या डेबिट कार्ड की जानकारी साइबर अपराधियों से साझा हो सकती है। यही वजह है कि फोन, कंप्यूटर आदि में महत्वपूर्ण सूचनाओं को ‘सेव’ न करने की सलाह दी जाती है।  

न्यू साइबर वल्र्ड ऑर्डर पोस्ट कोविड-19 शीर्षक से प्रकाशित किताब में इस लेखक ने लिखा है कि जब दुनिया कोरोना महामारी पर विजय हासिल कर लेगी, तब साइबर की एक नई वैश्विक व्यवस्था से हम रूबरू होंगे। इसमें सरकारें बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो जाएंगी और साइबर अपराध रोजमर्रा की घटना बन जाएंगे। जाहिर है, आम लोगों के डिजिटल और निजता के अधिकार पर जबर्दस्त प्रहार होने वाला है। इसलिए इस नए बदलते युग के लिए हम तैयार रहें। साइबर दुनिया में एक-दूसरे पर अविश्वास करना सीखें।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)