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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से कोरोना संक्रमण: एक दूसरे के पाले में बॉल डालने की कोशिश

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से कोरोना संक्रमण: एक दूसरे के पाले में बॉल डालने की कोशिश

-सुभाष मिश्र
महाराष्ट्र में कोरोना के केस क्या बढ़े, केन्द्र ने झट अपनी नाराजगी दिखाते हुए महाराष्ट्र सरकार को चिठ्ठी लिख दी। असम, पश्चिम बंगाल के चुनाव की महारैलियों से फुर्सत निकालकर अचानक से प्रधानमंत्री को कोरोना के बढ़ते प्रभाव की चिंता सताने लगी, उन्होंने मुख्यमंत्रियों की बैठक आहुत कर ली। महाराष्ट्र सरकार ने भी अपना पल्ला झाडऩे की गरज से जरूरी प्रतिबंध लागू करते हुए सार्वजनिक, सामाजिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाकर 50 प्रतिशत उपस्थिति तथा शादी में 50 लोग, मृत्यु में 20 लोग की अधिकतम सीमा तय कर दी। अहमदाबाद में टी- 20 मैच बिना दर्शकों के करने का फैसला हो गया। इंदौर और भोपाल में नाईट कफ्र्यू लग गया। ये सारी बाते फौरी तौर पर बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए तय की जाती है। केन्द्र, राज्य सरकारों के पाले में बॉल डाल रही है, राज्य सरकार जिला कलेक्टर को अपने स्तर पर छूटमूट प्रतिबंध लगाने की औपचारिकताओं से कोरोना संक्रमण से निपटने का नाटक कर रही है।

पिछले एक साल से पूरी दुनिया के साथ हमारा देश भी कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण की रफ्तार कभी इज़ाफ़ा होता है तो कभी थोड़ी कमी आती है। जब जैसी परिस्थितियां बनती है, सरकारें उसको देखकर उस तरह का निर्णय लेती है। बदलती वास्तविकताओं से राजनीतिक रणनीति तय होती है। यही वजह है कि कभी हमारे प्रधानमंत्री कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत ही चिंतित दिखाई देते हैं, तो कभी बहुत ही लापरवाह, कभी राज्यों के पाले बॉल डालने की कोशिश होती रहती है। इधर पिछले कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण ने एक बार फिर गति दिखाई है, और यही वजह है कि कोरोना को लेकर चिंता की लकीरें अब कुछ गहरी होती जा रही है। इसी चिंता प्रकटीकरण करने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने 17 अप्रैल को बैठक बुलायी है। कोरोना संक्रमण के नए मामले देश के साथ राज्य महाराष्ट्र केरल पंजाब कर्नाटक गुजरात तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में सर्वाधिक याने कि 87.73फीसदी प्रकरण दर्ज किए गए। बाक़ी राज्य भी धीरे-धीरे इसकी चपेट में आ रहे।

एक दूसरे के पाले में बॉल डालने की इस कवायद में पहले भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगा चुके हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा चुकी हैं। जब राज्य सरकारों ने कोरोना के प्रारंभिक दौर में केंद्र सरकार के मनमाने निर्देशों के खिलाफ आवाज उठाना शुरु किया और ताली, थाली बजाने, दिया जलाने के बाद भी जब कोरोना संक्रमण नहीं रूका तो केंद्र ने बिना देर किए राज्य सरकारों के पाले में बॉल डाल दिया।

बढ़ते मामलों की बात करें तो गुजरात में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 900 मामले दर्ज किए गये है। कोरोना की दस्तक के बीच भारत दौरे पर आए इंग्लैंड को अगले तीन मुकाबले बिना दर्शकों के साथ भारत के साथ खेलने होंगे। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच यह फैसला लिया गया है कि 16 मार्च, 18 मार्च और 20 मार्च को भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले मुकाबलों के दौरान दर्शकों की मौजूदगी नहीं रहेगी।

महाराष्ट्र में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ शहरों में लॉकडाउन या आंशिक लॉकडाउन तक लगाना पड़ा है। राज्य के सभी दफ्तर, मॉल, सिनेमा हॉल, होटल, रेस्टोरेंट 50 फीसदी क्षमता में ही काम करेंगे। सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक या धार्मिक आयोजन की इजाजत नहीं होगी। शादी में 50 से ज्यादा मेहमानों की इजाजत नहीं है। अंतिम संस्कार में सिर्फ 20 लोग ही शामिल हो सकते हैं। साथ ही कोरोना पीडि़तों के हाथ पर स्टाम्प भी लगाने का फैसला राज्य सरकार ने लिया है।

कोरोना वैक्सीनेशन की प्रक्रिया जब हमारे देश में प्रारंभ हुई तो लोगों को थोड़ी हिचकिचाहट दिखी, जो अभी भी बनी हुई है और इसकी रफ़्तार भी बहुत धीमी है। इस मामले में हाल ही में संसदीय समिति ने भी अपनी नाराजग़ी ज़ाहिर की है और उन्होंने कहा है कि अभी तक केवल एक फीसदी लोगों को ही टीकाकरण हुआ है और यह रफ़्तार रही तो सालों-साल टीकाकरण में लग जाएगा। टीकाकरण की रफ़्तार जहाँ धीमी है, वहाँ कोरोना तेज़ी से फैल रहा है, प्रतिदिन 9 हज़ार केस आ रहे हैं। यूरोप में कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है। कोरोना की जब दूसरी लहर देश के कुछ राज्यों में बढ़ती दिखाई दे रही है, तब भारत संक्रमितों के मामले में तीसरे स्थान पर बना हुआ है। यहां संक्रमितों की कुल संख्या एक करोड़ 14 लाख नौ हजार से अधिक हो गयी है, हालांकि 1,10,27,543 मरीज कोरोनामुक्त भी हो चुके हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य भी धीरे-धीरे कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ रहा है और इसमें सर्वाधिक प्रभावित यहाँ का रायपुर और दुर्ग जिला है। रायपुर में 1645 नए केस आए हैं, यहाँ पर संक्रमित केस 4038 हैं। अभी तक 3,17974 संक्रमित है और 3800 संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ भी धीरे-धीरे अब कोरोना की चपेट में आने की क़तार में हैं और इसमें जितनी गलती यहाँ के नागरिकों की उससे ज़्यादा गलती यहाँ का जो नेतृत्व करने और प्रशासनिक लोग हैं उनकी है। रोड सेफ़्टी के नाम पर जो क्रिकेट मैच इन दिनों रायपुर में खेला जा रहा है, उसमें हज़ारों-हज़ार लोग बिना किसी मॉस्क, सोशल डिस्टिंग का पालन किए आ रहे हैं। मैच से निकले बहुत सारे लोग बाद में पॉजिटिव पाए गए।

राज्य में इसके साथ ही सक्रिय कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 4098 पहुंच गई है। जिन सात मरीजो की इस दौरान मौत हुई उसमें से तीन एम्स रायपुर में भर्ती थे। इस दौरान अस्पताल एवं होम आईसोलेशन से 428 मरीजो को डिस्चार्ज भी किया गया। अहमदाबाद की तरह यहां बिना दर्शकों के क्रिकेट मैच करने के बजाए, यह कहा जा रहा है कि बिना मास्क के क्रिकेट मैच देखने जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। रायपुर में आयोजित हो रहे रोड सेफ्टी वर्ल्ड क्रिकेट सीरीज में दर्शक अब बिना मास्क के स्टेडियम में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यहां सवाल यह है कि क्या यहां के नागरिक इतने सजग और सर्तक है कि वे कड़ाई के साथ कोरोना नियमों का पालन करेंगे। पूर्व में हुए मैच के दौरान यह देखने में आया कि जिम्मेदार पदों तथा सम्मानित लोगों ने भी कोरोना नियम का पालन नहीं किया और पूरी बेशर्मी के साथ बिना मास्क के अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालते रहे। महाशिवरात्रि के दिन जिस तरह से बिना किसी भय और सावधानी के भव्य जुलूस निकले और लोगों को घंटों चक्काजाम स्थिति का सामना करना पड़ा. तब भी प्रशासन जैसी कोई चीज कहीं दिखाई नहीं दी। यह कैसा मान लिया जाए कि जब हजारों की भीड़ सड़क या स्टेडियम में आएगी तो वह कोरोना नियमों का पालन करेगी। यह चेतावनी है कि हम दिखावा पसंद संस्कृति को छोड़ ऐसा कुछ करें जो हमें इस संक्रमण से वाकई निपट सकें।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की एक कविता अनायास ऐसे समय में याद आती है...

यदि तुम्हारे घर के, एक कमरे में आग लगी हो
तो क्या तुम, दूसरे कमरे में सो सकते हो?
यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में, लाशें सड़ रहीं हों
तो क्या तुम, दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?
यदि हाँ, तो मुझे तुम से कुछ नहीं कहना है।

देश कागज पर बना, नक्शा नहीं होता
कि एक हिस्से के फट जाने पर,
बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें
और नदियां, पर्वत, शहर, गांव
वैसे ही अपनी-अपनी जगह दिखें, अनमने रहें।
यदि तुम यह नहीं मानते, तो मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहना है।