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बच्चों के बचपन को सुरक्षित बनाने के लिए आईसीपीएफ का एक अनूठी पहल

बच्चों के बचपन को सुरक्षित बनाने के लिए आईसीपीएफ का एक अनूठी पहल

 बच्चों पर बढ़ते यौन शोषण को लेकर सामाजिक संगठनों ने जताई चिंता 

नयी दिल्ली !  देशभर के सामाजिक संगठनों ने कोरोना काल में बच्चों की बढ़ती तस्करी और यौन शोषण पर चिंता जाहिर की और बच्चों के बचपन को सुरक्षित बनाने के लिए एक अनूठी पहल करते हुए इंडिया फॉर चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन फोरम (आईसीपीएफ) का गठन किया है

नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्मानित कैलाश सत्‍यार्थी ने आईसीपीएफ का उद्घाटन करते हुए आज कहा,“इंडिया चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन फोरम एक बड़े संकल्‍प, बड़ी प्रतिज्ञा की शुरुआत है। फोरम का गठन साझा संकल्‍प, सपनों और विचारों को पूरा करने के उद्देश्‍य से बनाया गया है।

यह विभिन्‍न सिविल सोसायटी संगठनों का एक ऐसा गठबंधन है जो बाल शोषण और बाल दासता को खत्‍म करने का काम करेगा। फोरम बच्‍चों के प्रति सामाजिक सोच एवं नीतियों को बदलेगा और सामाजिक चेतना का विस्‍तार करेगा। फोरम के माध्‍यम से हम ऐसे भारत का निर्माण करने की कोशिश करेंगे जहां किसी भी बच्‍चे का किसी भी तरह का शोषण नहीं होगा।”

उन्होंने बच्चों के प्रति करुणा के विस्तार पर जोर दिया और इसे समस्या के समाधान के रूप में रेखांकित करते हुए कहा,

“ दुनिया में जितने भी इतिहासों की रचना हुई है, बदलाव के जितने पृष्ठ लिखे गए हैं, उनको साधारण लोगों ने ही लिखे हैं। विशेषता इसमें नहीं है कि आपके पास कितने पैसे हैं, कितने बड़े पद हैं, आपका कितना नाम है, विशेषता आपकी इस बात में है कि आपके भीतर इसके लिए कितनी गहरी करुणा है।”

प्रयास के संस्‍थापक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आमोद कंठ ने कहा, “फोरम उन बच्‍चों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करेगा जो पारिवारिक सुरक्षा से वंचित हैं। ऐसे बच्‍चों की संख्‍या देश में तीन करोड़ से अधिक है। सामाजिक, आर्थिक विषमताओं के कारण जो बच्‍चे स्‍कूल नहीं जा पा रहे हैं, हम उनको स्‍कूलों में दाखिला दिलाने का प्रयास करेंगे। बच्‍चों के अधिकारों की पूर्ति, उनकी जरूरतों की पूर्ति ही उनके प्रति न्‍याय है।

इस न्‍याय को लेकर हम सभी बच्‍चों तक पहुंचेंगे। फोरम बच्‍चों को एक मजबूत सुरक्षा कवच देने के लिए एक बड़े एक्‍शन प्‍लान की शुरुआत है। इसका प्रभाव दूरगामी होगा। सरकारी योजनाओं, नीतियों, कानूनों को लेकर सिविल सोसायटी संगठनों के प्रयास से हम असुरक्षित बच्‍चों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। ऐसे बच्‍चों की पहचान करना और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्‍य है।”

कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन ने बच्‍चों की तस्करी और बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए यहां कांस्टिट्यूशन क्‍लब में चार दिवसीय राष्‍ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया, जिसमें बच्चों के मुद्दों पर प्रभावी हस्तक्षेप करने वाले प्रयास, शक्ति वाहिनी, बचपन बचाओ आंदोलन और प्रज्ज्वला जैसे देशभर के 70 से ज्यादा सिविल सोसायटी संगठनों ने हिस्‍सा लिया।

परिसंवाद में विचार-मंथन के बाद सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया कि कोरोना महामारी के बाद हालात जिस तेजी से बदले हैं उसमें सारे संस्‍थानों को अपने मतभेदों को भुलाकर बच्चों का जीवन संवारने के साझा सपनों की लड़ाई लड़नी होगी, जिसका नतीजा इंडिया चाइल्‍ड प्रोटेक्‍शन फोरम के रूप में सामने आया।